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Loksabha Passed RTI Amendment Bill
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क्या मोदी सरकार RTI में संशोधन कर लोगों को धोखा दे रही है ?

पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने साल 2005 में सूचना का अधिकार विधेयक को मंजूरी दी थी। 

AKANKSHA MISHRA

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लोकसभा में कल भारी विरोध के बीच सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक पास कर दिया गया और आज इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। यहां भी इस पर हंगामें की उम्मीद है। UPA की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा सूचना के अधिकार संशोधन विधेयक पर आपत्ति जाहिर की गई थी। सोनिया ने इसे लोगों के साथ धोखा वाला संशोधन बताया था। जिसपर भारतीय जनता पार्टी ने लोगों से अपील करते कहा कि कांग्रेस इस मामले में डर फैला रही है कांग्रेस के प्रभाव में नहीं आना चाहिए। अब इस बिल को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने आरोप लगाया है। अन्ना हज़ारे ने कहा कि केंद्र सरकार इस बिल में संशोधन कर के भारतीय नागरिकों को धोखा दे रही है।

दरअसल सोमवार को लोकसभा में सूचना का अधिकार कानून संशोधक विधेयक पेश किया गया। जिसमें कहा गया है, केंद्र सरकार का अब इस कानून में हस्तक्षेप होगा। नए संशोधन के तहत अब सरकार इस विधेयक पर नज़र रखेंगी और मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों तथा राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्तों के वेतन, भत्ते और सेवा के अन्य निबंधन एवं शर्ते अब सरकार तय करेगी।

जिसपर महाराष्ट के सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कहा "साल 2005 में मनमोहन सरकार ने भारत में RTI कानून लागू किया था। जिसके तहत लोगों को सरकार, प्रशासन और किसी भी कंपनी से सवाल पूछने का अधिकार दिया गया था ,लेकिन अब केंद्र सरकार अब RTI में संशोधन कर रही है जोकि देश के साथ धोखा है।”

संशोधन से आएंगे ये बदलाव

साल 2005 में लागू किये गए इस विधायक में सूचना आयुक्तों और मुख्य सुचना आयुक्तों का वेतन चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्तों के बराबर रखा गया था लेकिन इस संशोधन के बाद अब केंद्र सरकार इनके वेतन, भत्ता और अन्य मुद्दों को तय करेगी।

अगर सरकार इन आयुक्तों के पद में फेरबदल करती है तो उनकी सैलरी संबंधित अन्य विषयों को सरकार द्वारा तय किया जाएगा।

साल 2005 में जब इस कानून को पारित किया गया था तब सूचना आयुक्तों का कार्यकाल पांच साल तय किया गया था लेकिन संशोधन के बाद यह भी सरकार तय करेगी।

क्या है सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाने, सरकार के कार्य में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार को नियंत्रित करना और वास्तविक अर्थों में हमारे लोकतंत्र को लोगों के लिए कामयाब बनाना है। यह स्पष्ट हें कि एक जानकार नागरिक प्रशासन के साधनों पर आवश्यक सतर्कता बनाए रखने के लिए बेहतर सक्षम है और सरकार को अधिक जवाबदेह बनाता है। यह कानून नागरिकों को सरकार की गतिविधियों के बारे में जानकारी देने के लिए एक बड़ा कदम है।