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कांग्रेस में जान फूंकने वाला प्रियंका गांधी का ‘सोनभद्र प्लान’ कितना सफल रहा 

24 घंटे से प्रियंका का पोलिटिकल अनसन 

AKANKSHA MISHRA

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प्रियंका ने कहा 'हार नहीं मानूंगी, रार नई ठानूंगी'

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में बुधवार को हुए जनसंहार मामले में मारे गए लोगों के परिजनों से मिलने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सोनभद्र जाने पर अड़ गई हैं। उनका कहना है कि वह अगर जाएंगी तो सोनभद्र जाएंगी, नहीं तो यहीं बैठे रहेंगी। इसके अलावा प्रियंका ने यह भी कहा कि अगर प्रशासन चाहे तो मेरे साथ सोनभद्र चल सकता है। लेकिन इन सब के बावजूद प्रशासन ने प्रियंका को अनुमति नहीं दी।

प्रियंका को सोनभद्र जाने की अनुमति नहीं मिलने के बाद चुनार गेस्ट हाउस में धरने पर बैठीं प्रियंका से मिलने खुद ही सोनभद्र का पीड़ित परिवार पहुंच गया। जिसके बाद प्रियंका गांधी ने सभी पीड़ित परिवारों के सदस्यों से मुलाकात की। उन्हें पानी पिलाया और बातचीत की। प्रियंका ने लोगों से सरकार द्वारा मिल रहे मदद के बारे में पूछा। प्रियंका को देखकर पीड़ित परिवार की महिलाएं रो पड़ी। इस दौरान प्रियंका पीड़ितों का दुख सुनकर भावुक भी हो गईं। प्रियंका ने वहां मौजूद लोगों को ढाडस बंधाया, पीड़ितों के आंसू पोछे।

इस दौरान प्रियंका ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनार गेस्ट हॉउस के बाहर मुझसे मिलने आये पीड़ित परिवारों को रोका गया है। पुलिस ने 15 लोगों को अंदर नहीं आने दिया और मुझे बाहर नहीं जाने दे रहे हैं। भगवान जाने उनकी मानसिकता क्या है।

बीजेपी के प्रियंका पर आरोप

प्रियंका गांधी के धरने को लेकर बीजेपी ने खलबली मच गई है। कोई नेता इसे फोटो सेशन का नाम दे रहा है तो कोई इसे पर्यटन का नाम दे रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोनभद्र की घटना के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताया है। मुख्य मंत्री ने कहा कि 'सोनभद घटना की नींव 1955 में ही पड़ गई थी। जब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। इस घटना के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस जिम्मेदार है। हमें इस का दुख है। सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।

इंदिरा गांधी की राह पर प्रियंका गांधी वाड्रा

प्रियंका गाँधी के इस घरने को कुछ लोग इंदिरा गांधी से भी जोड़ कर देख रहे हैं। राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रियंका गांधी अब इंदिरा गांधी की राह पर चलती नज़र आ रही हैं। जो 1977 में हुआ था अब फिर 2019 में होगा। तब भी लड़ाई हुई थी अब एक बार फिर लड़ाई होगी।

दरअसल 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा देश में आपातकाल लागू किये जाने के बाद 1977 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस बुरी तरह हार गई थी। कांग्रेस की हालत 2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम से भी ज्यादा ख़राब थी। राहुल गांधी ने तो कांग्रेस की इस हार को स्वीकार कर बस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है , इंदिरा गांधी 1977 की हार के बाद राजनीति से ही संन्यास लेना चाहती थी।

लेकिन 1977 में बिहार के बेलछी में हुए नरसंहार ने इंदिरा सरकार को संजीवनी दी। 1977 में इंदिरा गांधी ने बिहार के बेलछी में हुए नरसंहार के खिलाफ एक आंदोलन चलाया। आंदोलन में शामिल होने के लिए इंदिरा को ट्रैक्टर में बैठकर जाना पड़ा। इस आंदोलन ने इंदिरा को फिर से लोकप्रिय नेता बना दिया और आंदोलन के ढाई साल बाद कांग्रेस दोबारा सत्ता में आ गई।

राजनीतिकारों का मानना है कि प्रियंका, इंदिरा की तरह राजनीतिक करती हैं। वैसे भी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की एक मात्र सीट रायबरेली है। लेकिन कांग्रेस के अलावा किसी भी विपक्षी नेता (मायावती, अखिलेश यादव) ने सोनभद्र घटना के पीड़ितों से मिलने की कोई कोशिश नहीं की है।