उदय बुलेटिन
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MDR चार्ज हुआ खत्म
MDR चार्ज हुआ खत्म|Google
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आखिर क्या होता है MDR, जिसे मोदी सरकार खत्म करने जा रही है 

कैशलेस इंडिया का सपना साकार होने के बाद MDR चार्ज को लेकर सरकार ने जो फैसला किया है उसके बाद से ऑनलाइन पेमेंट कंपनियों में हड़कंप मच गया है। 

Puja Kumari

Puja Kumari

साल 2014 में जब पहली बार केंद्र में मोदी की सरकार बनी थी तब ऐसे कई सारे नए शब्द थे जो सुनने को मिलते थे। सत्ता में आने के साथ ही मोदी सरकार ने भारत के विकास पर पूरी ताकत झोंक दी थी। उस दौरान आपने एक शब्द बहुत बार सुना होगा वो था 'कैशलेस इंडिया'। ये शब्द उस दौरान सुनने में बिल्कुल नया था लेकिन अब इससे हर कोई वाकिफ हो चुका है। मोदी सरकार के आधुनिक व तकनीकी विकास के अन्य सपने में एक ये सपना भी था जिसके जरिये सरकार देश को कैशलेश बनाना चाह रही थी।

हालांकि शुरुआत में इसे अपनाने में जनता को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा लेकिन अब ऐसा नहीं है क्योंकि इस समय हर किसी को इसकी आदत लग चुकी है। वो कहावत तो आपने सुनी ही होगी की बुरी आदतें जल्दी लगती है और अच्छी आदतों को लगने में वर्षों भी लग जाती है। अब आपको ये लग रहा होगा कि इस बारे में हम अभी क्यों बात कर रहे है क्योंकि इस बात को तो सालों बीत गए। तो बता दें कि इसके पीछे बड़ी वजह है....

दरअसल अगर आजकल आपने गौर किया होगा तो देखा होगा कि चाहे समोसे की दुकान हो या चाय की अब हर छोटी बड़ी पेमेंट लोग ऑनलाइन ही करना पसंद करने लगे है। कैशलेस इंडिया की इस मुहिम में सबसे बड़े मददगार साबित होने वाले वो ऐप जो कि ऑनलाइन पेमेंट मेथड को और भी आसान बना चुके हैं, उनके लिए अब बड़ा संकट आने वाला है। जिस संकट के बारे में हम बात कर रहे हैं उसका नाम है Zero MDR। आज हम आपको बताएंगे Zero MDR हमारी जिंदगी को कितना प्रभावित करता है।

क्या होता है MDR

सबसे पहले जानते हैं की आखिर ये MDR नाम का संकट है क्या ? तो इसे सरल भाषा में समझें तो मतलब है Merchant Discount Rate. MDR एक तरह का चार्ज है जो कि दुकानदारों पर लगाया जाता है। जी हां अगर हम कोई भी सामान की खरीदारी डेबिट या क्रेडिट कार्ड से करते है तो दुकानदार को एक तय रकम बैंक को देनी होती है। यही कारण है कि कई बार छोटे दुकानदार ऑनलाइन पेमेंट लेने से बचना चाहते हैं क्योंकि एक्स्ट्रा पैसा ग्राहक से उसे मिलेगा नहीं और ना ही वो ग्राहक से इसकी डिमांड कर सकता है ऐसे में जाहिर सी बात है कि दुकानदार के जेब में जो पैसा जाने वाला था अब बैंक को चला जायेगा इसलिए छोटे दुकानदार कैश लेना ज्यादा पसंद करते हैं।

MDR चार्ज हुआ खत्म
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किसके पास जाता है ये MDR का पैसा

ये सबसे महत्वपूर्ण सवाल है जिसके बारे में आप सभी जानना चाहते होंगे। तो जानकारी के लिए बता दे कि MDR के पैसे को 3 हिस्सों में बांटा जाता है -

  1. पहला हिस्सा मिलता है क्रेडिट या डेबिट कार्ड जारी करने वाले बैंक को।
  2. दूसरा हिस्सा जाता है उस बैंक को जिसका POS मशीन (कार्ड स्वाइप मशीन) जो कि पेमेंट के समय इस्तेमाल किया जाता है
  3. तीसरा हिस्सा जाता ऑनलाइन पेमेंट कंपनियों को। लेकिन सरकार का कहना है कि वो ये तीसरा हिस्सा देना अब वो बन्द कर देगी, जिसकी वजह से ये सारा टोटरम हुआ है क्योंकि पेमेंट कंपनियों का कहना है कि जब इनको कुछ मिलेगा ही नहीं तो ये बिजनेस कैसे करेंगी ?

अब तक कितना वसूला जाता है MDR

बता दें की जिन दुकानदारों का पूरे सालभर का कारोबार अगर 20 लाख रुपये तक का है तो ऐसे दुकानदारों को डेबिट कार्ड यानी कि ऑनलाइन पेमेंट पर 200 तक का MDR देना पड़ता है वहीं जिनका 20 लाख से भी ज़्यादा कारोबार है उनको 1000 रुपये तक का MDR देना पड़ता है। इसके अलावा अगर पेमेंट मोड में क्रेडिट कार्ड का प्रयोग किया गया है तो 2 फीसदी MDR देना होता है। लेकिन अगर बात करें पेट्रोल व डीजल की तो इसके ऑनलाइन खरीदारी के समय MDR का बोझ ग्राहकों पर पड़ता है। फिलहाल में तो 2000 रुपए की खरीदारी पर किसी भी तरह की MDR चार्ज नहींं देनी पड़ती है।

इस फैसले के पीछे सरकार की क्या है मंशा

इस बार के बजट में सरकार ने MDR चार्ज खत्म करने का फैसला किया, वित्तमंत्री ने कहा कि अब से बैंक MDR चार्ज न तो ग्राहक से लेगा और न ही दुकानदार से। सरकार का कहना है कि इसकी आपूर्ति बैंक खुद अपने बजट से ही करें। इस फैसले के बाद से ही पेमेंट इंडिया कमिशन PMC सक्ते में आ गई है।

सर्वे के अनुसार देखा जाए तो कैशलेस इंडिया बनने के बाद से भारत में अब आधे से ज्यादा ट्रांजेक्सन स्वाइप मशीन से ही होता है, नवंबर के बाद भी अगर कुछ बदलाव नहीं होता है तो ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन यह तभी संभव है जब ये कंपनियां अपना कारोबार बंद न करें। माना ये भी जा रहा है कि ये ऑनलाइन कंपनियां ग्राहकों से पैसे निकालने के लिए दूसरे तरीके भी अपना सकती है।