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Ajitesh Kumar Engagement in Bhopal
Ajitesh Kumar Engagement in Bhopal|Social Media
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साक्षी का मासूम प्रेम, दलित पति और परिवार पर खतरा, लेकिन सवाल अब भी उठते है .......!

लोगों के अनुसार आज कल की पीढ़ी की परवरिश म्युचुअल फंड के निवेश की तरह है, क्योकि इसमे भी रिस्क है !

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

नाम साक्षी जाति ब्राम्हण, प्रेमी दलित, काम भागकर शादी, आखिर इस से ज्यादा क्या मसाला चाहिए होगा न्यूज चैनल्स को, जिस लड़की को उत्तर प्रदेश का सो काल्ड दबंग विधायक और गुर्गे न खोज पाए उसे भारत के एक बड़े चैनल ने खोज निकाला और उसे अपने चैनल पर टीआरपी की देवी बनाकर पूजना शुरू कर दिया फिर शुरू हुआ नौटंकी का दौर, एंकर साहब हमदर्दी जताते हुए साक्षी को कहते हुए साफ सुने गए कि आप अपने आँसू बचा कर रखे, ये आपकी ताकत है, खैर यहाँ से शुरू हुआ नाटकीय क्रम...

इस से पहले एक चीज साफ की जा सकती है कि आजादी का हक सबको है , कोई कहीं भी शादी कर सकता है उसे जीने, रहने, खाने ,पीने( बिहार और गुजरात और अन्य ड्राई स्टेट अगर है तो को छोड़कर) की आजादी है लेकिन शादी के बाद किसी बाप को नेशनल टीवी पर लाकर शर्मिंदा करना उसे शब्दो के द्वारा बेइज्जत करना, शायद न्यूज चैनल की टीआरपी भले ही बढ़ा दे लेकिन बद्दुआ किसको मिलेगी ये आप भली भांति जानते है।

Ajitesh Kumar 

Ajitesh Kumar 

यहाँ से साक्षी का रोना धोना शुरू होने के बाद न्यूज चैनल के एंकर के द्वारा साक्षी को पिता के विरुद्ध उकसाया जाता है जिसमे साक्षी यह बताती है कि  उसे आजादी नही दी गयी, उसे मारा-पीटा जाता रहा है उसे मास काम जानबूझकर उस कालेज से कराया गया जहाँ मोबाइल फोन तक ले जाने की आजादी नही थी, उसे बंधनो में  रखा गया, उसकी हर एक्टविटी पर कड़ी नजर रखी जाती रही है।

यहाँ पर एक बात पर गौर कराना चाहूंगा कि स्टूडियो में उपस्थित अजितेश (साक्षी का पति) जिसकी उम्र और साक्षी की उम्र का अंतर साफ नजर आता है जो साक्षी के पिता का मुख्य मुद्दा था, यहाँ पर एक बात और बतानी होगी कि साक्षी के पिता हर मौके पर लोगो से बताते हुए नजर आते है कि अजितेश की एक सगाई पहले ही हो चुकी है , जिस पर भारत का ही एक चैनल न्यूज 18 अपनी मुहर लगाता है , अगर यह बात सही है तो इसमें काफी गड़बड़ झाला नजर आता है, वही न्यूज चैनल कानूनी दांव पेंच बताना नही भूलते की अगर बेटी अंतरजातीय विवाह भी कर लेती है तो भी पिता की संपत्ति पर बेटी का पूरा अधिकार है।

साथ ही जब बेइज्जती करने की सीमा ऊपर जाती है तो चैनल साक्षी के पिता को फोन लगाकर बेटी से बात कराते है बेटी अपनी बात " पापा मुझे माफ़ कर दो" से शुरू करती है और पिता यही कहते सुने जाते है "बेटा आप बालिग हो ये निर्णय आपका है, आप जहाँ भी रहो खुश रहो"
लेकिन न्यूज एंकर के मन मे कोई पूर्वाग्रह ग्रस्त कीड़ा कुचाले मार कर अगला सवाल रसीद करता है "कि आप साक्षी को स्वीकार करेंगे कि नही ?

खैर बातें होती रहती है मामले को मसालेदार बना कर परोसा जाता है, लोग चटखारे लेकर मजा लूटते है, लेकिन इस घटना के बाद से कुछ सवाल जेहन में आते है जिनका उत्तर जानना होगा
Q

1- बेटी साक्षी को किस तरह की यातना दी जाती थी, क्या कोई मार पीट का निशान दिखाई दिया है।

2- पिता ने साक्षी को मास कॉम के लिए कालेज में दाखिला दिया , किसी शंकायुक्त व्यक्ति या महिला को ऐसे कैसे बाहर भेजा जा सकता है।

3- पूरे भारत मे ऐसा कौन सा मास कमन्यूकेशन का कालेज है जहां मोबाइल फोन के ले जाने पर पाबंदी है, हालांकि जो जानकारी है साक्षी ने अपना मास कॉम वनस्थली विद्यापीठ विश्वविद्यालय जयपुर से पूरा किया है।

4-पिता के बारे में अनाप शनाप बोलती हुई साक्षी अचानक पिता से किस गलती की क्षमा माँगती हुई नजर आती है।

5-न्यूज चैनल जिस कानून की आड़ लेकर ज्ञान बघारते नजर आते है क्या उन्हें पता नही है कि ये कानून कब और कैसे लागू होता है?

6- बेटी को आत्मीय रूप से स्वीकारना और नकारना पिता का निजी निर्णय है क्यो न इसे न्यूज चैनल के द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का हथियार माना जाए।

7- बातो के बीच मे मार्मिक बात करने पर विधायक पिता ज्यादा परेशान करने पर आत्महत्या की बात कहता नजर आता है , तो क्यो ना न्यूज चैनल के इस कदम को आत्महत्या के लिए उकसाना माना जाए ।

8- साक्षी बार बार इस बात का उल्लेख करती नजर आती है कि पिता उसे और उसके पति को लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे है, तो जो सीधी साधी साक्षी मोबाइल पर वीडियो बनाकर जान बचाने की गुहार लगाकर सब जगह वायरल करा सकती है , तो क्या वह अपने उसी फोन में काल रिकार्डिंग फीचर को नही जानती ? क्या उसके पास कोई इस तरह का सुबूत है जिस से वह पिता की दी गयी धमकियां साबित कर सके।

9- जिस सोसाइटी में अजितेश का निवास है उसी कालोनी के प्रेसिडेंट ने बताया कि इतने सालों से वो उन्हें जाती से ठाकुर ही मानते थे , क्योकि अजितेश और उनका परिवार सिंह उपनाम लिखा करता रहा है, अचानक इस विस्फोटक कांड के बाद वो तुरन्त दलित में कैसे बदल गए।

10- सोसाइटी के लोगो ने जिनका अजितेश के घर से करीबी संबंध रहा है उनके अनुसार अजितेश उच्च कोटि का नशेड़ी है, वह समाज मे प्रचलित लगभग हर नशे का उम्दा सेवनकर्ता है।

11- लोगो ने अजितेश की साफगोई पर सवाल उठाये और कहा कि अजितेश के पहले भी कई लड़कियों/ विवाहित महिलाओं से रहे है सम्बंध, अजितेश के पिता जानते है कि उनका लड़का कितना साफ सुथरा है थाना इज्जत नगर और प्रेम नगर में  आपराधिक रिकार्ड से जानकारी ली जा सकती है।

Summary

अगर संविधान में सबको समान आजादी के अधिकार दिए हुए है तो वो सिर्फ साक्षी को ही क्यो ? पिता को क्यो नही? आखिर में हमारा मत फिर भी यही है कि विवाह करना या ना करना साक्षी और अजितेश का निर्णय बेहद निजी था, मीडिया और दम्पत्ति ने इस मामले को सिर्फ लाइम लाइट में आने के लिए उठाया , जिसपर लोगो की अलग अलग प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गयी है।