उदय बुलेटिन
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Tejas Express: भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन बनी तेजस इस रूट में दौड़ेगी

जानिए सरकार ने सबसे पहले तेजस को ही क्यों चुना ?

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

रेल कर्मचारियों की धमकियों और संसद में सोनिया गांधी के सवालों के बावज़ूद सरकार ने भारतीय रेलवे की मोनोपोली खत्म करते हुए रेलवे तेजस का संचालन प्राइवेट कम्पनियों के हवाले कर दिया गया है। जिसके बाद प्राइवेट हुई तेजस अपनी पहली यात्रा दिल्ली-लखनऊ रुट पर करेगी। रेल मंत्रायल के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। दरअसल भारतीय रेलवे अपने 100 दिन के एजेंडे पर आगे बढ़ाते हुए अपनी दो ट्रेनों को निजी हाथों में सौंप चुकी है। जिसमें तेजस के दिल्ली-लखनऊ रुट को निर्धारित तो कर लिया गया है जबकि दूसरे ऐसे मार्ग पर विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि दूसरा मार्ग भी 500 किलोमीटर की दूरी की रेंज ही होगा।

हालांकि इस मामले में अभी पूरा फैसला नहीं लिया गया है। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि इस फैसले में अभी एक महीने का समय लग सकता है। IRCTC इसे अंतिम रूप देने का काम कर रहा है। आपको बता दें कि दिल्ली लखनऊ रुट की दुरी 479 किलोमीटर की है। इस रुट पर सबसे तेज चलने वाली ट्रेन में हमसफर सबसे ऊपर है। हमसफ़र सवा छह घंटे में यह यात्रा पूरी करती है।

100 दिन के एजेंडे पर भारतीय रेलवे

संसद में बजट के दौरान रेल मंत्रालय ने अपना 100 दिन का एजेंडा तय किया था। जिसके तहत प्रयोग के लिए दो ट्रेनों को प्राइवेट कंपनी को सौंपा जाना था। तेजस का निजीकरण इसी एजेंडे का हिस्सा है। IRCTC इस विषय में अंतिम निर्णय 10 जुलाई को लेगी। 100 दिन के एजेंडे के तहत IRCTC अपनी दो ट्रेनों को निजी क्षेत्र में उतारेगी। इसके बदले उन्हें सालाना एक लीज की रकम मिलिगी।

रेल कर्मचारी संगठन और विपक्ष इसके खिलाफ

रेलवे के निजीकरण के पीछे सरकार का मकसद है कि यात्रियों की रेलवे के प्रति-विश्वास बढे, यात्रियों को यात्रा के दौरान अच्छी सेवा मिले, साफ-सफाई, खाना सभी सुविधाएं बेहतर हो। इसके अलावा सरकार की सबसे बड़ी मंशा घाटे से उबरने की है। लेकिन सरकार के इस फैसले से रेल कर्मचारी संगठन और विपक्ष नाराज है। रेल कर्मचारी संगठन ने इसकी आलोचना की है। इसके खिलाफ आंदोलन भी किये हैं। हड़ताल पर जाने की धमकी भी दी। लेकिन रेल मंत्रालय अपने फैसले पर अड़िग है। वहीं विपक्ष ने इसे सरकार की बूरी मंशा कहा है। संसद में UPA चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने सरकारी क्षेत्रों में निजीकारण को लोकतंत्र के खिलाफ बताया है।

सरकार ने निजीकरण के लिए तेजस को क्यों चुना ?

तेजस मोदी सरकार के पहले कार्यकाल की ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है। साल 2017 में इसका परिचालन शुरू किया गया था। तेजस भारत की सेमी हाई स्पीड ट्रैन हैं। तेजस की पहली यात्रा मुंबई-गोवा के लिए शुरू की गई थी। जिसकी दुरी 551 किलोमीटर है। तेजस ने यह सफर आठ घंटे में पूरा किया था। माना जाता है कि मुंबई-गोवा रुट रेल विभाग का सबसे व्यस्त रुट है। इस रुट में कम समय में यात्रा पूरी करने से पर्यटक को बढ़ावा मिलेगा। इसलिए सरकार से अपने पहले एजेंडे के तहत सरकार ने तेजस का चुनाव किया।