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प्रधानमंत्री आवास योजना का पर्दाफाश
प्रधानमंत्री आवास योजना का पर्दाफाश|Social Media
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प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ी गड़बड़ी, ग्राम प्रधान कॉलोनी के नाम पर गरीबों से लेता है 50 हज़ार रूपये

प्रधानमंत्री आवास योजना का पर्दाफाश, मोदी सरकार में खूब हो रही है धांधली

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

फतेहपुर जिले के गरीब, असहाय और मजबूर लोगों को घर देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की गई। जिसके शुरुआती दौर में काम भी बड़ी तेजी से हुआ। लोगों को घर भी मिला लेकिन समय के साथ-साथ इसकी हालत कांग्रेस सरकार द्वारा चलाई गई योजना मनरेगा की तरह हो गई। आवास योजना के नाम पर फर्जीवाड़ा शुरू हो गया है। मोदी सरकार के सपनों पर कुछ शातिर लोगों का ग्रहण लग गया। लेकिन अब इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो चुका है और इसकी पोल खुद एक आवेदक ने खोल कर रख दी है।

यह घटना फतेहपुर के नरैनी गाँव की है। जहां राजू दुबे नाम के एक वृद्ध व्यक्ति ने बताया की कैसे इस योजना के जरिए गरीबों को लूटा जा रहा है। ग्राम प्रधान कॉलोनी के नाम पर लोगों से 20 से 25 हज़ार रूपये की डिमांड करता है। और जब उसे पैसे नहीं मिलते तो वह कॉलोनी की सामर्थवान को बेच देता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदक राजू दुबे नाम के एक आवेदक ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा " प्रधान जी के दुआरे जाने पर अब वो कहत हैं तुम जाइये योगी जी से करवाई ले कॉलोनी। तब हम मजबूर हो गए साहेब, हमारा पूरा घर गिर रहा, धवस्त पड़ा है। हमारी जांच करवा लीजिये। कोई नहीं सुन रहा है। ना डीएम सुन रहा है, ना BDO, ना सीओ। प्रधान जी कहत है हम तुमको कभी देंगे नहीं कॉलोनी। अब पचास हज़ार रुपया हमसे मांगत रहे, हम प्रधान जी के दे नहीं पाए पचास हज़ार रुपया। फिर एक महीना 28 दिन बाद प्रधान कहत हैं हम तुम्हारा कॉलोनी दूसरे के नाम कर दिया है। पत्राण की कॉलोनी काट के अपात्रन के खेती-बारी वाले के, फतेपुर में फ्लैट है उनके, खागा में फ्लैट है, नरैनी में फ्लैट है उनकी कॉलोनी बना दिया है। हमका नहीं दिए।”

राजू दुबे आगे कहते हैं "हमारी जांच की जाए , अगर हमारी पात्र हो तो हमको आवास दिया जाए ना पात्र हो तो हमको आवास कतई ना दिया जाए। नाम पूछे जाने पर वो खत हैं नाम राजू दुबे , घर नरैनी, जिला फतेहपुर, थाना किशुनपुर।”

दरअसल, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करोड़ो लोगों को पक्का मकान देने का वादा किया गया था। मोदी सरकार के पिछले 5 साल में डेढ़ करोड़ लोगों को इस योजना के तहत घर दिया गया। लेकिन इसमें भारी झोल भी हुआ, पात्रता चयन सूची बनाने के नाम पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। जो लोग पैसे दे रहे हैं, घर उन्हें ही दिया जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में कई ऐसे मामले देखने को मिले हैं। अब प्रशासन खुद इसमें संलिप्त है तो गरीब फरियाद भी किसके सामने लगाएगें।