उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
बजट 2019
बजट 2019|Google
टॉप न्यूज़

5 ट्रिलियन डॉलर के सपने को पूरा करने के लिए कितना प्रभावी होगा ये बजट?

बजट 2019 के पेश होने के बाद सबसे ज्यादा अगर चर्चा हो रही है तो वो ट्रिलियन की, जो कि आने वाले कुछ वर्षों में ही भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती है। 

Puja Kumari

Puja Kumari

कल यानि की 5 जुलाई पूरे देश के लिए बेहद ही खास दिन था क्योंकि इस दिन पहली बार महिला वित्तमंत्री ने संसद में बजट पेश किया। वैसे चुनाव खत्म होने के बाद जनता को मोदी सरकार-2 (Modi Part-2) के बजट से काफी ज्यादा उम्मीदें थीं जिसमें से कुछ पूरी हो सकी तो कुछ अधूरी भी रह गई। बजट पेश होने के बाद अभी तक कई लोगों के मन में ये संशय था की इस बार का बड़ा आइडिया क्या है? क्योंकि लोगों को अनुमान था कि मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने से बजट में कुछ विशेष देखने को मिलेगा पर हर बार की तरह ये बजट भी लगभग सामान्य रहा। वहीं दूसरी ओर बजट के सामने आने के कुछ ही समय बाद 'ट्रिलियन' (Trillion) शब्द की चर्चा तेजी से होने लगी।

दरअसल वित्तमंत्री निर्मला सितारमण ने अपने बजट में बताया कि आने वाले सालों में देश की अर्थव्यवस्था का आकार 5 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा। वहीं इसके अलावा आज आज काशी दौरे पर आए पीएम मोदी ने भी अपने संबोधन में कहा कि आज हर तरफ सिर्फ 5 ट्रिलियन डॉलर ही चर्चा में है। लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि ये संभव नहीं हो सकता है। अब इसके बाद कई लोग कह रहे हैं कि आखिर ये ‘ट्रिलियन’ (Trillion) है क्या ? तो आसान भाषा में समझें तो 5 ट्रिलियन यानि की 5 लाख करोड़।

अगर निर्मला सितारमण द्वारा दिए गए आंकड़ों पर गौर करें तो 55 साल में पहली बार भारत की जीडीपी 1 ट्रिलियन डॉलर हुई थी। जिसके बाद बीते 5 साल में मोदी सरकार ने इसमें 1 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोत्तरी कर दी। ऐसे में आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना कोई बड़ी बात नहीं होगी।

निर्मला सितारमण
निर्मला सितारमण
google

क्या सच हो पाएगा ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी का सपना

बजट के दौरान वर्तमान सरकार ने अपनी योग्यता गिनाने के लिए बीते 55 साल के आंकड़ों को सबके सामने रख दिया लेकिन अगर इसपर विचार किया जाए तो क्या ये सही है ? वित्तमंत्री ने न ही अपनी 5 साल के सरकार की उपलब्धियां गिनाई बल्कि 55 साल के सभी सरकारों की अचीवमेंट पर सवाल भी खड़ा कर दिया। आंकड़ों की माने तो जिस तरह से वित्तमंत्री ने जो बयान दिया है तो इससे न सिर्फ भारत के सरकार को नाकाम बताया है, बल्कि दुनिया के सभी देशों के सरकार पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है जबकि ये सरासर गलत है। इसे समझने के लिए आपको इन आंकड़ों पर गौर करना होगा....

वर्ल्ड बैंक के आंकड़े

1964 में दुनिया की अर्थव्यवस्था का आकार 1.8 ट्रिलियन डॉलर

2014 में दुनिया की अर्थव्यवस्था का आकार 79.29 ट्रिलियन डॉलर

2019 में दुनिया की अर्थव्यवस्था का आकार 87 ट्रिलियन डॉलर

भारतीय अर्थव्यवस्था के पिछले वर्षों के आंकड़ो पर नजर डालें तो साल 1964 में 56.48 बिलियन डॉलर था। इस दौरान भारत दुनिया में सातवें नंबर पर था यानि की टॉप 10 की लिस्ट में शामिल था और साल 2019 में छठे स्थान पर है। हालांकि स्थान में परिवर्तन हुआ है लेकिन इतना भी नहीं कि हम 55 साल के सभी सरकारों को सवालों के घेरे में खड़े कर दें कि उन्होने कुछ नहीं किया। क्योंकि वित्तमंत्री के बयान से तो यही लगता है कि जो भी हुआ सिर्फ बीते 5 साल में ही हुआ इससे पहले भारत अंधेरे में जी रहा था।

अब इस नए बजट के सपने में एक सवाल और आता है, वो है प्रति व्यक्ति आय की बात। जी हां प्रति व्यक्ति आय को देखा जाए तो साल 2014 में 169 वें नंबर पर था और साल 2018 में भारत का स्थान दुनिया में 142 वें नंबर पर। इस दौरान धाना, नाइजीरिया जैसे देश भारत से आगे थें लेकिन यहां इस बात पर कोई चर्चा नहीं होती।

जाहिर सी बात है जैसा कि वित्त मंत्री ने भी कहा कि उनकी सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ा तो क्या प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत इन देशों से आगे नहीं निकल सकता था। क्या इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बाद भी भारत के लोगों की आय कम होना आवश्यक नहीं है ? अब ये तो आप खुद भी भली-भांति समझ सकते हैं।