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Viral Video Of Government School Teacher
Viral Video Of Government School Teacher|Social Media
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Video: समाज का नींव निर्माता खुद मकान ढहाने की जुगत में

Video: सरकारी टीचर ने बच्चों से कहा, 200 रुपये कमाने की औकात नहीं, मिड डे मिल खाने आ जाते हो, टीचर चाहिए तो प्राइवेट स्कूल चले जाओ। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पाय, बलिहारी गुरु आपने ,गोविंद दियो बताय       

कबीर दास जी

आज जिस वायरल वीडियो का विश्लेषण करने जा रहे है उस वीडियो में दिख रही शिक्षका को कबीर दास जी देख लेते तो अपने गुरु की महानता को दर्शाने वाले दोहे को लिखने के बाद आत्महत्या कर सकते थे, कबीर दास जी ने जिस प्रकार के गुरु का वर्णन किया है, वैसा गुरु मिलने मात्र से जीवन धन्य हो जाता है, लेकिन इन गुरु जी को माफ कीजियेगा ये महिला भी है, जिसे त्याग और स्नेह की प्रति मूर्ति कहा जाता है।

अभी हाल में ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो बड़े जोर-शोर से घुमाया जा रहा है। वीडियो के ठीक सामने कुछ बच्चे बैठे हुए हैं, बच्चों के पीछे एक टेम्पो ट्रैक्स की क्रूजर सवारी गाड़ी खड़ी है। संभवत: वह गाड़ी शिक्षकों को लाने ले जाने में प्रयोग होती होगी।

तो वीडियो महिला शिक्षक के चिल्लाने से शुरू होता है। जिसमें महिला शिक्षक यह कहते हुए साफ सुनी जा सकती है "अगर मैं लेट हो जाया करूँ तो बैग उठाकर गायब हो जाया करो, दो मिनिट लगेंगे सही करने में । रिजल्ट भी मुझे ही देना है और टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) भी मुझे ही देना है। जब तुम्हारी मैडम नहीं आती है तो उस दिन बैग उठाओ और छुट्टी मान लो”। (संभवता महोदया उस सरकारी स्कूल की हेडमास्टर जान पड़ती है)

आगे मेडम कहती है कि "यहां मेरा बनाया हुआ टाइम ही चलेगा, इतने समय के पाबंद हो तो कान्वेंट स्कूल में जाओ, यहां मुफ्त का मिड डे मील मत खाओ", बाद में अध्यापिका का इशारा बच्चों के परिवार पर होता है, शिक्षक कहते हुए सुनी जा सकती है "दिन भर में दो सौ रुपये नहीं कमाते हो, और इस कदर तेवर है, सरकारी स्कूल है तो भागे आ जाते है यहां।”

फिर शिक्षिका का गुस्सा कुछ अलग तरीके से निकलता है। शिक्षिका बच्चियों से कॉपी निकालने के लिए कहती है और कॉपी निकालने में लगते हुए समय को देखकर बच्ची को कूटना शुरू कर देती है। संज्ञान रहे इस वक्त तक महोदया अपने भानुमति के पिटारे (बैग) से सामान को निकाल रही होती है।

इसके बाद मेडम ताने मारने में व्यस्त हो जाती है ,कहती है "ना मेरी सुनो न मुझे सुनाओ, अपसेन्ट हो जाओ और भागो यहां से" भागो सुनकर बच्चे अपना अपना बैग संभाल कर निकलने लगते है, तभी दीदी जी भयानक सी लाइन कहते हुए सुनी जा सकती है " कि कल से मत आना ,अगर आना तो अपने माँ बाप को लेकर आना, अगर नहीं आये तो तुम अपने माँ बाप के नहीं।”

सारांश यह है कि किसी बच्चे ने टीचर के लेट आने के लिए पूंछ लिया होगा तो मेडम बिफर गयी। उनके आत्मसम्मान को ठेस लगी कि पचास हजार की मुफ्त की सैलरी उठाने वाली टीचर के बारे में सवाल करने की हिम्मत इन जमीन के लोगों की कैसे हुई। अब असल मुद्दा यह है कि जिस शिक्षक को राष्ट्र निर्माता जैसे शब्दों से नवाजा जाता है , उसके मन मे नॉनिहालो के लिए ऐसे विचार ?

एक महिला शिक्षक जिसके कंधे पर ममता और शिक्षा दोनों की जिम्मेदारी होती है वह इतनी गैर जिम्मेदार कैसे हो सकती है।

बच्चों की स्कूल ड्रेस उत्तर प्रदेश के किसी सरकारी विद्यालय जैसी समझ में आती है। सब बच्चों ने लाल रंग के स्वेटर भी पहन रखे है ,तो यह घटना निश्चित ही सर्दियों की है। इस वीडियो को शिक्षक की सहकर्मी ने ही अपने मोबाइल से शूट किया है वो भी इनकी नजर बचाकर, क्या पता अगर उनको मालूम हो जाता तो मेडम का गुस्सा सातवें आसमान पर जा सकता था और मार कुटाई भी हो सकती थी।

वीडियो पुराना है लेकिन फिर भी सवाल जस का तस है कि अगर ऐसे शिक्षक प्रणाली में जीवित है तो बच्चों का भविष्य गर्त में है। शिक्षक को स्वयं ज्ञान होना चाहिए कि जो सैलरी इन्हें इनके परिवार के भरण पोषण के लिए भारी मात्रा में मिलती है इसमें इन्हीं बच्चों का हाँथ है, और मिड डे मील के लिए तो मेडम इतने गुस्से में नजर आती है मानो मेडम अपनी थाली से बच्चों को भोजन परोसती हो।