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मार्क एंड्रयू चार्ल्स
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छह पन्नों में लिख दी पूरी कहानी पंखे से झूल गया आईआईटी छात्र 

क्या सच में चिंता व डिप्रेशन ऐसी समस्या है जिससे व्यक्ति जान देने को मजबूर हो सकता है ? इस खबर को पढ़ने के बाद आप भी यही सोचेंगे। 

Puja Kumari

Puja Kumari

दु:ख, भय, निराशा, असफलता ये सभी कुछ ऐसे शब्द हैं जो हर किसी के जीवन में कई बार आते हैं। हर व्यक्ति को इसका सामना करना पड़ता है लेकिन क्या इसका मलतब ये है कि इन चीजों से निराश होकर आत्महत्या जैसा गुनाह कर लेना चाहिए ? ये हम आपसे इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि हमारे देश की जनता में खासकर युवा वर्ग ऐसा कदम उठा रहे हैं।

हाल ही में आईआईटी हैदराबाद (IIT-Hyderabad) के छात्र ने सुसाइड कर लिया, और इस खबर के सुनते ही हर कोई सन्न रह गया। हालांकि ये पहली बार नहीं हुआ है जब किसी होनहार स्टूडेंट ने सुसाइड (Suicide) किया हो। आए दिन आजकल इस तरह की खबरें सुनने को मिलती रहती है, आईआईटी देश के सवोत्तम संस्थाओं में से एक है और जाहिर सी बात है कि इसमें पढ़ने वाले स्टूडेंट भी काफी टैलेंटेड होंगे। पर जैसे ही इस छात्र ने आत्महत्या कि लोगों के मन में यही सवाल आया कि आखिर ऐसा भी क्या हो गया जो इस होनहार छात्र को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया?

सबसे पहले तो बता दें कि जिस छात्र की हम बात कर रहे हैं वो उत्तरप्रदेश के वाराणसी का रहने वाला मार्क एंड्रयू चार्ल्स (Mark Andrew Charles) था। मार्क आईआईटी-एच से मास्टर ऑफ डिजाइनिंग का कोर्स (masters of design) कर रहा था जिसका समय भी लगभग पूरा हो चुका था और वो अपने प्रेजेंटेशन की तैयारी में लगा हुआ था। लेकिन किसी को क्या पता था कि मार्क ऐसा कदम उठा लेगा।

पुलिस ने मार्क का शव उनके ही कमरे में पंखे पर लटके हुए बरामद किया। इसके साथ ही साथ 6 पेज का एक सुसाइड नोट भी मिला। इस 6 पेज के सुसाइड नोट को जब पढ़ा गया तो उसमें कुछ ऐसी बातें लिखी थीं जिसने हर किसी को हैरत में डाल दिया।

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मार्क एंड्रयू चार्ल्स

आइए जानते हैं मार्क ने सुसाइड करने से पहले उन 6 पन्नों में क्या लिखा

जानकारी के अनुसार, मार्क (Mark Andrew Charles) ने अपने 6 पन्ने के सुसाइड नोट में लिखा था कि अभी तक मुझे कोई भी जॉब नहीं मिली है और शायद मिलेगा भी नहीं क्योंकि इस दुनिया में कोई भी असफल व्यक्ति को जॉब देना नहीं चाहता। मैं अपने रिजल्ट को देखकर हैरान हो गया, मैंने भी बाकियों की तरह कई सारे सपने देखें थें पर एक पल में वो सब टूटकर बिखर गया। लोगों के सामने मुस्कुराना और मैं ठीक हूं का दिखावा करके थक गया हूं।

मार्क आगे लिखते हैं कि मेरे दोस्त व मेरे परिवार मुझे माफ कर दें क्योंकि मैने आपको निराश किया है। मैं वो करने जा रहा हूं जो आपने कभी सोचा नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मैं किसी लायक नहीं हूं। इतने अच्छे संस्थान में पढ़ाई करने के बावजूद मैं अच्छे मार्क्स व जॉब पाने में असफल रहा। मुझे माफ करना। इसके अलावा मार्क ने यह भी लिखा की मेरे शव को कृपा करके मेडिकल कॉलेज को दान कर दें क्योंकि मरने के बाद कम से कम मेरा शव डॉक्टरों के कुछ काम आ जाए।

मार्क की तरह बीते माह एक और केस सामने आया था जिसमें मेडिकल की होनहार छात्रा पायल तंडवी ने जातिवाद के कारण आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा हाल ही में बीएचयू के मेडिकल साइंस की एक छात्रा ने भी हॉस्टल में सुसाइड कर लिया था। इन सभी मामलों को सुनकर तो यही लगता है कि आज का युवा वर्ग दु:ख के कारण स्ट्रेश व डिप्रेशन की गिरफ्त में इस कदर आ जाता है कि उसके पास सुसाइड के अलावा और कोई रास्ता ही नहीं दिखता।

डब्लूएचओ (WHO) के 2018 का आकड़ा कहता है कि पूरे विश्व में हर साल तकरीबन 8 लाख लोग सुसाइड करते हैं। इससे ये साफ समझ आ रहा है डिप्रेशन व तनाव, आजकल के लोगों में एसिडिटी व मोटापे से भी ज्यादा तेजी से फैल रहा है।

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