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Video: पाकिस्तान के मुजाहिद, सिपाही का इकबालिया बयान

इस वीडियो को देखने के बाद भारत का हर मुसलमान बोलेगा “अल्लाह का एहसान है कि हम हिंदुस्तानी है”

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

अभी हाल में ही सोशल मीडिया पर एक पाकिस्तानी की आत्महत्या के पहले का इकबालिया बयान चर्चा में है। जिसमें राणा जावेद नाम का शख्स अपनी आत्महत्या करने के कारणों, और पाकिस्तान के हालिया हालात बताने की कोशिश कर रहा है। सूत्रों के अनुसार अब राणा जावेद इस दुनिया मे नहीं है। राणा जावेद ने लोगों से किये गए अपने वादे के मुताबिक अपनी जान पाकिस्तान की बहती नहर में डूब कर दे दी है।

करीब 19 मिनिट और 40 सेकेंड के उस वीडियो में राणा जावेद न सिर्फ अपनी कहानी कहता है। बल्कि वह पाकिस्तानी समाज के हर वर्ग और पहलू को छूने को कोशिस करता है, साथ ही कामयाब भी होता है।

वीडियो की शुरुआत में राणा जावेद लोगों को यह बताता है कि यह उसका आखिरी वीडियो है। इसके बाद मैंने आत्महत्या का निश्चय किया है। और ये आत्महत्या किसी डर या या दबाव की वजह से नहीं है। ये मेरा बेहद निजी चुनाव है। आपको मेरी आँखों मे डर या ख़ौफ़ नजर नहीं आएगा।

हालांकि राणा जावेद आगे के क्रम में यह बताता है कि वर्तमान की स्थितियां ऐसी है कि मेरे लिए सिर्फ दो रास्ते बचते है। पहला मुल्क को छोड़कर चले जाना, जो मैं कभी नहीं कर सकता , दूसरा जालिमों के हांथो पकड़ कर मारा जाऊ, जो कही न कही मेरे जमीर और मेरे परिवार वालो के लिए बेहतर नहीं होगा।

नवाज शरीफ है असली नेता

इस लिए मेरे पास एक तीसरा रास्ता बचता है, "खुदकुशी" क्योंकि इसमे मेरा मुझपर हक होगा, ये मेरा निर्णय होगा। राणा जावेद अपने पाते कि पुष्टि के लिए अपना पूरा नाम राणा जावेद और जिला भक्कर, झंडा वाला बताता है। राणा के आगे बताया कि राजनैतिक रूप से वह नवाज शरीफ की विचार धारा को ठीक समझता है ,इसी लिए वह पाकिस्तान की PMLN को खुद के सबसे करीब पाता है।

राणा जावेद के अनुसार उसकी किसी खासो-आम से कोई बुराई नहीं है। उसका विरोध आतंकवाद, फ़िरकापरस्त लोग, सेना के चंद जनरलों से है, जो पाकिस्तान में इंसानियत की जगह बेवकूफी और जहालत की बाते फैलाने में यकीन रखते हैं। मैं उन मुल्लाओं की नीयत पर शक करता हूँ, जो दूसरे धर्म को गलत या बेबुनियाद समझते हैं। धर्म चुनना व्यक्ति का निजी चुनाव है , उसे उसकी मर्जी के चुनने दीजिये।

जालिम पाकिस्तानी सेना

राणा जावेद आगे यह कहता है कि वह सेक्युलरिज्म पर भरोसा रखता है। वह विज्ञान पर एतमाद करता है, वह शऊर पर बात करना पसंद करता है।

राणा जावेद पाकिस्तान की सेना के जनरलों पर बात करते हुए कहता है कि जब सियासतदानों की जवाबदेही अदालत में होती है तो सेना के जनरलों की क्यों नहीं ? क्या वो सबसे ऊपर है ?

राणा जावेद के अनुसार वह खुद सेना में अपने पांच कीमती साल खपा कर आया है। उसका सेना से बाहर आना बेहद निजी था। वह घर से दूर नहीं रह सकता , उसे सेना के कायदे कानूनों में इंसानियत की कमी मिली।

आगे राणा जावेद ने बताया कि आखिर उसके और उसके परिवार के पीछे सेना , मिलिट्री इंटेलिजेंस और पुलिस के पीछे लगने का मुख्य कारण क्या था......सिर्फ मेरे खयाल और सवाल पूंछने की आदत।

और मैं काफिर हो गया.....

क्या सर्फ कही सुनी और सुनाई बातों पर यकीन कर लेना ठीक है। राणा जावेद के अनुसार उस पर अल्लाह की नाफरमानी की तोहमत लगाई गई वो भी सिर्फ एक पोस्ट की वजह से ,मैन सिर्फ एक सवाल पूंछ लिया था कि लोग कहते है कि इस्लाम में ये फला फला जानवर हराम है, इनको जरूरत में नहीं लाया जा सकता या फिर खाया नहीं जा सकता। तो मेरा अहम सवाल यह है कि "जब अल्लाह ने इन जानवरों को हराम किया तो इन्हें बनाया ही क्यों?

और इस सवाल की वजह से मैं काफिर हो गया .......

क्या सवाल पूंछना गलत है ?

मैं काफ़िर नही हूँ, मुझे अल्लाह पर पूरा भरोसा है। मुझे इस्लाम पर पूरा एतमाद है। यहां तक कि मुझे हर धर्म पर भरोसा है। ये लोगों का निजी मसला है कि वो किस धर्म को मानते है। लेकिन किसी बात को बेस बनाकर मुझे दीन की बदनामी करने वाला इंसान बना दिया गया....

क्या सवाल पूंछना गलत है ?

इसी बात को पकड़ कर मेरे घर पर सेना के ख़ुफ़िया विभाग मिलिट्री इंटेलिजेंस अउ पुलिस ने छापे डाले। बिना जाने बिना वारंट के मेरे घर मे तलाशी ली गयी, मेरी बहनों के साथ बुरा सुलूक किया गया। मेरे हाँथ न लगने की वजह से मेरे भाई को उठाकर इंट्रोगेट किया गया जो खुद सेना की AMC (आर्मी मेडिकल कोर) में है।

राणा जावेद ने साफ लफ्जों में कहा कि सेना कभी गलत नहीं हो सकती। क्योंकि उसने खुद सेना में 5 साल बिताए है। उसे तो मुठ्ठी भर जनरलों ने बर्बाद कर रखा है।

मैं उन जनरलों के खिलाफ हूँ,

मैं जहालतो के खिलाफ हूँ,

मैं तानाशाही के खिलाफ हूँ

और आखिरी बात मैं सेक्युलरिज्म की बात करता हूँ, मैं किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हूँ।

बच्चों को बरगला कर आतंकी बनाती है सेना

राणा ने बताया कि जब वह 9वीं क्लास में था तब उसके स्कूल में जैस ए मोहम्मद के आतंकी तकरीरे करने आते थे। उनके जमीर को उकसाया जाता था बरगलाया जाता था कि कश्मीर में तुम्हारी माँ बेटियों से साथ गलत हो रहा है, उठो और बदला लो।

आखिर वहीं हुआ जो वो चाहते थे, हमने अपने कुछ साथियों के साथ हथियार उठाये और बालाकोट में हमें रखा गया। तभी मुझे पता चला कि वहाँ पाकिस्तान की फौज पूरी तरह रहती है। आतंक और सेना एक दूसरे का नाम है।

और इस तहत एक काफिर ने इंसानियत के लिए मौत को चुना

वीडियो का अंत बेहद भावुक है। जिसमें वह अपने भाई बहनों, वालीदान से माफी की गुजारिश करता है, वह कहता है कि अब्बू मैं आप को वह सम्मान नहीं दे पाया जिसके आप हकदार थे। "और अम्मी अगर मेरी जिंदगी 1000 साल की होती तो आपके साथ रहना पसंद करता। लेकिन यह मुमकिन है नहीं, मुझे कुछ तो करना होगा। मुझे इंसानियत के लिए कोई न कोई कदम उठाना पड़ेगा।

राणा के अनुसार वह सबसे खुश इंसान है। वह फ्रेस्टेड नहीं है। वह टाइम निकाल कर भारत के नामचीन पबजी खिलाड़ी मोर्टल, क्रोन्तन, और डायनमो को देखता था, थोड़ा टिक टॉक, और यूट्यूब, लेकिन मुझे इस तरह फंसाने की कोशिश की गई ,मुझे रॉ का एजेंट बताया गया, खुदा का विरोधी बताया गया।

पाकिस्तान में सवालों वाले मुँह पर ताले लटकाए जाते है। लेकिन कब तक, या खुदाया रहम कर इन्हें इल्म दे, इन्हें शऊर दे, जिस से ये जहालत की तरफ न जाये।

मुझे खमोश करने के लिए कितनी मेहनत नहीं की गई, लेकिन यकीन मानो आज नहीं तो कल पाकिस्तान में लाखों की तादाद में राणा जावेद पैदा होंगे बस थोड़ी देर है, या अल्लाह इन्हें जगाने में देर मत करना।

आखिर में राणा जावेद देश और दुनिया के नेताओं से फरियाद करता है कि पाकिस्तान में खूनखराबा हटाकर जम्हूरियत बनाई जाए जिस से इंसानियत जिंदा रहे।

आखिरी सवाल

राणा जाबेद का यह बयान ना सिर्फ पाकिस्तान की सेना के अफसरशाही पर सवाल उठाता है बल्कि वहां की कट्टरपंथी सोच को दिखाता है, अगर आप ने किसी धार्मिक सोच पर सवाल उठाया तो ये हराम है। सेना द्वारा नवाज शरीफ को कठपुतली की तरह नचाना, बालाकोट पर सेना का आतंकियों के साथ होना ,उन्हें सुरक्षा देना कई ऐसी बातों पर मुहर लगाता है जिनके बारे में दुनिया को सिर्फ खबर है।

ये बात भी किसी से छुपी नहीं है कि आज पाकिस्तान के क्या हालात है, वह न सिर्फ कर्जे में डूब रहा है बल्कि उसके बाशिंदे तिल-तिल कर मर रहे हैं। देखते है राणा जावेद की शहादत कितनो को जगा पाती है।