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आजम खान ने फिर की बदजुबानी, बिना नाम लिए जयाप्रदा को कहा र***

आजम खान ने एक बार फिर अपने बयान से तहलका मचा दिया

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

भारतीय नेताओं की बदजुबानी जग जाहिर है, लेकिन पिछले कुछ वक्त से सपा नेता आजम खान इस मामले में पहले पायदान पर काबिज हैं। लोकसभा चुनाव के वक्त उन्होंने जया प्रदा के अंडर गारमेंट्स को लेकर टिप्पड़ी की थी।

जिसमें उन्होंने कहा था कि "मुझे तो पहले ही दिन से पता था कि किसकी *****का रंग खाकी है”, और इसी क्रम में एक बार फिर आजम खान ने बिना जयाप्रदा का नाम लिए सीधा निशाना ठोका है।

बकौल आजमखान "हम बच्चे पढ़ाते हैं हमने रं**खाना नहीं खोला है, ना ही नाचघर खोल रखा है। आजम खान यही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा " मैं रं**शब्द का उपयोग ख़ासतौर पर कर रहा हूँ, ये शब्द कहाँ जाकर लगेगा, समाज में इस शब्द को मोहतरम मान लिया जाएगा, तो समाज कैसे चलेगा।"

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कुल मिलाकर यह निशाना सीधा-सीधा जया प्रदा पर मारा गया है। जो कि नारी अस्मिता के लिए बेहद अपमान पूर्ण है। और एक स्वस्थ समाज में इसकी कोई जगह नहीं है।

यहाँ तक कि इस शब्द को यहाँ पर लिखना भी शर्मिंदगी पूर्ण काम है, हमने जानबूझकर उस शब्द को सांकेतिक रूप से लिखा है। अगर इसे पूरा लिखा जाएगा तो हम अपने आप को कभी माफ नहीं कर पाएंगे।

मॉब लीचंग पर भी बोले आजम

अपने सुंदर वचनों के बाद आजम खान ने झारखंड में हुई मॉब लिंचिंग का आरोप सीधा-सीधा पुलिसकर्मियों पर लगाया दिया। उन्होंने कहा कि मरने वाले ही उसे पुलिस के पास ले गए , और पुलिस आरोपी को अस्पताल न ले जाकर उसे पुलिस स्टेशन ले गयी।

आगे आजम खान ने कहा " क्या आप जानते हैं 302 का मुजरिम बरी हो जाता है लेकिन 307 में नहीं, क्योंकि 307 का भुक्तभोगी कलमबंद बयान दे जाता है, इसी लिए उसे जानबूझकर मार डाला गया, ताकि वह बयान दे ही ना पाए ”।

मॉब लिंचिंग पर आजम खान का बोलना न सिर्फ जायज है बल्कि जरूरी भी है । लेकिन किसी महिला के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग करना नेताओं की गरिमा को मिट्टी में मिला देता है। अगर ऐसे नेता हमारे समाज का प्रतिनिधित्व करेंगे तो हमारे समाज का क्या होगा ?