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मुरादाबाद लिंचिंग
मुरादाबाद लिंचिंग|Social Media
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लिंचिंग का एक और चेहरा, लेकिन मामला अलग धर्म का होने से किसी को फिक्र नहीं 

तेरह वर्षीय बच्ची का जबरन दो बार अपहरण, पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

उत्तर प्रदेश में एक जिला है मुरादाबाद, और गांव का नाम है अलियापुर।

इस गांव की 90 % आबादी मुस्लिम हैं और इसी मुस्लिम बाहुल्य बस्ती के बीच रहता था गंगाराम का परिवार। जिसमें करीब पच्चीस साल का बेटा और 13 साल की बेटी ,और पत्नी शामिल थे। मुहल्ले के ही दानिश नाम के व्यक्ति ने अपने बहुलता का फायदा उठाकर तेरह वर्षीय बच्ची का जबरन अपहरण किया। इस बाबत गंगाराम ने आरोपी के पिता से शिकायत की। शिकायत मिलने पर उन्होंने उल्टा गंगा राम को ही धमकाया और अंजाम भुगतने की बात भी समझाई। खैर किसी तरह दूसरे गांव के प्रधान और सामाजिक दबाव डलवा कर बच्ची को राजस्थान से बरामद किया गया। इस वक्त के बीच बच्ची के साथ क्या-क्या हुआ इस बाबत कोई जानकारी उपलब्ध नहीं, लोक-लाज के कारण गंगाराम चौहान ने पुलिस में इत्तला भी नहीं की।

मुरादाबाद लिंचिंग
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दूसरी बार किया अगवा

लड़की की बरामदगी के मात्र कुछ दिन ही बाद 18 जून को दोबारा जबरन घर से बच्ची को अगवा किया गया। और इस बार पिता ने आतंकित होकर दिलारी थाने में एफ आई आर दर्ज (FIR) कराई। लेकिन थाना इंचार्ज दीपक कुमार द्वारा लापरवाही बरती गई , और इस घटना के बारे में न तो उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया और न कार्यवाई की गई।

लेकिन जैसे ही आरोपी पक्ष को इस मामले की जानकारी हुई उन्होंने दल बल के साथ गंगाराम चौहान के घर पर हमला कर दिया। और इस हमले में घायल होकर गंगाराम की मौत भी हो गयी, बेटा और पत्नी भी बुरी तरह चुटहिल हुए। किसी तरह जान बचाकर पड़ोस के गांव में अपने रिश्तेदारों के घर मे रहने का बंदोबस्त किया। अब जब मामला सोशल मीडिया में गूंजा तो पुलिस अधिकारियों के हाँथ पांव फूल गए। और लापरवाही बताकर जिम्मेदार पुलिस अधिकारी दीपक कुमार को सस्पेंड करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी, और बच्ची को वापस लाने की कवायद शुरू कर दी।

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हालांकि अभी भी बच्ची का कोई सुराग नहीं है

पीड़ित परिवार का कहना है "कि अगर किसी की टोपी उछाल दी जाती है तो वह राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है लेकिन यहां तो भीड़ के साथ पचपन वर्षीय व्यक्ति को मार दिया गया है। नाबालिग बच्ची को दो बार अगवा किया गया है। लेकिन कोई समाचार पत्र और संगठन इस बाबत जानकारी लेने नहीं आया"

भुक्तभोगी ने बताया कि हमने उस बस्ती से मकान बेचने की कोशिश भी की लेकिन उन्होंने बिकने भी नहीं दिया, खरीददारों को भड़का, धमका कर बैरंग वापस कर दिया जाता था, और आज हम इस घटना से दो चार होना पड़ रहा है।

हालांकि गांव में पर्याप्त पुलिस बल तैनात है और आरोपी दानिश और शफात फरार बताये जा रहे हैं और पुलिस उन्हें खोज निकालने का दावा भी कर रही है। लेकिन अब असल सवाल जनता मीडिया और सरकारों से है। की क्या आपके मायने धर्म के अनुसार बदल जाते हैं ? या फिर इस मामले में पीड़ित के हिन्दू होने से मामला उतना मसालेदार नहीं बनता ?