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आतंकी आरिफ हुसैन बट (Aarif Hussain Butt)
आतंकी आरिफ हुसैन बट (Aarif Hussain Butt)|Social Media 
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कश्मीर में आतंकियों ने एक आतंकी को गोली मारी

एक आतंकी की कहानी, उसी की जुबानी 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

वो कहते हैं ना जब इंसान भुगतता है तभी चेतता है......

यही घटना कश्मीर के नए-नए आतंकी के साथ हुई। जिसने अपना मुख्य मकसद देश और सेना को बर्बाद करना बना रखा था। लेकिन वक्त कभी किसी के बंधन में नहीं रहता वह पर्दे उखाड़ फेंकता है। आतंकी बनने के कुछ दिन बाद ही उसका सामना उस सच से हुआ, जिस पर वह आंखे मूंद कर भरोसा कर रहा था। उसे मुसलमानों और दीन पर होते जुल्म की बनावटी बाते दिखा सुना कर बरगलाया गया था और अल्लाह की राह में शहीद होने पर जन्नत का रिजर्वेशन पक्का बताकर ब्रेनवॉश किया गया था। लेकिन आखिर में उसके ही समूह ने उसे गोली मारकर मरने के लिए छोड़ दिया।

दक्षिण कश्मीर के बिजबिहाड़ा निवासी आरिफ हुसैन बट इस समय सेना के चिकित्सालय में स्वास्थ्य लाभ ले रहे है और हर एक मिनिट बाद सुरक्षाकर्मियों से कहते नजर आते है "मुझे आपकी तरह सेना या पुलिस की वर्दी पहन कर देश और नागरिकों की सुरक्षा करनी चाहिए थी, लेकिन पता नहीं किस बहकावे में आकर मैंने गुनाह कर दिया"

दरअसल कुछ दिनों पहले इस नए आतंकी को यह समझाया गया था कि सेना, कश्मीर और मुसलमानों की दुश्मन है। इस बाबत जब आरिफ के हाँथ एसाल्ट रायफल लगी तो उसने बाकायदा एक वीडियो जारी किया था। जिसमें उसने "सेना को तबाह करने की बात कही थी"

खैर सेना ने इन आतंकियों को मौका देकर वापसी का रास्ता भी खोला था। लेकिन आरिफ जैसे तमाम आतंकियों को फर्जी धर्मान्धता ने अंधा कर रखा था।

आतंकी आरिफ ने सुनाई आपबीती

बकौल आरिफ की बीती रात को हिजबुल और लश्कर के आतंकियों ने उन्हें एक मीटिंग के लिए बुलाया था। जिसमें सेना पर बड़ा हमला करने की साजिस की प्लानिंग थी। लेकिन आतंकी आरिफ अपने दूसरे साथी आदिल अहमद को निश्चित स्थान एक बाग में घेर लिया गया और हमें जेहाद और इस्लाम के विरोधी बता कर फायरिंग करनी शुरू कर दी। आदिल अहमद को तुरंत गोलियों से भून दिया गया और मुझसे अपने लश्कर में शामिल होने के लिए कहा गया, लेकिन मैंने उनपर कुछ सवाल किए। जिस वजह से उन्होंने मेरे पैर में गोली मार दी और मरने के लिए छोड़ दिया।

अपने किये कामों पर शर्मिंदा है आतंकी

मुझे भरोसा था कि जैसे ही आर्मी या पुलिस मेरे बारे में जानेगी, मुझे देखते ही गोली मार देगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सेना ने आते ही मुझे सावधान करते हुए कहा कि अगर हथियार है तो नीचे डाल दो। मैंने उन्हें बताया कि मुझे गोली लगी है, तब सेना के एक अधिकारी ने कहा कि हम तुम्हें मरने नहीं देंगे।

बस तुम खुद से अपने उन गुनाहों की माफी मांगना जो तुमने किये हैं। मैं अपने किये गए कामों को लेकर शर्मिंदा हूँ, और अब मैं सेना के अस्पताल में बेहद सुरक्षित हूँ।

मुझे अफसोस है कि मैंने गलत राह चुनी। मुझे पता नहीं अदालते मेरी क्या सजा मुक़र्रर करेंगी। लेकिन जो भी हो मेरा अगला लक्ष्य केवल यह होगा कि मैं नवजवानों को इस दलदल में जाने से बचाऊ।

आरिफ इस वक्त सेना के अस्पताल में भर्ती है। सेना के डाक्टर उसपर कड़ी नजर रख रहे हैं।