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गृह मंत्री अमित शाह 
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गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया जम्मू-कश्मीर आरक्षण विधेयक

गृह मंत्री ने कहा जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने की कोशिश जारी रहेगी। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे से वापस लौटे गृह मंत्री अमित शाह ने आज 17वीं लोकसभा के पहले सत्र में अपना पहला भाषण दिया है। अपने भाषण में अमित शाह ने कहा कि आज इस सदन के सामने मैं दो प्रस्ताव लेकर उपस्थित हुआ हूं। एक जम्मू-कश्मीर जो राष्ट्रपति शासन चल रहा है, उसकी अवधि को बढ़ाने का है और दूसरा जम्मू कश्मीर के संविधान के सेक्शन 5 और 9 के तहत जो आरक्षण का प्रावधान है उसमें भी संशोधन करके कुछ और क्षेत्रों को जोड़ने का प्रावधान।

6 माह के लिए राष्ट्रपति शासन को बढ़ाया जाए

अमित शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में अभी विधानसभा अस्तित्व में नहीं है इसलिए मैं बिल लेकर आया हूं कि 6 माह के लिए राष्ट्रपति शासन को बढ़ाया जाए। चुनाव आयोग ने भी केंद्र सरकार और सभी राजनीतिक दलों से बात करके निर्णय लिया है कि इस साल के अंत में ही वहां चुनाव कराना संभव हो सकेगा। पिछले एक साल के अंदर जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद को जड़ों से उखाड़ फेंकने के लिए इस सरकार ने बहुत से कार्य किये हैं।

जम्मू कश्मीर में लॉ एंड ऑर्डर बेहतर

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कई सालों से पंचायत के चुनाव नहीं कराये जाते थे, लेकिन हमारी सरकार ने पिछले एक साल में वहां 4 हजार से अधिक पंचायतों में चुनाव कराए और 40 हजार से अधिक पंच सरपंच आज लोगों की सेवा कर रहे हैं। पहले कई बार जम्मू कश्मीर में हमने रक्त रंजित चुनाव देखे हैं। सबको इस पर मलाल होता था। इस बार 40 हजार पदों के लिए चुनाव हुआ पर एक भी व्यक्ति की जान नहीं गई। संसद के चुनाव में भी हिंसा नहीं हुई है। ये दर्शाता है कि जम्मू कश्मीर में लॉ एंड ऑर्डर बेहतर है।

पहली बार जम्मू कश्मीर की जनता ये महसूस कर रही है कि जम्मू और लद्दाख भी राज्य का हिस्सा है। वर्षों से लंबित मसले देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने पिछले एक साल में निपटा दिए।

संविधान के सेक्शन 5 और 9 के तहत आरक्षण

अपना दूसरा प्रस्ताव सदन के सामने रखते हुए अमित शाह ने कहा कि दूसरे प्रस्ताव में जम्मू कश्मीर के संविधान के सेक्शन 5 और 9 के तहत जो आरक्षण का प्रावधान है उसमें थोड़ा संशोधन कर कुछ नए क्षेत्रों को जोड़ने का प्रस्ताव लेकर आया हूं। जिसके तहत वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे क्षेत्रों के लोगों के लिए जो आरक्षण है उसी के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सीमा में रहने वालों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।