उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
मराठा आरक्षण
मराठा आरक्षण|Social Media
टॉप न्यूज़

मराठा आरक्षण पर मुंबई हाई कोर्ट का फैसला, 16% आरक्षण से इनकार 

मुंबई हाई कोर्ट ने मराठा आरक्षण को आंशिक रूप से सही ठहराया 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

महाराष्ट्र सरकार द्वारा पिछले साल नवम्बर महीने से मराठा समुदाय के लोगों को शिक्षा और राज्य सरकार की नौकरी के क्षेत्र में दिए जा रहे 16 फीसदी आरक्षण के खिलाफ मुंबई हाई कोर्ट में दाखिल की गई याचिका पर आज कोर्ट ने सुनवाई की है। जिसके बाद मराठा समुदाय को मिल रहे इस आरक्षण को सही ठहराते हुए इसे आंशिक रूप से बरकरार रखने की बात कही है। मुंबई हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मराठा समुदाय को 16 फीसदी मिलने वाला आरक्षण सही नहीं है, इसे 12 से 13 फीसदी किया जाना चाहिए। अगर सरकार 16 फीसदी आरक्षण जारी रखती है तो राज्य में कुल आरक्षण 52 फीसदी से बढ़कर 68 फीसदी हो जाएगा।

लंबे समय से मराठा समाज सरकार पर बना रही थी दबाव

मराठा समुदाय लंबे समय से सरकार पर मराठाओं को आरक्षण देने का दबाव बना रही थी। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मराठा आरक्षण की मांग करते हुए आंदोलन और मोर्चा निकाल रहे थे। कई बार यह आंदोलन हिंसा भी हुआ।

बंबई हाई कोर्ट में आरक्षण के खिलाफ याचिकाकर्ता के साथ कोर्ट परिसर में मारपीट भी की गई। दरअसल याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा था कि मराठाओं को नौकरी और कॉलेज में 16 फीसदी आरक्षण देने पर बड़ी गड़बड़ी हो सकती है। जिसके बाद कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की थी।

आपको बता दें कि, महाराष्ट्र के मराठाओं को आरक्षण देने के लिए राज्य सरकार ने बंबई हाई कोर्ट के आदेश पर एक आयोग का गठन किया था। जिसका काम महाराष्ट्र में रह रहे पिछड़े वर्ग को घ्यान में रख कर रिपोर्ट तैयार करना था। पिछड़ा वर्ग आयोग गठन करने के करीब एक साल बाद 15 नवंबर, 2018 को आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी। जिसके बाद 5 दिसंबर 2018 को महाराष्ट्र विधानसभा ने आरक्षण को मंजूरी दे दी थी।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि राज्य के मराठा वाकई पिछड़े हैं। उनकी स्थिति पहले से ज्यादा ख़राब हो गई है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा था कि मराठा समुदाय सामाजिक तौर पर और शिक्षा में पिछड़ा है। उन्हें सरकार द्वारा आरक्षण दिया जाना चाहिए।