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प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और अधीर रंजन चौधरी 
प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और अधीर रंजन चौधरी |Social Media
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लोकसभा में कांग्रेस के नेता बनते ही अधीर रंजन चौधरी ने सबसे पहला काम क्या किया ?

मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना आदर्श मान कर अधीर रंजन चौधरी ने अपना काम शुरू कर दिया। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

17वीं लोकसभा सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को सलाह दी थी कि वो संसद में अपने नंबर की चिंता छोड़ दें और जनता की सेवा करने में सत्ता पक्ष का साथ दे। प्रधानमंत्री ने कहा था कि लोकतंत्र में सक्रिय विपक्ष की महत्ता होती है इसलिए विपक्ष लोकसभा में अपनी संख्या के बारे में चिंता ना कर सदन की कार्यवाही में सक्रियता से भाग ले।

अब प्रधानमंत्री मोदी को जवाब देते हुए लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि "प्रधानमंत्री मोदी की बातों को सबसे ज्यादा उनकी अपनी पार्टी के नेता ही नहीं मानते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की बात नहीं मानते बीजेपी के नेता

संसद में बजट सत्र के दौरान पार्टी की रणनीति पर चर्चा करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर बैठक की जिसमें अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "प्रधानमंत्री का संदेश अगर उनके मंत्रियों या उनके कनिष्ठों को मिल जाए तो इससे सबका फायदा होगा।"

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री जो उपदेश दे रहे हैं, उनका पालन सबसे ज्यादा उनकी अपनी पार्टी के नेता ही नहीं करते हैं।"

संसद के महत्वपूर्ण सत्र से पहले कांग्रेस की बैठक में आनंदर शर्मा, गुलाम नबी आजाद, पी. चिदंबरम, जयराम रमेश, के. सुरेश भी शामिल हुए।

विपक्षी नेताओं के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं

कांग्रेस नेता के कहा लोकसभा में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ और ‘तीन तलाक’ के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर पार्टी के रुख पर चर्चा करने की उम्मीद थी। इस प्रश्न पर चौधरी ने संवाददाताओं से कहा कि जब ये विषय संसद में आएंगे, तब इन पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी को मुद्दों से अवगत करा दिया गया है।

अधीर रंजन चौधरी

विपक्षी नेताओं के साथ बैठक के प्रश्न पर उन्होंने कहा, "जरूर.. उनसे हमारे अच्छे संबंध हैं, हम उनसे बात करेंगे।"

निचले सदन में कम संख्या पर मोदी के बयान पर चौधरी ने कहा, "लोकतंत्र की यही खासियत है। लोकतंत्र को संख्या द्वारा नहीं विचारों और चर्चाओं से निर्धारित किया गया है।"

उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में कांग्रेस के नेता का मुद्दा महत्वपूर्ण है और लगातार दूसरी बार कांग्रेस की संसदीय दल की नेता नियुक्त की गईं सोनिया गांधी को लोकसभा में कांग्रेस का नेता चुनने का काम दिया गया है।

सूत्र ने कहा कि लोकसभा में कांग्रेस सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है, इसलिए पार्टी पर संसद के निचले सदन में मजबूत विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की बड़ी जिम्मेदारी है।

सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा ने कहा, "सरकार को फरमान जारी करने वाली संस्कृति को खत्म कर संसदीय प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए, महत्वपूर्ण विधेयकों को संसदीय समितियों के पास भेजना चाहिए और इसके बाद कानून पारित करने से पहले इस पर सदन में भी चर्चा होनी चाहिए।"