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नदियों की छाती फाड़ कर , भविष्य को पानी मुक्त करने का प्लान !

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

“रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून, पानी बिना न ऊबरे ,मोती मानुष चून“

रहीम

जल बिना जीवन कैसा

क्या आप बिना पानी के किसी सभ्यता की कल्पना कर सकते है ?

अगर नहीं तो आप गलत है, आने वाले समय में आपका और हमारा भविष्य इसी तरह की वेदनाओं से भरा हुआ होगा।

क्या आप जानते हैं कि 40 साल पहले की तुलना में हमारी पृथ्वी अपना 40 प्रतिशत पानी खो चुकी है। या कहें तो हमारी नदियों में पानी आया ही नहीं। अथवा आया भी गया हो तो हमने खुद उसे बाहर निकाल फेंक दिया या बहा दिया। और अनुमान के हिसाब से आने वाले बीस सालों में हर एक नदी अपना 60 प्रतिशत पानी खो चुकी होगी, तब हमारे पास उस से आधा पानी भी उपलब्ध नहीं होगा जितना एक मानव के लिए आवश्यक है।

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बिगड़ते भविष्य की चिंता

हम विकास के नाम पर तमाम प्रकार के निर्माण, कल कारखाने, और जाने क्या-क्या तैयार करने में जुटे हैं, लेकिन भविष्य निर्माण के नाम पर हमने मानवता या कहे पूरी पृथ्वी का भविष्य खतरे में डाल दिया है।

अकेले भारत की बात करें तो, NGT (National Green Tribunal Act) और सुप्रीम कोर्ट ने चिल्ला-चिल्ला कर अपनी गले की नसें फाड़ ली लेकिन मजाल क्या खनन माफियाओं को इसपर थोड़ी सी भी लाज आ जाये। उल्टा अगर आपने इनका विरोध या प्रतिरोध किया तो आपकी जान पर भी बन आ सकती है। तो आइए बिगड़ते भविष्य के लिए तैयार हो जाए।

नींद में प्रशासन

उत्तर प्रदेश में पानी का दोहन जरूरत से ज्यादा हो रहा है। नदियां सूख गई हैं और उनका बचा-खुचा जल इस भीषण गर्मी में वाष्पीकरण के कारण नहीं बच रहा है। बाँदा जिले के रेहुता खदान में भरे हुए/बहते पानी से रेत निकाल कर नदी को पूरी तरह बंजर किया जा रहा है। समूचे बुंदेलखंड में केन, बेतवा, यमुना की स्थिति कमोबेश यही है। पूर्व में सदावाहिनी नदियाँ हर दो किलोमीटर पर अपनी धारा तोड़कर जान देने पर आमादा है। लेकिन प्रशासन और सरकार अभी नींद में है......

देखिए कब तक नींद खुलती है।