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Twinkal Sharma Murder Case
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ट्विंकल शर्मा मर्डर: आखिर समाज का दोगलापन आया सामने, धर्मो के आधार पर उठते मुद्दे

इस बर्बरता की क्या सजा दी जाए  ?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

कठुआ रेप केस याद तो होगा आपको!!

पूरे भारत में उस घटना की निंदा ही नही भीषण विरोध हो रहा था, कुछ लोग तो सिर्फ इस कारण से इस मुद्दे को उछाल रहे थे कि अपराधी हिन्दू थे, और कहानी को घुमा कर मंदिर और उसके हाते में समेट दिया गया था, कुल मिलाकर कहानी मंदिर और भगवान एवम पुजारी साथ में दर्शन करने वाले भक्तों पर अटक गई थी।

अब दूसरी कहानी देखिए, जगह अलीगढ़ का टप्पल जहां के ताले सुरक्षा के लिए प्रसिद्ध हैं। वहां की बनवारी लाल शर्मा जी की ढाई साल की बच्ची गुम हुई, गुम क्या हुई उठा ली गयी, खोज खबर करने पर भी पता न चलने पर परिजनों ने पुलिस की शरण ली, पुलिस ने फालतू की चीज समझ कर केस को हल्के में ले लिया और ढाई साल की बच्ची ट्विंकल इस जालिम दुनिया को ठीक से समझने से पहले ही दर्दनाक मौत मारी गयी। 

वाक्या कुछ दिन पहले का है। बनवारी लाल शर्मा के पिता ने मांगने पर पड़ौसी को 10,000 रुपये दिए थे, वापस मांगने पर आरोपी ने पैसे ना देने की बात कही या और कुछ मुंह जुबानी बात हो गयी, बात आई गयी हो गयी लेकिन आरोपी ने रमजान के पावन महीने में भी कुछ और सोच रखा था आरोपी जाहिद और असलम ने ढाई साल की बच्ची को उठाकर नृशंस हत्या कर दी।

रमजान का पवित्र महीना सबके दिलों में मोहब्बत भरने वाला होता है। लेकिन 10,000 रुपये की कीमत किसी की जान से भी ज्यादा कीमती कैसे हो गयी, रोजेदारों के मन में तो वैसे ही सारी कायनात के लिए स्नेह और मोहब्बत बरसने लगती है, लेकिन हुआ कुछ उल्टा ही।

दोनों आरोपियों ने बच्ची को आइसक्रीम के लालच में बुलाया, बच्ची इस लिए भी उनके पास गई होगी क्योंकि पड़ौसी भी थे, फिर बच्ची के साथ वो हुआ जिसको देखकर जल्लाद का भी सीना फट जाए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बच्ची की गला दबाकर हत्या की गई, लेफ्ट तरफ की छाती पर भयानक चोट आई है जो भयानक मारपीट के बाद ही सम्भव है, मारपीट का अंदाजा आप इस तरह से लगा सकते हैं कि बच्ची के छोटे से शरीर पर कोई भी पसली सलामत नहीं है, मतलब सारी की सारी पसलियों को तोड़ा गया था, सीधे हाँथ को सम्भवतः किसी धारदार या मोटे हथियार से काटा गया था। दो दिन से ज्यादा लाश सड़ने से शरीर मे कीड़े पड़ चुके थे , बदन का काफी हिस्सा कुत्तो ने नोच खाया था।

स्थानीय लोगों में यह आम चर्चा है कि बच्ची के साथ बलात्कार भी हुआ है, लेकिन ऑप्टोप्सी रिपोर्ट में यह बात अभी तक सामने नही आई है, शव के सड़ जाने की वजह से रेप को साबित नही किया जा सका है, स्लाइड्स बनाकर लैब को भेजा गया है।

इस घटना के पब्लिक डोमेन सोशल मीडिया में आने के बाद लोगों में भयानक रोष उत्पन्न हुआ, पुलिस जो कल तक मृतका के पिता को टहला रही थी अब जाकर आनन फानन में केस दर्ज करके दोनों आरोपियों जाहिद, और असलम को गिरफ्तार कर चुकी है, कोताही बरतने पर उच्चाधिकारियों ने संबंधित पुलिसकर्मियों पर करके अपना फर्ज अदा कर दिया, और हां अब कुछ गिने चुने रुपहले पर्दे के कलाकार जिनमें सनी लियोनी, अक्षय कुमार, अनुपम खेर, अभिषेक बच्चन, परेश रावल, रवीना टण्डन ने ट्विटर पर प्रतिक्रिया दर्ज कराई है, हालांकि अभी सहिष्णुता के उपासको का कोई अता पता नही है।

"अगर आप लाशो का धर्म देखकर रोते हो, यकीन मानो आप अंदर से मर चुके हो"

ना कठुआ का कुकृत्य मानवता के लिहाज से सही था, ना ही अलीगढ़ के टप्पल की शर्मनाक घटना, लेकिन जब आप दोनों घटनाओं को तुलनात्मक रूप से देखते हो, आपको मीडिया, धर्मनिरपेक्ष नाटँकियो, तथाकथित समाजसेवी लोगों की दोगली नीतियों पर घृणा करना भी पसंद नही करोगे।

प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत इस केस को दर्ज किया है, फास्ट ट्रैक कोर्ट में यह मुकदमा चलाने की बात भी कही है, लेकिन सवाल अब भी यही है कि आरोपी जाहिद जिस पर भुक्तभोगी ने पहले ही आरोप लगाया था अगर उसे वक्त रहते गिरफ्तार किया जाता तो शायद ये घटना नही होती, इस पर एक बात और गौर करने वाली है कि आरोपी जाहिद पहले भी एक यौन शोषण के केस में अपराधी पाया गया था, उस घटना में आरोपी ने अपने किसी संबंधी के घर मे इस घटना को अंजाम दिया था।

अब आप बड़े मीडिया घरानों की लाइनों को पढ़े तो आपको चिढ़ सी होने लगेगी।

1- घटना में दूसरे समुदाय के लोगो के नाम आने से दहशत बढ़ी।

2-दूसरे धर्म के लोगो के आरोपी होने से इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती।

खैर यही तो नियम है जहाँ से टी आर पी (TRP) ओर पाठक संख्या बढ़ती है उसी खबर को मिर्च मसाला डाल कर दिखाया जाता है, वर्ना कोई कहीं मर जाये मीडिया को कोई फर्क नही पड़ता 2x2 इंच की जगह में खबर को छाप कर जिम्मेदारी पूरी की जाती है।