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साध्वी प्रज्ञा और पीएम मोदी 
साध्वी प्रज्ञा और पीएम मोदी |Google
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पीएम मोदी ने गोडसे वाले बयान पर साध्वी प्रज्ञा को माफ कर दिया ?

हिन्दूवादी नेता बनने की राह पर साध्वी प्रज्ञा। 

AKANKSHA MISHRA

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भोपाल की जनता ने मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत के साथ जीत दिलाकर संसद भवन भेज दिया है। लेकिन संसद पहुंच जाने के बाद भी साध्वी प्रज्ञा की मुसीबते कम होने का नाम नहीं ले रही। आज मुंबई की स्पेशल NIA कोर्ट में साध्वी प्रज्ञा की पेशी हुईं। जहां जज ने जब उनसे धमाकों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि मुझे कुछ पता नहीं है।

जिसके बाद एक-एक कर जज ने उनसे कई सवाल किए लेकिन ब्लास्ट आरोपी प्रज्ञा ने सबका एक ही जवाब दिया 'मुझे कुछ नहीं पता।'

भले ही वो इस ब्लास्ट के बारे में कुछ ना बता रही हो या वास्तव में उन्हें कुछ नहीं पता हो लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें भारत की राजनीतिक के बारे में तो सब पता पड़ गया है।

साध्वी प्रज्ञा जब मध्य प्रदेश के भोपाल संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदार बन कर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ मैदान में उतरी तो किसी ने यह अंदाजा नहीं लगाया होगा कि जिसपर कोर्ट में ब्लास्ट का आरोप चल रहा हो, जिसपर हज़ारों लोगों की जान लेने का आरोप लगा हो उसे लोकतंत्र का राजा घोषित किया जा सकता है।

सूत्र

लोकसभा चुनाव के दौरान साध्वी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त भी बताया था। जिसे लेकर कांग्रेस ने काफी हंगामा मचाया। प्रज्ञा का बयान जब पार्टी के आला नेताओं के कान तक पहुंचा तो उन्हें माफ़ी मांगने के लिए कहा गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया के सामने कहा कि मैं साध्वी प्रज्ञा के इस बयान के लिए उन्हें कभी माफ़ नहीं करूंगा। लेकिन लगता है कि अब प्रधानमंत्री मोदी का गुस्सा कम हो गया है। बीजेपी भी इस मामले को और तूल नहीं देना चाहती। चुनाव जो ख़त्म हो गया है, और अब पार्टी उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे देगी।

RSS का हिंदूवादी चेहरा

दरअसल, RSS से जुड़े सूत्रों का कहना है कि RSS लोकसभा चुनाव के समय में प्रज्ञा ठाकुर का इस्तेमाल हिंदूवादी नेता के चेहरे के तौर पर करना चाहता था। इसलिए प्रज्ञा पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और भविष्य में प्रज्ञा बीजेपी का हिंदूवादी चेहरा होंगी तो उनपर कभी कोई कार्यवाई की उम्मीद भी करना बेवकूफी है।

प्रज्ञा के हिस्से में तीन महत्वपूर्ण बातें

RSS के जानकर बताते हैं। प्रज्ञा में तीन सबसे खास बात है। एक तो उन्होंने भोपाल में कांग्रेस के सबसे दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को चुनाव में हराया, दूसरा वह हिंदूवादी चेहरे के तौर पर पहचानी जाती हैं और तीसरा आने वाले समय में बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका रहने वाली है।

जब बीजेपी के आला नेता अनिल जैन से प्रज्ञा के बारे में पूछा गया तो वो कहते हैं , प्रज्ञा ने अपने बयान का पश्चाताप कर लिया है। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर माफी मांग ली थी और प्रायश्चित करते हुए 21 प्रहर का उपवास रखा था।”

अनिल जैन

एक तरफ बीजेपी यह दावा कर रही है कि इसबार देश की जनता ने विकास को वोट दिया है बदलाव को चुना है। वहीं दूसरी तरह पार्टी नेताओं के वयानों से लगता है कि बीजेपी अब भी हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति पर अमादा है।