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लातेहार की घटना 
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झारखण्ड में भूखमरी से हुई एक और मौत, 4 दिन से घर में नहीं था अनाज का एक भी दाना

झारखंड की राजधानी से 93 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लातेहार जिले की घटना। 

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जब एक व्यक्ति को अपना जीवन जीने के लिए प्रशासनिक लड़ाई लड़नी पड़े और वह लड़ाई में हार कर अपनी जान गंवा दे तो इससे दुखदायी परिणाम और क्या हो सकता है। झारखंड में भूखमरी से मरने वालों की फेहरिश्ती लंबी है और गर्मी के दिनों में यह और लंबी होती जाती है। झारखंड में इस साल भूख और भूख जनित रोगों से मरने वाली की संख्या 19 तक पहुंच गई है लेकिन सुस्त प्रशासन के कानों में ज़ू तक नहीं रेंग रही।

झारखंड के लातेहार में 65 वर्षीय रामचरण मुंडा की मौत इसलिए हो गई क्योंकि उन्होंने पिछले 4 दिनों से कुछ नहीं खाया था। रामचरण के घर पर आनाज का एक भी दाना तक नहीं था। पिछले चार दिनों से उसके घर पर मातम पसरा हुआ है उसके घर वाले भूखे हैं, चार दिनों से घर में चूल्हा नहीं जला है और अब तो रामचरण भी भूख से दम तोड़ चुका है।

रामचरण मुंडा की मौत का कारण

रामचरण मुंडा की मौत के बाद उसके परिवार वाले रो रहे हैं। उनकी बेटी कहती है "हमारे घर में पिछले तीन महीने से राशन नहीं आया। मेरे पिता ने पिछले 4 दिन ने कुछ भी नहीं खाया था। भूखे थे, इसलिए मर गए।"

रामचरण के परिजन बताते हैं कि "इनके घर में पिछले 3-4 दिन से आनाज का एक भी दाना नहीं था। इसलिए घर पर खाना नहीं बन पा रहा था। घर वालों को सरकार कार्ड मिला हुआ है। उज्वला योजना के तहत गैस भी मिला है।

रामचरण की भूख से हुई मौत की खबर मिलने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया। मनरेगा सहायता केंद्र उनके घर पर पहुंच गया। हालचाल ली, पीड़ित परिवार को तत्कालीन 50 किलो आनाज दिया गया 2000 रूपये की आर्थिक सहायता दी गई।

अगर यह आनाज और आर्थिक सहायता पहले मिला होता तो रामचरण मुंडा जीवित होते।

मामले को तूल पकड़ता देख SDM सुधीर कुमार ने अपने स्तर पर जांच शुरू की। सुधीर कुमार सफाई देते हुए कहते हैं “यह अभी तक साबित नहीं हुआ है कि उनकी मृत्यु भुखमरी से हुई थी। उन्हें आयुष्मान भारत योजना, राशन कार्ड, पेंशन जैसे सभी लाभ प्रदान किए गए थे। गाँव में कोई इंटरनेट कनेक्शन नहीं है। और राशन वितरण के लिए बायोमैट्रिक आधारित इलेक्ट्रॉनिक मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। मशीन काफी दिनों से ख़राब है इसलिए हम राशन वितरण नहीं कर पा रहे थे। लेकिन अब हम ऑफ़लाइन वितरण पर काम कर रहे हैं।”

SDM सुधीर कुमार