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AN 32 विमान
AN 32 विमान|google
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हादसा या लापरवाही, AN 32 के रहस्यमयी लापता होने से उठा पर्दा

3 जून को भारतीय वायुसेना के विमान AN 32 के लापता हो जाने से हर तरफ हलचल मच गई और अभी तक उसकी कोई जानकारी नहीं मिली है। 

Puja Kumari

Puja Kumari

बीते 3 जून को एकाएक ये खबर सुनने को मिली की वायुसेना का AN 32 विमान जो जोहरहाट से उड़ान भरकर अरूणाचल प्रदेश में लैंडिंग करने वाला था। लेकिन विमान के उड़ते ही आधे घंटे बाद वो कहीं लापता हो जाता है जिसके बाद से 2 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक इसका कोई सुराग नहीं मिल पाया।

बता दें कि इसकी तलाशी में वायुसेना के साथ-साथ थल सेना भी लगी हुई है। इसके सर्च ऑपरेशन में आज P8-I को भी शामिल किया गया है, क्योंकि P8-I विमान की नजरें कुछ ऐसी हैं जो लंबी दूरी तक घने जंगलों के अंदर तक देख सकता है पर अभी तक इन टीमों को कामयाबी नहीं मिली है। इस विमान में 8 क्रु मेंबर समेत कुल 13 यात्री सवार थें।

 AN 32 विमान
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AN-32 विमान की खासियत

सबसे बड़ी बात तो यह है कि ये भारतीय वायुसेना के खास विमान में से एक है जिसे ‘Work Horse के नाम से जाना जाता है। बात करें भारतीय वायुसेना में इसके शामिल होने की तो करीब 80 के दशक में भारत ने रूस से करीब 125, AN 32 विमान खरीदें थें।

हादसे पर उठा सवाल

वैसे ये पहली बार नहीं हुआ है बल्कि इससे पहले भी साल 2016 में एक घटना सुनने को मिला जो कि बंगाल की खाड़ी के पास जाकर ऐसा ही AN 32 विमान गायब हो गया था। इतना ही नहीं आज से करीब 10 साल पहले इसी स्थान पर एक AN 32 विमान बिल्कुल ऐसे ही हादसे का शिकार हो गया था और उस दौरान इस भयानक हादसे में करीब 13 लोगों की मौत हो गई थी।

यही कारण था कि वायुसेना ने इस विमान को अपग्रेड करने का फैसला लिया था लेकिन इतनी बड़ी बात को नजरअंदाज करने के कारण ही ये हादसा दोबारा हुआ। जी हां क्योंकि 3 जून को हादसे का शिकार हुआ विमान AN 32 अपग्रेड नहीं था।

AN 32 विमान
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गौर करने वाली बात तो यह है कि इस लापरवाही के कारण एक बार फिर इतना बड़ा हादसा हुआ है। दरअसल विमान AN 32 में एक ‘इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर’ ( Emergency Locator Transmitter) का प्रयोग किया जाता था जो कि किसी भी गंभीर परिस्थिती में सिग्नल पहुंचाता था लेकिन इस विमान में जो ट्रांसमीटर अपलोड था वो करीब 14 साल पुराना था जबकि वायुसेना ने साल 2009 में दिए गए बयान में कहा था कि AN 32 के सभी विमानों को अपग्रेड किया गया है। लेकिन हादसे का शिकार हुए विमान में ऐसा कुछ नहीं था इससे साफ जाहिर होता है कि साल 2009 में दिया गया बयान बिल्कुल गलत था और इस हादसे की सबसे बड़ी वजह लापरवाही है।