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मायावती का गठबंधन पर ब्रेक ‘परमानेंट नहीं’, फिर साथ आ सकते हैं सपा-बसपा 

उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन टूट गया 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन को बहुत कम सीटें मिली हैं। सपा को जहां 5 सीटें मिली हैं तो बसपा के खाते में 10 सीटें गई है। लोकसभा चुनाव में मिली इस हार का ठीकरा मायावती ने समाजवादी पार्टी पर फोड़ा है। जिसके बाद बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस कर ऐलान कर दिया कि सपा-बसपा गठबंधन अब टूट चुका हैं। आने वाले विधानसभा उप-चुनाव में बसपा अकेले चुनाव लड़ेगी।

मायावती की इस घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने मायावती के बयान पर कोई टिप्पणी तो नहीं की, लेकिन उन्होंने कहा कि 2022 में जब विधानसभा चुनाव होंगे तब समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाएगी।

यदि गठबंधन टूट गया है, तो मैं इस पर गहराई से चिंतन करूंगा और आने वाले विधानसभा उप-चुनावों की तैयारी करूंगा। अखिलेश यादव ने कहा विधानसभा उपचुनाव में सपा भी अकेले सभी 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

अखिलेश यादव

गठबंधन टूटने का कारण

मायावती ने गंठबंधन टूटने का कारण बताते हुए कहा कि "समाजवादी पार्टी के आधार वोट से बहुजन समाज पार्टी को कोई फायदा नहीं हुआ है। जब समाजवादी पार्टी का वोट समाजवादी पार्टी को ही नहीं मिला है तो बसपा को कैसे मिल सकता है।"

लेकिन राजनीतिक पंड़ितों की माने तो बसपा-सपा गठबंधन टूटने के और भी कई कारण हो सकते हैं। मायावती ने 2019 के लोकसभा चुनाव में खुद को गठबंधन का प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया था। अखिलेश यादव भी कई जगह खुले शब्दों में मायावती को गठबंधन का प्रधानमंत्री बता चुके हैं। लेकिन

2019 के चुनाव परिणाम को देखने के बाद मायावती का पीएम रोल लगभग पूरी तरह समाप्त हो गया है। और गठबंधन के मुताबिक अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे। ऐसे ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए मायावती ने गठबंधन को दरकिनार कर दिया और उप-चुनाव में अकेले लड़ने का फैसला लिया। जिसके बाद वो एक बार फिर से प्रदेश की मुख्यमंत्री के दौड़ में शामिल हो गई है।

समीक्षा बैठक के बाद बसपा प्रमुख

मायावती ने गठबंधन के बारे में बोलते हुए कहा कि सपा-बसपा गठबंधन का मकसद साथ मिलकर चुनाव लड़ना था, लेकिन हमें सफलता नहीं मिल पाई। सपा कार्यकर्ता ने बसपा कार्यकर्ताओं की तरह मेहनत नहीं की। इस बार के चुनाव में सपा ने एक बेहतरीन मौका गवां दिया।

हालांकि सपा नेताओं की माने तो समाजवादी पार्टी को इस गठबंधन से कोई फायेदा नहीं मिला। पिछले चुनाव की तुलना में उनका वोट प्रतिशत भी कम हो गया और सीट भी नहीं मिली। 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा शून्य पर थी और इसबार उन्हें 10 सीटें मिली हैं। समाजवादी पार्टी को गठबंधन से फायेदा मिला है।

इस शर्त के साथ फिर वापस आ सकते हैं सपा-बसपा

गठबंधन और अखिलेश यादव पर बोलते हुए मायावती ने कहा, "हालांकि, हम राजनीतिक मजबूरियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते और हम विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे। हालांकि, यह पथ का अंत नहीं है। अगर समाजवादी पार्टी अपने कार्यकतार्ओं में एक मिशनरी उत्साह पैदा करती है और अपने प्रदर्शन में सुधार करती है, तो हम देखेंगे।"

उत्तर प्रदेश की इन 11 सीटों पर होना है उपचुनाव

गंगोह (सहारनपुर), टूंडला, गोविंदनगर (कानपुर), लखनऊ कैंट, प्रतापगढ़, मानिकपुर चित्रकूट, रामपुर, जैदपुर (बाराबंकी), बलहा, बहराइच, इगलास (अलीगढ़), जलालपुर (अंबेडकरनगर)