उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
मोदी राज
मोदी राज|Google
टॉप न्यूज़

मोदी राज 2.0 : जानिए कौन जीता काम से कौन जीता नाम से !

मोदी के नाम ने भाजपा को चुनाव में जीत दिलाई?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

सियासत की शतरंजी बिसात सिमट चुकी है , राजा ,हाथी घोड़े, प्यादे , सब अपने अपने बक्सों में सिमट चुके हैं ,अगर कुछ बचा है तो वह है शब्दों वाली साँप की घिसटन, जिसे गाहे-बगाहे लोग शब्दों वाली लाठी से ही कूटते रहते है।

वैसे 2019 का आम चुनाव कई मामलों में ऐतिहासिक रहा, हमें भांति-भांति के शब्दाउचारी नेताओ के दर्शन हुए, हालाँकि इस चुनाव में एक मात्र केशव योद्धा वाली स्थिति रही लेकिन फिर भी मूल्यांकन जायज है कि भाजपा और एनडीए के घटक दलों में विजय प्राप्त करने वाले नेताओं की वास्तविक जीत कैसी थी, कितने नेताओं ने अपने काम के बल पर चुनाव जीता और कितने सिर्फ मोदी नाम के सहारे अपनी नैया खेते नजर आए।

 साध्वी प्रज्ञा
साध्वी प्रज्ञा
Google

लोकसभा चुनाव से पहले साध्वी प्रज्ञा का नाम किसको नहीं पता था, राष्ट्रवाद के नाम पर साध्वी प्रज्ञा भोपाल की सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के सामने उतारी गई, तब तक ठीक था लेकिन दो बयानों ने साध्वी प्रज्ञा के साथ-साथ भाजपा की किरकिरी कराई थी, जिसमे गोडसे को राष्ट्रभक्त बताना और मुंबई हमले में शहीद हेमंत करकरे को पापों की सजा पाने वाला करार देना। विपक्ष के लिए जलती आग में घी का काम कर गया।

हालांकि भाजपा ने इसे आड़े हाथों पर लेकर इसका खंडन किया गया साथ ही इसे पार्टी लाइन की बात न कहकर इसे साध्वी प्रज्ञा के निजी विचार बताया गया, तथा बाद में दबाव में आकर साध्वी प्रज्ञा ने खुद इन मामलों पर अपने बयान को वापस लेने की बात कही, हालांकि आपके बोले गए शब्द किसी प्रकार वापस नहीं होते और आपके खिलाफ नैरेटिव तो तैयार भी हो चुका था, लेकिन मतदाता ने इस चुनाव में साध्वी को कमतर करके मोदी की विजय कामना के साथ वोट दिया जिसका परिणाम आपके सामने है, जिसके कारण भोपाल से कांग्रेस के दिग्विजय सिंह चुनाव हार गए।

 दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह
Google

इस लोकसभा सीट में जितना मोदी के नाम ने भाजपा को चुनाव में जीत दिलाई, उसका एक और कारण भी है ,समय-समय पर दिग्विजय सिंह का उलूल-जुलूल बयान कांग्रेस को नुकसान पहुंचाते रहे है ,जिसका लाभ सदैव विरोधी पक्षो को मिलता रहा है।

गिरिराज सिंह
गिरिराज सिंह
Google

गिरिराज सिंह-

भला आज की राजनीति में गिरिराज सिंह को कौन नहीं जानता

अपने वक्त बेवक्त बयानों और धर्म समुदाय विशेष को अक्सर निशाना बनाने वाले गिरिराज सिंह ने बहुचर्चित छात्र नेता कन्हैया कुमार को चारों खाने चित्त कर दिया, यह कहीं से भी गिरिराज का राजनैतिक पौरूष नहीं माना जा सकता, ऐन वक्त पर गिरिराज सिंह को एयर ड्राप के जरिए बेगूसराय की लोकसभा सीट पर उतारा गया था, गिरिराज सिंह भी इस सीट से लड़ने के लिए तैयार नही थे, फिर किसी तरह मान मनौव्वल के बाद चुनाव लड़ाया गया।

वही विपक्षी कन्हैया कुमार की तरफ से तमाम फिल्मी हस्तियां जिनमें स्वरा भास्कर, शबाना आजमी, जावेद अख्तर, और प्रकाश राज जैसी हस्तियों ने कन्हैया कुमार के पक्ष में मतदाताओं से अपील की , लेकिन मोदी नाम की आंधी में कन्हैया कुमार की उम्मीदों पर पानी फिर गया, इसे अगर कोई गिरिराज सिंह की मेहनत या फिर उनकी काबलियत कहता है तो ये सिर्फ बेमानी ही सिद्ध होगा।

कन्हैया कुमार
कन्हैया कुमार
Google

एक बात और है गौतम गंभीर जैसे नए नवेले नेता जो जनता की नब्ज पर पक्की पकड़ बनाने वाले नेता हैं हमेशा मुद्दों पर मुखर रहे है, जिनकी पार्टी के अलावा निजी पहचान भी दमदार है , काम के मामले में स्मृति ईरानी जिन्होंने जनता के बीच मे रहकर अपनी पहचान बनाकर राहुल गांधी जैसे नेता की अपनी जागीर वाली सीट से गिराकर उनके कदमो के नीचे से जमीन खींच ली , साथ ही गुना (मध्यप्रदेश) जैसी पुस्तैनी सीट को भी एक कार्यकर्ता ने सिंधिया परिवार का ठप्पा हटाकर अपना कब्जा कर किया,

राजनाथ लखनऊ की हाई प्रोफाइल सीट से भाजपा के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी को हराकर पुनः संसद के दरवाजे तक पहुंचे, इसे उनकी कद्दवारी या काम का असर कहा जा सकता है लेकिन यह भी सही है कि सिर्फ नाम का ही असर है कि आठ पूर्व मुख्यमंत्री पानी मांगते नजर आए और नए नवेले नेता कई जगह बाजी मार गए, ये सिर्फ नाम का ही कमाल था।