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भारी विजय के साथ भाजपा सरकार की चुनौतियां !

चुनाव खत्म, केवल शपथ ग्रहण बाकी अब आगे भीषण कठनाइयों की राह है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

“स्पाइडर मैन फ़िल्म में नायक का अंकल नायक से कहता है कि बड़ी ताकत के साथ बड़ी जिम्मेदारी आती है, जिसे बड़ी सावधानी से निभाना होता है”

भारी बहुमत पाकर भाजपा सत्ता पर  दोबारा काबिज हो चुकी है , बस नाम का शपथ ग्रहण बाकी है जिसकी औपचारिकताएं जल्द ही पूरी होंगी, थोड़ा बहुत फेरबदल करके मंत्रालयों का हिस्सा बांट भी हो जाएगा लेकिन अब आगे  क्या ?

क्या राजनीति  बहुमत पाने या सत्ता पाने  में ही सिमट जाएगी

असल परीक्षा तो अब होनी है मोदी सरकार की

पहले पांच सालों तक तो पार्टी और उनके समर्थकों द्वारा यह दावे किए गए कि विपक्षी दल जब सत्ता में था तो देश को बड़ी क्षति हुई थी , गैरजिम्मेदाराना तरीके से सत्ता को चलाया गया था, रिश्वतखोरी ओर कमीशनखोरी अपने चरम पर रही है उसी का डैमेज कंट्रोल करने में वक्त तो लगेगा , और अगर आंकड़ो को देखा जाए  तो काफी हद तक ये आरोप सही भी थे लेकिन अब वक्त बदल चुका है , भाजपा अपनी एक पारी पूरी मजबूती के साथ गुजार चुकी है , अब जब जनता जनार्दन ने दोबारा बहुमत के साथ जिम्मेदारी दी है और पहले से अधिक मजबूत बना कर संसद भेजा है तब मोदी सरकार को बहुत सारे मुद्दों को अपनी प्राथमिकता की लिस्ट में रखना होगा,

कुछ मुद्दे निम्न प्रकार है जिन पर ध्यान दिया जा सकता है:

स्वास्थ्य:

भारतीय परिवेश में यह एक अहम मुद्दा है ,समाज का लगभग हर वर्ग इस विभीषिका से जूझ रहा है जिसमे अस्पतालों की अनुपलब्धता, महंगे इलाज, और दम तोड़ती सुविधाओं पर सरकार को तीखी नजर डालनी पड़ेगी, हालांकि प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना भी लांच हो चुकी है लेकिन यह योजना चुनावों के चलते व्यापक रूप से आम जन तक नहीं पहुँच पायी और इसमे अभी भी कई लूप होल जिंदा है ,जिसके कारण यह योजना अभी केवल कुछ लोगो बस को प्राप्त है , तथा इसके तहत लाभार्थियों को कई बार प्राइवेट चिकित्सा संस्थानों से बैरंग वापस आना पड़ रहा है।

सरकार को इस योजना को मजबूती से लागू करना होगा और साथ मे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जो भी इस योजना के योग्य है उसे यह बिना किसी दलाली, रिश्वतखोरी के पहुँच जाए।

शिक्षा:

वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा सर्वग्राही विषयवस्तु है तथा देश के उज्जवल भविष्य के लिए आवश्यक घटक है, लेकिन अगर आप भारत की शिक्षा प्रणाली और संस्थानों की बात करे तो यह केवल समाज के उन्ही लोगों के पास है जो आर्थिक रूप से बेहद मजबूत है , सरकार को  शिक्षा के होते बाजारीकरण को रोकना होगा, तथा ऐसी नीतियां लागू करनी होगी जिससे आमजन भी काबिलियत के बल पर हासिल कर सके।

रोजगार:

भारत के चुनावों में अक्सर प्रयोग होने वाला मुद्दा है जिसकी वजह से कई बार सरकारें सत्ता पर काबिज ओर बेदखल हो चुकी हैं , भाजपा को अब इस रोजगार वाले मुद्दे की नब्ज पकड़नी होगी, आज भारत मे लाखों युवा शिक्षित होकर बेरोजगारी के धक्के खा रहा है , अब जबकि मोदी सरकार अक्सर मुद्रा योजना के तहत रोजगार देने की ताल ठोक रही है, उन्हें अपनी इस योजना का मूल्यांकन करना होगा तथा यह भी देखना होगा कि क्या सरकार की नीतियों का सीधा लाभ उचित लोगों को मिल  रहा है अथवा अपात्र लोग इस लाभ को कमाकर सरकार को धोखा दे रहे है।

उत्तर प्रदेश में अगर आप बैंक के दरवाजे लोन लेने जाते हैं तो कोई व्यक्ति जो नई शुरूआत करने की जुगत में है उसे नियम और शर्तों की बातों में टहला दिया जाता है , और कमीशनखोरी की वजह से अपात्र इस सुविधा का लाभ उठाने में सफल हो जाते हैं।

"मुद्दे बहुत है लेकिन आपने जिस खाई को 5 साल में भरा है उस पर दीवारे खड़ी करनी पड़ेगी तभी नए भारत का निर्माण संभव होगा"