उदय बुलेटिन
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ममता बनर्जी मीम विवाद
ममता बनर्जी मीम विवाद|Twitter
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सुप्रीम कोर्ट Vs जेल मैन्यूअल: ममता का मीम बनाने वाली प्रियंका की रिहाई में देरी क्यों हुई 

बंगाल में ममता की दादागिरी। 

AKANKSHA MISHRA

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बीजेपी यूथ विंग की सदस्य प्रियंका शर्मा को ममता बनर्जी का मीम सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के जुर्म में गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में शुक्रवार को भेजा गया था। जिसके बाद प्रियंका शर्मा शनिवार को बंगाल हाई कोर्ट पहुंची , लेकिन वहां चल रही वकीलों के हड़ताल की वजह से बात नहीं बनी। जिसके बाद सोमवार को प्रियंका ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने कल यानी मंगलवार को इसपर सुनवाई करते हुए उन्हें सशर्त जमामत दे दी थी। लेकिन उसके बाद भी प्रियंका को रिहा नहीं किया गया। जिसके बाद ये मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है।

सुनवाई करते हुए पहले तो सुप्रीम कोर्ट ने प्रियंका की गिरफ़्तारी को मनमानी बताया। और अब प्रियंका को रिहा ना करने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा अगर आज प्रियंका को रिहा नहीं किया गया तो इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करार दिया जाएगा। साथ ही कोर्ट ने कहा 'आधे घंटे के अंदर प्रियंका को रिहा किया जाए।' सुप्रीम कोर्ट के इस फरमान के बाद बंगाल सरकार हरकत में आ गई और प्रियंका को 12 बजे के करीब रिहा कर दिया गया।

प्रियंका की रिहाई और गिरफ़्तारी मुद्दा नहीं बनती अगर इसे मुद्दा नहीं बनाया जाता। इससे पहले भी देश के लगभग सभी राजनेताओं की मीम और गन्दी तस्वीरें सोशल मीडिया में आती रही हैं। पर कभी गिरफ़्तारी नहीं हुई। लेकिन फिर भी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मीम और गंदी तस्वीरें पोस्ट पर प्रियंका शर्मा की गिरफ़्तारी उतनी ही शर्मनाक हैं जितना उनकी इस तरह की तस्वीरें पोस्ट करना।

ममता बनर्जी चाबुक ना सिर्फ गन्दी तस्वीरों पर चलता है बल्कि ममता इससे पहले भी अश्लील तस्वीरें और कार्टून पर भी ममता नाराजगी हाजिर करती रही हैं। बंगाल के कई प्रोफेसरों, कलाकारों और फिल्म निर्देशकों को ममता के गुस्से का सामना करना पड़ा है।

आपको याद होगा 2012 में जाधवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्र को ममता बनर्जी का कार्टून बनाने पर गिरफ्तार कर लिया था।

इनके अलावा बंगाल में अनिक दत्ता की फिल्म "भोबिश्योतिर भूत" यानी "भविष्य के भूत" को भी ममता के गुस्से का सामना करना पड़ा था। उनकी फिल्म को ममता के गुस्से की वजह से सिनेमा घरों से उतार दिया गया था।

इसी तरह श्याम प्रसाद की एक फिल्म को बंगाल में नहीं दिखाया गया था। ममता बनर्जी की आलोचना करने वालों पर ममता का चाबुक चलता रहा है। शायद ममता बनर्जी ये भूल जाती हैं कि जब माइक और कलम उनके हाथों में होता है तो वह इतनी आक्रमक होती हैं कि किसी भी हद तक चली जाती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने मंच पर थप्पड़ मारने की बात कहने वाली ममता को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनका यह बर्ताव लोकतंक की हत्या कर रहा है।