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विनायक श्रीधर 
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3500 बच्चों में एक को होती है ये जानलेवा बीमारी, स्टीफन हॉकिंग के जैसा हो गया था विनायक का हाल

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग की तरह से विनायक की भी जिंदगी व्हील चेयर पर गुजर रही थी 

Puja Kumari

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आजकल हर तरफ रिजल्ट की चर्चा हो रही है क्योंकि इस समय सभी बोर्ड अपने-अपने रिजल्ट की घोषणा कर रहे हैं, लेकिन इसी बीच एक ऐसे छात्र की चर्चा होने लगी जिसकी कहानी सुन हर किसी की आंखों में आंसू आ गए। 16 साल के विनायक श्रीधर ने आसमान में उड़ने का सपना देखा था पर अफसोस की वो अपने सपने को पूरा करने से पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह गया। विनायक की मृत्यु बीते 26 मार्च को Muscular Dystrophy नामक गंभीर बीमारी की वजह से हुई, ये वो समय था जब विनायक अपने दसवीं बोर्ड की परीक्षा दे रहा था और 3 पेपर देने के बाद चौथे पेपर से पहले ही उसका निधन हो गया।

बता दें कि विनायक को जो (Muscular Dystrophy) बीमारी थी, उसकी वजह से शरीर की मांसपेशियों की नेचुरल ग्रोथ बंद हो जाती है। यह मांसपेशियों के रोगों का एक ऐसा समूह होता है जिसमें लगभग 80 प्रकार की बीमारियां शामिल हैं। इनमें से एक मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Muscular Dystrophy) भी हैं, इस लाइलाज बीमारी के कारण बच्चों की बेहद कम उम्र में ही मृत्यु हो जाती है। मेडिकल साइंस की मानें तो ये बीमारी 3500 बच्चों में से एक को होती है। इसके कारण विनायक बिल्कुल मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग (Stephen Hawking) की तरह ही हो गया था।

विनायक श्रीधर 
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विनायक के माता-पिता का कहना है कि 7 साल की उम्र से ही उसने चलना छोड़ व्हील चेयर का सहारा ले लिया था। उसे पढ़ाई करने का बड़ा ही शौक था और वो स्टीफन हॉकिंग (Stephen Hawking) को अपना आदर्श मानता था।

निधन के बाद आज एक बार फिर से इस बच्चे की चर्चा होने का कारण ये था कि इसने सीबीएसई बोर्ड एग्जाम में महज 3 पेपर ही दिए थें लेकिन उसमें भी विनायक को इंग्लिश में 100, साइंस में 97 और संस्कृत में 96 मार्क्स मिले, जिसे देखकर उसके माता-पिता के आंसू रूक नहीं रहे। आज अगर विनायक जीवित होता तो वो भी टॉपर लिस्ट में शामिल होता पर अफसोस की अब वो हमारे बीच नहीं है। विनायक नोएडा सेक्टर-44 स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल में दसवीं का छात्र था।

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आइए जान लेते हैं गंभीर बीमारी (Muscular Dystrophy) के लक्षण

इस गंभीर बीमारी के कारण अक्सर ही बच्चों की मौत 11 से 21 वर्ष के बीच ही हो जाती है इसलिए इसे सही समय पर पहचानना बेहद जरूरी है।

इसके शुरूआती लक्षणों में से एक ये है कि पीडि़त व्यक्ति को सीढ़ियों पर चढ़ने में समस्या होती है।

इस बीमारी के कारण पैरों की मांसपेशियों में सूजन आ जाता है।

अक्सर इसके शुरूआती लक्षण में बच्चा जब तेज चलने की कोशिश करता है तो वो गिर जाता है।

गंभीर बीमारी की वजह से थोड़ा भी चलने व दौड़ने से बच्चे को थकान महसूस होती है।

इतना ही नहीं पैर की पिंडलिया भी मोटी हो जाती है।

जब भी बच्चा बैठा हुआ हो और वो उठने की कोशिश कर रहा हो तो उसे हमेशा ही घुटने या हाथ का सहारा लेना पड़ता है।