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 सी-60 कमांडोज 
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सबसे खतरनाक आर्मी फोर्स में आता है सी-60 का नाम, थर्र-थर्र कांपते हैं नक्सली

भारतीय सेना ने 27 साल पहले किया था सी-60 का गठन

Puja Kumari

Puja Kumari

एक मई जो कि मजदूर दिवस ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, इसी आयोजन की सुरक्षा को ध्यान में रखकर सी-60 के कमांडोज महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के रास्ते जा रहे थे लेकिन इसी बीच माओवादियों ने इनको अपना निशाना बना लिया और बारूदी सुरंग के जरिए इनके काफिले पर हमला कर दिया जिसमें कुल 15 जवान शहीद हो गए। ये वाकई में बेहद दुखद घटना है, जिसके शोक में पूरा देश गमगीन हो गया है।

धोखे से बनाया निशाना

बता दें कि ये घटना गढ़चिरौली ज़िले की कुरखेड़ा तालुका के पास हुई है, महाराष्ट्र के सबसे ज़्यादा नक्सलियों से प्रभावित इसी हिस्से को माना जाता है। जैसे ही कमांडोज की गाड़ी यहां पहुंची उस दौरान नक्सलियों ने एक बड़ा आईईडी ब्लास्ट किया, ये ब्लास्ट इतना खतरनाक था कि जिस पुलिस वाहन में कमांडो जा रहे थे, वो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और इसमें मौजूद जवानों के साथ ड्राइवर की भी मौत हो गई।

पिछले साल इसी समय सी-60 ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था जिसमें करीबन 39 नक्सलियों को मार गिराया था। जिसका बदला इन माओवादियों ने ऐसे लिया। इसके अलावा इस विशेष टीम को साल 2014, 2015 और 2016 में कई ऑपरेशन में नक्सलियों के खिलाफ सफलता मिली। यही कारण था इस फोर्स का नाम सुनकर ही नक्सली कांप जाते हैं।

क्या है इस फोर्स की खासियत, कैसे करती है काम

सबसे पहले तो ये बता दें कि नक्सलवादियों के रवैये को अंजाम देने के लिए ही भारतीय आर्मी ने इस विशेष फोर्स का गठन सन 1992 में किया था जिसमें सिर्फ 24 जवानों को ही शामिल किया गया था हालांकि बाद में इसकी संख्या बढ़कर 60 हो गई, इस टीम में पुलिस फोर्स के खास 60 जवान शामिल होते हैं जिन्हें वहां के स्थानिय पुलिस में से ही चुना जाता है।

सी-60 कमांडोज 
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अगर कोई आदिवासी सेना में शामिल होना चाहता है तो उसे भी यहां अवसर दिया जाता है लेकिन इस फोर्स में शामिल होने के लिए उन्हें कई कड़े टेस्ट से गुजरना पड़ता है। दरअसल ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि ये भी नक्सली की तरह वहां के चप्पे-चप्पे से अच्छी तरह वाकिफ हो। इस फोर्स में शामिल कमांडोज को गोरिल्ला युद्ध के लिए भी तैयार किया जाता है।

ये एकलौती ऐसी फोर्स है जिसके टीम को उसके कमांडर के नाम से ही जाना जाता है। बताया तो ये भी जाता है कि इस फोर्स का एक-एक जवान अपने साथ हमेशा ही 15 किलो का भार लेकर चलता है। ये फोर्स राज्य स्तर पर बनाए जाते हैं और अत्याधुनिक तकनीक से लैस होते हैं।