उदय बुलेटिन
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IAS Fake claim
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बेटे ने फैलाई IAS बनने की झूठी खबर, पुलिस ने पकड़ा तो पिता को आया हार्ट अटैक

उत्तर प्रदेश के हापुड़ की घटना है।  

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

हर साल, बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स भारतीय सिविल सेर्वेसज परीक्षाओं (UPSC) में अपनी किस्मत आजमाते हैं, लेकिन कुछ ही अपने सपनों को साकार कर पाते हैं। हालांकि परिस्थिति कुछ भी हो, किसी भी स्टूडेंट्स को यह हक नहीं को वो अपने माँ-बाप से इस कठिन परीक्षा में पास कर जाने की झूठी खुशी दे । अगर वह सक्षम नहीं है तो झूठा दिलासा क्यों ?

यह घटना उत्तर प्रदेश के हापुड़ की है। जहां सिद्धार्थ गौतम नाम के एक लड़के ने अपने माता-पिता से कहा कि वह आईएएस की परीक्षा में पास हो गया। सिद्धार्थ एक कंप्यूटर सेंटर चलाता है जहां उसने यूपीएससी में पास होने का एक फर्जी अलॉटमेंट लेटर बनाया। जिससे वह अपने माँ बाप को यह बता सके की उसका चयन UPSC में हो गया है। उसने एक आईएएस अधिकारी का रिजल्ट डाउनलोड किया और उसका नाम हटा कर अपना नाम लगा लिया । उसने जिस आईएएस अधिकारी की रिजल्ट को कॉपी किया था उसे परीक्षा में 532 रैंक मिले थे।

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जैसे ही सिद्धार्थ के सिलेक्शन की खबर इलाके में फैली, पड़ोसी, रिश्तेदार और कई अन्य लोग उनसे मिलने आने लगे और बधाई देने लगे। उनकी उपलब्धि को कई स्थानीय और नेशनल समाचार पत्रों में स्थान दिया गया। उसे कई समारोहों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाने लगा था। यह वास्तव में किसी के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि थी जिसका पिता एक राजमिस्त्री हो और उसने अपने पूरे जीवन में बहुत संघर्ष किया हो और आखिरकर यह सफलता पाई हो।

लेकिन, सिद्धार्थ का यह फरेब ज्यादा दिन तक नहीं चल सका। जब सिद्धार्थ का साक्षात्कार वायरल होने लगा तो बात उस आईएएस अधिकारी तक भी पहुंची जिसका रिजल्ट सिद्धार्थ ने कॉपी किया था। जिसके बाद उस आईएएस अधिकारी ने , मेरठ पुलिस से इसकी शिकायत की। शिकायतकर्ता वर्तमान में भारतीय रेलवे लेखा सेवा (आईआरएएस) अधिकारी के रूप में कार्यरत है, उसने 2016, 2017 में सिविल सेवा परीक्षाओं को मंजूरी दी और फिर 2018 में फिर से 532 वीं रैंक हासिल की।

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जांच किए जाने के बाद, पुलिस को पता चला कि सिद्धार्थ गौतम अपनी आईएएस परीक्षा में फेल हुआ था । इसके बाद, पुलिस ने उसे उसके घर से गिरफ्तार किया और मेरठ ले गए।

सिद्धार्थ पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया। लेकिन सिद्धार्थ के पिता बेटे के इस करतूत को सहन नहीं कर सके और उन्हें दिल का दौरा पड़ा जिसके बाद उन्हें एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सिद्धार्थ ने जो किया उससे शायद ही उसका परिवार बहार निकल पाए। उसे क्षणिक प्रसिद्धि तो मिली, लेकिन लंबे समय के लिए बदनामी थी। नेते की इस हरकत से उसके पिता की छवी और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाया। हम अपने पाठकों से अनुरोध करते हैं कि वे ऐसी शर्मनाक गतिविधियों में लिप्त न हों जो किसी संकट वाली स्थित या आपदा का कारण बने।