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योग गुरु बाबा रामदेव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
योग गुरु बाबा रामदेव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी|Google
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सियासी आसन का त्याग कर चतुर कारोबारी बने बाबा रामदेव, बदले बदले से नज़र आते हैं 

वैसे तो साल 2014 से 2019 के बीच काफी कुछ बदल गया है। लेकिन योग गुरु बाबा रामदेव के बदले सियासी आसन ने सबको चौका दिया है। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

साल 2014 का लोकसभा चुनाव तो याद ही होगा आपको, कैसे योग गुरु बाबा रामदेव ने कांग्रेस पार्टी को जड़ से हिला कर रख दिया था। कैसे दिल्ली के राम लीला मैदान में काला धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरे जोर-शोर से अभियान चलाया और रामदेव अपने अनुयायियों से कहते थे कि मोदी को वोट दो। मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे तो विदेशों में जमा काला धन भारत वापस आएगा।

वो रामदेव ही थे जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव से करीब एक साल पहले 2013 में बीजेपी को सलाह दी थी कि "अगर बीजेपी केंद्र में सत्ता पाना चाहती है तो उन्हें नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना होगा। पांच साल पहले रामदेव बाबा कैसे अपने मंच पर खुले तौर से बीजेपी को समर्थन किया करते थे। ना केवल समर्थन किया करते थे बल्कि चुनाव प्रचार में बढ़-चढ़ कर हिस्सा भी लिया करते थे। यहां तक कि बीजेपी नेताओं को उन्होंने अपने मंच पर योग भी करवा दिया था।

आवभगत की इस रेस में बीजेपी नेताओं ने भी उस समय रामदेव का खूब साथ दिया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कई बार रामदेव से उनके मंच पर ही पैर छूकर आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बाबा रामदेव को एक उत्सव के दौरान एक साथ मंच पर हाथ उठाकर गीत गाते देखा गया था। फिर उसी मंच से रामदेव ने मोदी के लिए वोट मांग लिए थे। लेकिन बाबा रामदेव और बीजेपी की ये जोड़ी ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाई।

योग गुरु बाबा रामदेव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
योग गुरु बाबा रामदेव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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पांच साल पहले जो रामदेव बीजेपी के लिए सीटों का गुणा भाग कर रहे थे वे इस बार बीजेपी नेताओं से कन्नी काट रहे हैं। नरेंद्र मोदी के लिए अपने मंच से वोट मांगने वाले रामदेव अब कहते हैं-

" आपके 1 वोट में देश को बदलने की ताकत है, इसलिए जिस की नीतियां, नीयत और नेतृत्व देश के लिए मंगलकारी है, जिसका चरित्र पवित्र है,उसी को वोट दे।"

वैसे तो रामदेव योग गुरु हैं पर उन्हें सियासी आसन की खूब समझ है। वक्त के हिसाब से चलने के लिए कौन सा आसन कब फिट बैठेगा ये रामदेव बखूबी जानते हैं। लेकिन क्या वजह है कि रामदेव की प्राथमिकताएं बदल गई हैं ?

योग गुरु बाबा रामदेव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी 
योग गुरु बाबा रामदेव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी 
Praveen Negi-Google

बीजेपी जब 2014 का लोकसभा चुनाव जीत कर सत्ता में पहुंची तो हरियाणा सरकार ने उन्हें अपना ब्रांड एम्बेसडर बना दिया और कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया। बीजेपी की छत्र छाया में रामदेव के शिष्य बालकृष्णन के पतंजलि आयुर्वेद का कार्य फलता फूलता रहा। पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड आज 12 हज़ार करोड़ रूपये की कंपनी बन गई है। लेकिन बाबा रामदेव ने सियासत छोड़ दी है। अब वे चतुर कारोबारी की तरह वक्त की नजातक को समझते हैं। अब ना उनका कोई दोस्त है और ना कोई दुश्मन। उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली है।

रामदेव कहते हैं, " हमारा संकल्प- मैं एक व्यक्ति नहीं, मैं सम्पूर्ण राष्ट्र की अभिव्यक्ति हूँ। मैं संकीर्ण नहीं, विराट हूँ। मैं परमात्मा का प्रतिरूप हूँ। मैं सत्य, अंहिसा व सदाचार का प्रतिनिधि हूँ। मेरे तन में, मेरा वतन बसता है। मैं भारत की तकदीर व तस्वीर हूँ। मैं अपना व अपने वतन का भाग्यविधाता हूँ। मैं सर्वदलीय भी हूं और निर्दलीय भी "

योग गुरु बाबा रामदेव, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी 
योग गुरु बाबा रामदेव, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी 
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मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद जब उनसे पूछा गया कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा तो रामदेव कहते हैं कि "कुछ नहीं कहा जा सकता कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा।" 2014 में मोदी का प्रचार करने वाले रामदेव अब मोदी के नाम पर चुप्पी साध लेते हैं।

क्या बीजेपी और रामदेव की दोस्ती में दरार आ गया है, या फिर रामदेव एक कुशल व्यापारी की तरह सोच रहे हैं जो सियासत और व्यापार को अलग रखना चाहता है ?

वैसे तो बाबा रामदेव के पास बीजेपी से नाराजगी के कई कारण हो सकते हैं। जैसे नोटबंदी और जीएसटी। मोदी सरकार के इस फैसले से कई कारोबारियों को नुकसान पहुंचा था। तेजी से बढ़ने वाला पतंजलि आयुर्वेद का मुनाफा भी साल 2017 में 10,561 करोड़ रहा। हो सकता है रामदेव नोटबंदी और जीएसटी के कारण मोदी सरकार को इस बार समर्थन नहीं कर रहे।

योग गुरु बाबा रामदेव और अरुण जेटली
योग गुरु बाबा रामदेव और अरुण जेटली
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2014 के लोकसभा चुनाव में रामदेव ने कहा था मोदी सरकार काला धन वापस लाएगी, मोदी को वोट दो। लेकिन बीजेपी सरकार इसमें भी फेल रही। अब रामदेव के पास अपने अनुयायियों से कहने के लिए कुछ नहीं है। फिर भी रामदेव कहते हैं -

अभी तो मैंने राष्ट्रधर्म व ऋषिधर्म की बात ही नही की, मोदीयुग व युद्ध शब्द भी नही बोला, फिर भी असुर गैंग अपना खानदान बता रहा है, जब अच्छी बात अच्छी ना लगे तो समझ लेना बुरे दिन निश्चित हैं, फिर भी अच्छे दिन आयेंगें- क्योंकि ...................जय हिन्द

अब आप यहां क्योंकि................. का अर्थ “क्योंकि मोदी है तो मुमकिन है” भी लगा सकते हैं।