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कांग्रेस के नव-निर्वाचित जिला उपाध्यक्ष -अजीत भटनागर 
कांग्रेस के नव-निर्वाचित जिला उपाध्यक्ष -अजीत भटनागर |Google
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उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा और बीजेपी बेचैन, नये चेहरों से कांग्रेस का संगठन हो रहा मजबूत

इस साल के शुरुआत में सपा-बसपा ने कांग्रेस को दरकिनार करते हुए महागठबंधन बना लिया था, लेकिन कांग्रेस ने कुछ ऐसी चाल-चली की सपा-बसपा अब बैकफुट पर आ गई है। 

AKANKSHA MISHRA

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देश की राजनीति में उत्तर प्रदेश हमेसा ही वो मुकुट रहा है जो किसी भी पार्टी को राजा बना सकता है। राजनीतिक मायनों में उत्तर प्रदेश वह पड़ाव है, जो सीधे सत्ता की कुर्सी पर जा टिकता है। लोकसभा चुनाव से पहले सभी दल आपसी सांठगांठ में जुटे थे। लेकिन उत्तर प्रदेश का सांठगांठ कई मायनों में खास है। जनवरी में सपा-बसपा और आरएलडी ने कांग्रेस को दरकिनार कर महागठबंधन बनाया, और कहा “उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। अगर कांग्रेस इस गठबंधन का हिस्सा होती तो हमें सिर्फ नुकसान होता।”

बीजेपी ने भी कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, “बाबा को बुआ और बबुआ ने दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया। कुछ भी हो जाये बीजेपी उत्तर प्रदेश में 78 सीटें लेकर आएगी।”

लेकिन अब पांसा पलट चुका है। सपा-बसपा और आरएलडी गठबंधन के तेवर नरम पड़ चुके हैं। बीजेपी ने भी सीटों की गिनती थोड़ी कम कर दी है अब 78 के बजाए आंकड़े 58 पर आ गए हैं। वहीं कांग्रेस में नई ऊर्जा का संचार हुआ है और इसके कारण कई हैं। आइए जानते हैं।

कांग्रेस को मिली संजीवनी

1989 के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है। नारायण दत्त तिवारी बतौर मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के आखिरी बड़े नेता रहे। कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में हाल काफी बुरा है और ये बात कांग्रेसी कार्यकर्ता भी जानते हैं। लेकिन आज भी पार्टी में कई ऐसे नेता हैं, जो पार्टी को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। जनवरी महीने में जब प्रियंका गांधी को कांग्रेस का महासचिव बनाया गया तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, संगठन को दोबारा मजबूत करने की और प्रियंका ने इसकी शुरुआत राजधानी लखनऊ से की। प्रियंका गांधी के राजनीती में आने से लखनऊ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव चौधरी बहुत खुश हैं, उनका मानना है कि, प्रियंका के राजनीति में आने से कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है और कांग्रेस अब पहले से ज्यादा मजबूत हो गई हैं।

गौरव चौधरी कहते हैं कि, नारायण दत्त तिवारी के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बनी। लेकिन यहां के पार्टी कार्यकर्ताओं का जोश कभी कम नहीं हुआ। हमने चुनाव तो नहीं जीते लेकिन लोगों का दिल जरूर जीता है। हमें पूरा भरोसा है कि उत्तर प्रदेश की जनता हमें अपनी सेवा करने का मौका दोबारा जरूर देगी।

गौरव चौधरी- अजीत भटनागर 
गौरव चौधरी- अजीत भटनागर 
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लखनऊ कांग्रेस की उम्मीदें

लखनऊ कांग्रेस अध्यक्ष गौरव चौधरी के जिम्में संगठन को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण काम है। जो वे बखूबी निभा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी की सलाह पर गौरव चौधरी ने अपने जैसे कई मेहनती और उन्नत सोच वाले कार्यकर्ताओं को पार्टी से जोड़ने का काम किया है।

लखनऊ कांग्रेस कमेटी के नव-निर्वाचित जिला उपाध्यक्ष अजीत भटनागर का मानना है कि, "कांग्रेस एक सोच है, एक विचारधारा है, जो लोगों के खून में हैं। कांग्रेस इस देश के लोगों के दिलों में बसी है, जिसे निकालना नामुमकिन है।"

अजीत भटनागर का मानना है कि "कांग्रेस ने हमेसा से देश को मजबूत करने का काम किया है। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भारत को औद्योगिक देश बनाया, इंदिरा गांधी ने सामाजिक और आर्थिक सुदृढ़ीकरण, हरित क्रांति और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, राजीव गांधी के नेतृत्व में भारत, पंचायती राज,आईटी और दूरसंचार क्रांति के माध्यम से आगे बढ़ा, अब राहुल गांधी के कुशल नेतृत्व में देश आगे बढ़ेगा। "

लखनऊ कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव चौधरी ने कहा "सपा बसपा गठबंधन से कांग्रेस को ज्यादा नुकसान नहीं होगा, पार्टी अपने दम पर चुनाव जीतेगी और सीटें लेकर आयेगी। कांग्रेस पार्टी जात-पात की राजनीति नहीं करती, लोगों का भरोसा हमारे साथ है। बीजेपी के पांच साल के शासन से जनता परेशान हो चुकी है। इस बार के चुनाव में कांग्रेस चौंकाने वाले परिणाम लेकर आएगी।”

दबाव में BJP नेता

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बढ़ते मनोबल और प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में शामिल होने के बाद, बीजेपी और सपा-बसपा गठबंधन में बढ़ती बैचनी साफ़ नज़र आती है। हालांकि दोनों ही पार्टी के नेताओं ने किसी दबाव में होने से साफ इंकार किया है।

उप्र बीजेपी सह चुनाव प्रभारी दुष्यंत गौतम कहते हैं कि, "मोदी जी के सामने अगर ये सब मिल कर भी लड़ेंगे तो भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। कोई मुकाबला है ही नहीं, मोदी जी और योगी जी का काम लोग देख रहे हैं।"

वहीं सपा बसपा गठबंधन के नेता अभिषेक मिश्रा कहते हैं कि, "कांग्रेस के पास बड़े नेताओं की कमी कभी नहीं रही है, अब प्रियंका गांधी भी राजनीति में आ गई हैं। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि चुनाव संगठन, कार्यकर्ता और स्ट्रक्चर के ज़रिए लड़े जाते हैं, बड़े नेताओं के नाम पर नहीं लड़े जाते।"

बहरहाल लोकसभा चुनाव में नतीजें जो भी आये, कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं का बढ़ता मनोबल बीजेपी, सपा और बसपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।