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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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बीजेपी को दोबारा वोट देने से पहले 2014 के चुनावी वादों को याद कर लें

आरएसएस की राजनीतिक विंग यानी भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में राम मंदिर निर्माण को अपने घोषणा पत्र में जगह दी थी।

AKANKSHA MISHRA

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना पहला कार्यकाल पूरा कर लिया है। जिसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी को लेकर बीजेपी सहित सभी राजनीतिक पार्टियां दिन-रात मेहनत कर रही हैं। वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक और रैलियों का दौर चरम पर है। सभी नेताओं का एक ही लक्ष्य है मिशन 2019। मिशन 2019 में बीजेपी या कांग्रेस को वोट देने से पहले 2014 के बीजेपी के घोषणा पत्र को याद करना जरुरी है।

साल 2014 में बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में 393 वादे किये थे। कुछ वादे पुराने थे और कुछ मोदी सरकार ने अपनी तरफ से जोड़ दिए थे। सरकार कि नीतियों और शक्तियों पर गौर करने के बाद 346 वादों को गवर्नेंस की श्रेणी में रखा गया। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में लगभग सभी क्षत्रों में काम किया। महिलाओं से किये गए 20 में से 11 वादे पूरे हुए , ST-SC और माइनॉरिटी से किये गए 12 में से 6 वादे पूरे किये गए। अर्थव्यवस्थ तो मोदी सरकार के कार्यकाल में बर्बाद हो गई लेकिन इस श्रेणी में भी सरकार ने काम किया और 19 में से 11 वादे पूरे किये। किसानों को वोट बैंक बना कर सत्ता में आई सरकार जीत के बाद किसानों को भूल गई किसानों से किये गए 17 में से 5 वादे पूरे हुए।

चलिए अब नज़र डालते हैं कि, साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के घोषणापत्र में कितने वादे शामिल थे। कितने वादे पूरे हुए, कितने अधूरे हैं और कितने हवा में निकल गए।

Manifesto2014highlights.pdf
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2014 लोकसभा चुनाव - बीजेपी के घोषणा पत्र को देखने के लिए इस अटैचमेंट को डाउनलोड करें

राम मंदिर

आरएसएस कि राजनीतिक विंग यानी भारतीय जनता पार्टी (BJP) 2014 में राम का नाम लेकर सत्ता पर काबिज हुई थी। मोदी सरकार ने वादा किया था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण उनके ही कार्यकाल में होगा। जिसपर विश्वास करते हुए जनता ने उनका साथ दिया और 30 साल बाद पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री तो बने गए लेकिन अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में सरकार की तरफ से अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। आरएसएस इस बात के लिए मोदी सरकार को हमेसा निशाना बनाती आई है।

आरएसएस का राम मंदिर पर ट्वीट 
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2 करोड़ नौकरी का वादा

मोदी सरकार ने हर साल 2 करोड़ बेरोजगारों को नौकरी देने का वादा किया था। जिसमें सरकार पूरी तरह फेल हो गई। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि 125 करोड़ लोगों को नौकरी देना आसान नहीं है इसलिए लोगों को स्वरोजगार मिलेगा। ‘स्टैंड उप इंडिया’ और ‘स्टार्ट उप इंडिया’ जैसे कार्यक्रम चलाये गए। लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं निकला। जिसके बाद मोदी सरकार ने कह दिया पकोड़ा बेचना भी रोजगार है।

महंगाई पर लगाम

बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार मूल्य वृद्धि और महंगाई की जांच करेगी और इसे रोकने के लिए कड़ा कदम उठाएगी। जमाखोरी और कालाबाजारी की रोक के लिए विशेष अदालतें स्थापित किए जायेंगे। हालाँकि विशेष अदालतें स्थापित तो नहीं किये गए और न ही सरकार ने बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाया। उल्टा पेट्रोलियम उत्पाद और महंगे हो गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 
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पानी-बिजली और शौचालय

'बिल्डिंग इंडिया' कार्यक्रम के तहत बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि मोदी सरकार बिजली, पानी और शौचालय को हर किसी के लिए सुलभ बना देगी और सरकार ने इस क्षेत्र काफी काम भी किया। लेकिन आज भी देश के कई भागों में मोदी सरकार का ये वादा भी महज चुनावी जुमला निकला।

काला धन

मोदी सरकार के घोषणापत्र में सबसे प्रचलित वादों में से एक है काला धन। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने वादा किया था कि, उनकी सरकार अगर सत्ता में आई तो विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस लाया जाएगा और हर भारतीय के बैंक खातों में 15 लाख रूपये जमा किये जाएगें। हालाँकि यह वादा आज भी बरकरार है। जनता आज भी मोदी सरकार से सवाल पूछती है कि काला धन कब आएगा ?

आधी आबादी के लिए मोदी सरकार की योजना

मोदी सरकार ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है तो संविधान को संशोधित कर के संसदीय और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी का आरक्षण दिया जायेगा। हालांकि महिला आरक्षण विधेयक मार्च 2010 से लोकसभा में लंबित है। पूर्ण बहुमत होने के बावजूद मोदी सरकार ने इस विधेयक को पारित नहीं किया। राज्य सभा ने इस विधेयक को 2010 में ही पारित कर दिया था।

कश्मीरी पंडितों की वापसी , आर्टिकल 370 को निरस्त करने का वादा

मोदी सरकार ने 2014 में अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर में सुशासन की स्थापना करेगी। संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया जायेगा। जम्मू-कश्मीर में सभी कश्मीरी पंडितों की वापसी होगी। लेकिन न तो एक भी कश्मीरी पंडित घाटी वापस लौटे और न ही आर्टिकल 370 को निरस्त किया गया। बल्कि मोदी सरकार ने पुलवामा और उरी कश्मीरों को सौगात में दी।