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J&K Loksabha Election and Assembly Election 2019
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माया, मेहबूबा और उमर अब्दुल्ला का जारी है कश्मीर घमासान बोले- मोदी सरकार की कश्मीर नीति फेल 

कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने कहा कि भारत-विरोधी ताकतों के सामने मोदी (PM Modi) का ‘एकदम से घुटना टेक देना बहुत शर्मनाक’ है। 

AKANKSHA MISHRA

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चुनाव आयोग द्वारा जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव के साथ विधान सभा चुनाव न करने के फैसले पर घमासान शुरू हो चुका है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधा। मायावती ने जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभा का चुनाव लोकसभा के साथ नहीं कराए जाने को मोदी सरकार की कश्मीर नीति की विफलता बताया है।

BSP Chief Mayawati
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उन्होंने ट्वीट किया, "जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभा का आमचुनाव लोकसभा चुनाव के साथ नहीं कराना मोदी सरकार की कश्मीर नीति की विफलता का द्योतक है। जो सुरक्षा बल लोकसभा चुनाव करा सकते हैं, वही उसी दिन वहां विधानसभा का चुनाव क्यों नहीं करा सकते हैं? केंद्र का तर्क बेतुका है व भाजपा का बहाना बचकाना है।"

उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में कहा, "भाजपा राष्ट्रवाद व राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ताल ठोक रही है। भाजपा जो चाहे करे लेकिन पहले करोड़ों गरीबों, मजदूरों, किसानों, बेरोजगारों आदि को बताए कि अच्छे दिन लाने व अन्य लुभावने चुनावी वायदों का क्या हुआ? क्या हवा-हवाई विकास हवा खाने गया?"

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने ट्वीट कर कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में समय पर विधानसभा चुनाव कराने में नाकामी को देखते हुए मैं कुछ दिनों पहले किए गए अपने ट्वीटों को फिर से ट्वीट कर रहा हूं। पीएम मोदी ने पाकिस्तान, आतंकवादियों और हुर्रियत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। शाबाश मोदी साहब... 56 इंच का सीना फेल हो गया।'

उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि, भारत-विरोधी ताकतों के सामने मोदी (PM Modi) का ‘एकदम से घुटना टेक देना बहुत शर्मनाक' है। उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'बालाकोट और उरी पीएम मोदी द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले संभालने के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि जम्मू-कश्मीर है...और जरा देखिए कि वहां उन्होंने कैसी कुव्यवस्था कायम कर दी है। भारत विरोधी ताकतों के सामने एकदम से घुटना टेक देना शर्मनाक है।' पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 1996 के बाद पहली बार राज्य में विधानसभा चुनाव समय पर नहीं हो रहे।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि, वो वक़्त आ गया है जब हर आम आदमी अपने सांसद को चुनेगा। यह बड़े से बड़े दिग्ज नेताओं की असली परीक्षा होगी। आप से दरखास्त है की ऐसे इग्ज़ाम warrior को चुने जो देश की तरक़्क़ी के लिए काम करेगा।

चुनाव आयोग का तर्क

जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभा चुनाव साथ कराए जाने की पार्टियों की मांग पर सीईसी ने कहा कि उम्मीदवारों की सुरक्षा के लिए बलों की कम उपलब्धता के कारण राज्य में सिर्फ लोकसभा चुनाव ही कराया जा रहा है। चुनाव आयोग ने कहा, 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले जैसी घटनाओं ने प्रशासन को अलर्ट पर रखा हुआ है और सीमावर्ती इलाकों समेत पूरे राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए सभी जरूरी उपाय किए गए हैं। सीमावर्ती इलाके पाकिस्तान द्वारा संघर्षविराम उल्लंघन किए जाने का सामना कर रहे है।