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अफलज गुरु का बेटा ग़ालिब गुरु 
अफलज गुरु का बेटा ग़ालिब गुरु |Google
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Video: आतंकी अफजल गुरु के बेटे को चाहिए भारतीय पासपोर्ट, विदेश में करनी है पढ़ाई 

ग़ालिब भारत के किसी भी मेडिकल कॉलेज से पढाई करना चाहता है।  

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

बच्चे अपने माँ-बाप की परछाई होते हैं, बच्चों के जीवन को सजाना, सवारने उन्हें सही रास्ता दिखाना हर माँ-बाप का फर्ज है। लेकिन जब उस बच्चे का बाप आतंकी हो तो स्थिति बदल जाती है न होते हुए भी ये दुनिया उस आतंकी के बच्चे को आतंकी ही समझती है। ग़ालिब गुरु, आतंकी अफजल गुरु का बेटा है। वही अफजल गुरु, जिसने भारत के संसद भवन में आतंकी हमले को अंजाम दिया था। लेकिन ग़ालिब, अपने पिता की तरह नहीं है, 18 साल का ग़ालिब पढ़ाई में काफी तेज है, 10वीं में उसके 95 फीसदी अंक आये थे और 12वीं में 89 फीसदी। ग़ालिब अब डॉक्टर बनना चाहता है और अपने पिता के सपने को पूरा करना चाहता है।

ग़ालिब भारत के किसी भी मेडिकल कॉलेज से पढाई करना चाहता है और अगर उसका एडमिशन भारत में नहीं हो सकता तो वह विदेश जा करा मेडिकल की पढाई करना चाहता है। अपने पिता के अधूरे ख़ाब को पूरा करना चाहता है। लेकिन विदेश जाने के लिए ग़ालिब को भारतीय पासपोर्ट की जरुरत पड़ेगी। ग़ालिब के पास आधार कार्ड तो है पर पासपोर्ट नहीं, अब उसे पासपोर्ट चाहिए।

सुनिए क्या कहा ग़ालिब ने

ग़ालिब गुरु ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा -

अभी मेरे पास कम से कम एक कार्ड है दिखाने को मेरा आधार। मैं बहुत खुश हूं। जब मुझे मेरा पासपोर्ट मिल जाएगा, तब मुझे काफी गर्व होगा। एक हिंदुस्तानी नागरिक होने का गर्व। ग़ालिब ने बताया मैं मेडिकल की पढ़ाई करना चाहता हूं, मुझे टर्की में स्कॉलरशिप मिली है, मुझे पासपोर्ट मिल जाये तो मैं विदेश जा कर अपनी पढाई पूरी कर सकता हूं।

हम अतीत की ग़लतियों से सीखते हैं। मेरे पिता अपने मेडिकल करियर को आगे नहीं ले जा सके। मैं उस अधूरी बात को पूरा करना चाहता हूं। अगर मेरा दाखिला हिंदुस्तान में नहीं हो पाता, तो मैं पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहूंगा। तुर्की का एक कॉलेज शायद मुझे स्कॉलरशिप भी दे।

ग़ालिब को मोटिवेट करती है सेना

ग़ालिब गुरु फ़िलहाल अपनी माँ के साथ अपने ननिहाल में रहते हैं और वहीं से मेडिकल में दाखिले के लिए NEET की तैयारी कर रहा है। 5 मई को परीक्षा होनी है। ग़ालिब गुरु को उनकी माँ ने सही रस्ते पर चलना सिखाया है। पिता अफजल गुरु की मौत के बाद ग़ालिब के अंदर भारत सरकार के प्रति बदला, गुस्सा, नफ़रत, का जो भाव उमड़ा था उसे ग़ालिब की माँ तब्बसुम ने एक सेहतमंद और सुरक्षित राह की तरफ मोड़ दिया। उनकी माँ ने उन्हें आतंकवाद, चरमपंथ से दूर रखा। ग़ालिब आज भारतीय सेना का सम्मान करते हैं और कहते हैं सेना ने मुझे हमेसा ही मोटीवेट किया है। मेरी पढाई पूरी हो ऐसा सेना भी चाहती है मुझे अब अपनी पढ़ाई पर फोकस करना चाहिए।