जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी
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आतंकियों का रहनुमा पाकिस्तान, कश्मीर में POK के इन चार रास्तों के जरिए करवाता है घुसपैठ  

खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कुन्हार नदी के तट पर स्थित शिविर का इस्तेमाल एक अन्य आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन भी करता था।

AKANKSHA MISHRA

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हिंदुस्तान-पाकिस्तान 1947 में दो पड़ोसी मुल्क बने। भारत हिंदुओं का मुल्क बना तो पाकिस्तान मुसलमानों का, लेकिन आज मुसलमानों की जनसंख्या में भारत, पाकिस्तान से आगे है। भारत और पाकिस्तान के अलग होने के बाद दोनों ही देशों के पास आगे बढ़ने के लिए अपनी प्राथमिकताएं थी। लेकिन भारत ने विकास को चुना और पाकिस्तान के आतंकवाद को। आज भारत की गिनती दुनिया के शक्तिशाली और समृद्ध देशों में होती है, तो पाकिस्तान की गिनती आतंकियों के पनाहगार राष्ट्र के रूप में।

भारत में अब तक 100 से अधिक आतंकी हमले हुए हैं। जिसमें आतंकियों को पनाह देने में और बढ़ावा देने में पाकिस्तानी धरती का इस्तेमाल किया गया है। पाकिस्तान द्वारा संचालित कश्मीर (POK) में आतंकियों का प्रशिक्षण शिविर है। पाकिस्तान आतंकियों को POK में ट्रेनिंग देकर भारत में घुसपैठ करने के लिए उकसाता है। इसके अलावा पाकिस्तान का बालाकोट आतंकियों का मक्का है। यहां आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद का मुख्यालय है। बालाकोट वह स्थान है जहां आतंकी, भारत में हमलों को अंजाम देने के लिए जम्मू कश्मीर के जरिये घुसपैठ करते हैं। बालाकोट में चार मुख्य रास्तों का इस्तेमाल आतंकी करते हैं। गौरतलब है कि बालाकोट स्थित आतंकी शिविरों पर भारतीय वायुसेना ने मंगलवार तड़के बम गिराए थे। एहतियाती कदम उठाते हुए यह कार्रवाई की गई थी।

नीलम घाटी (Neelam Ghati)

Neelam Ghati
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) की नीलम घाटी में स्थित केल का इस्तेमाल उन आतंकवादियों के ‘लॉंचिंग प्वाइंट’(प्रक्षेपण स्थल) के रूप में किया जाता था जो जम्मू कश्मीर में घुसपैठ किया करते है।

बालाकोट (Balakot)

Balakot
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भारत में घुसने के लिए जैश के आतंकी घुसपैठ के जिन रास्तों का अक्सर इस्तेमाल करते रहे हैं, उनमें कुपवाड़ा जिले में स्थित बालाकोट - दूधनियाल, मगाम जंगल में स्थित कैंथावली, कालपोरा में स्थि लोलाब और केल में स्थित काचमा - क्रालपोरा शामिल हैं। जैश के आतंकी विभिन्न तरह के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे करते थे, जैसे कि तीन महीने का एडवांस कॉम्बैट कोर्स (दौरा ए खास), एडवांस आर्म्ड ट्रेनिंग कोर्स (दौरा अल राद) और रिफ्रेशर कोर्स ।

कुपवाड़ा (kupwara ghati)

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आतंकी शिविर बालाकोट में आतंकवादियों को AK 47, पीका, MLG, रॉकेट लॉंचर, UBGL और ग्रेनेड जैसे हथियार चलाना सिखाया जाता था। हालांकि पाकिस्तान सरकार इसे मदरसा का नाम देती है।

यहां हथियारों के संचालन में बुनियादी प्रशिक्षण के अलावा आतंकवादियों को जंगल में जीवित रहने, घात लगा कर हमला करने, संचार, जीपीएस, नक्शा पढ़ना आदि की भी जानकारी दी जाती थी। यहां इन आतंकवादियों को तैराकी, तलावरबाजी और घुड़सवारी का भी प्रशिक्षण दिया जाता था।

लोलाब (Lolab Valley)

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आतंकी प्रशिक्षण की अवधि के दौरान इंडियन एयरलाइंस की उड़ान (आई सी - 814) को अगवा कर जैश द्वारा कंधार ले जाए जाने की घटना जैसा वीडियो दिखा कर आतंकियों को कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाया जाता था। उन्हें मुसलमानों के खिलाफ कथित अत्याचार, गोधरा बाद के दंगों पर ‘हां मैंने देखा है गुजरात का मंजर’ नाम का वीडियो और बाबरी मस्जिद ढहाने जाने से जुड़े भाषणों का वीडियो दिखाया जाता था।

खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कुन्हार नदी के तट पर स्थित शिविर का इस्तेमाल एक अन्य आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन भी करता था। सूत्रों ने बताया कि शिविर में कम से कम 325 आतंकवादी और 25 से 27 प्रशिक्षक मौजूद थे। जैश का यह सबसे बड़ा शिविर था।

आपको बता दें कि, जैश ने ही 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे। सूत्रों ने बताया कि शिविर में वहां रहने वालों को नदी में भी प्रशिक्षित किया जाता था।

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उदय बुलेटिन
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