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विंग कमांडर अभिनन्दन
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PAK में फंसे विंग कमांडर अभिनन्दन का बाल भी बांका नहीं कर सकती पाकिस्तानी सेना

जेईएम ने कश्मीर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले पर आत्मघाती हमला करने की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

भारतीय वायुसेना ने बुधवार को पाकिस्तान के एक विमान को मार गिराया और इस कार्रवाई में मिग-21 का एक पायलट लापता है। कथित तौर वह पाकिस्तान के कब्जे में हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा "दुर्भाग्य से इस कार्रवाई में हमने एक मिग-21 को खो दिया। कार्रवाई में पालयट लापता है। पाकिस्तान ने दावा किया है कि वह उसके कब्जे में हैं। हम तथ्यों का पता लगा रहे हैं।"

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर भारत के सैन्य अड्डों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है, जोकि मंगलवार को भारत द्वारा आतंकरोधी कार्रवाई करते हुए जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) को निशाना बनाने के विरोध में है।

ऐसे में हम बताने जा रहे हैं, क्या हैं युद्ध बंदियों के लिए नियम

पायलट नचिकेता
पायलट नचिकेता
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी के कार्यकल की घटना

1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान IAF के फाइटर पायलट नचिकेता जो वायु सेना का MIG 27 को उड़ा रहे थे। दुश्मन के कैंप पर लाइव रॉकेट फायरिंग के दौरान उनके विमान का इंजन खराब हो गया था। जिसके बाद इंजन में आग लगने से MIG 27 क्रैश हो गया। नचिकेता विमान से सुरक्षित बाहर निकले लेकिन पाकिस्तानी सौनिकों ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया था। जिसके बाद पाकिस्तान सेना ने उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से टॉर्चर किया। उनके प्लेन क्रैश की खबरें इंटरनेशनल मीडिया में रहीं। पाकिस्तान सरकार पर दबाव रहा और 8 दिन बाद पाकिस्तानी आर्मी ने नचिकेता को इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस को सौंपा। जिसके बाद नचिकेता को वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत भेजा गया।

क्या है युद्ध बंदी के लिए जिनेवा संधि

जिनेवा सम्मेलनों में चार संधियां और तीन अतिरिक्त प्रोटोकॉल (मसौदे) शामिल हैं जो युद्ध के मानवीय उपचार के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के मानकों को स्थापित करते हैं। जिनेवा संधि (1949) के अनुच्छेदों में बड़े पैमाने पर कैदियों के युद्धकालीन बुनियादी अधिकारों (नागरिक और सैन्य) को परिभाषित किया गया है। जैसे युद्ध क्षेत्र में और आसपास के क्षेत्र में नागरिकों और घायलों के लिए सुरक्षा स्थापित किये जाने की व्यवस्था दी। जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को लेकर नियम बनाए गए हैं -

  • जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को डराने-धमकाने का काम या उनका अपमान नहीं किया जा सकता।
  • युद्धबंदियों को लेकर जनता में उत्सुकता पैदा भी नहीं करना है।
  • जिनेवा संधि के मुताबिक, युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जाएगा या फिर युद्ध के बाद उन्हें लौटा दिया जाएगा। जैसा की इंदिरा गांधी ने भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान किया था।
  • पकड़े जाने पर युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने का प्रावधान किया गया है।
  • जिनेवा संधि के तहत युद्ध के दौरान युद्ध बंदी कैदियों के उपचार की व्यवस्थ करनी होगी।