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SP-BSP Alliance in Madhya Pradesh
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लोकसभा चुनाव से ठीक पहले BSP-SP गठबंधन का बड़ा फैसला, मध्य प्रदेश में सपा को मिली सिर्फ 3 सीटें

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले SP-BSP महागठबंधन को झटका देते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने बिहार के बाद अब मध्य प्रदेश में भी अधिक सीटों से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।  

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लोकसभा चुनाव (Loksabha Election 2019) से पहले दो राजनितिक पार्टियां सपा और बसपा ने महागठबंधन (SP-BSP Alliance) बनाया तो बीजेपी, कांग्रेस सहित तमाम दलों की बैचनी बढ़ गई। कांग्रेस ने आनन फानन में जहां प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना दिया तो वहीं बीजेपी से प्रधानमंत्री मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा-बसपा गठबंधन पर जुबानी हमला शुरू कर दिया और इस गठबंधन को ‘महा-मिलावटी का गठबंधन’ का नाम दिया गया। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। सपा-बसपा गठबंधन (SP-BSP Alliance) ने लोकसभा चुनाव (Loksabha election 2019) से पहले ही कई ऐसे फैसले लिए हैं जिन्हें देख कर लगने लगा है कि अब गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है।

लोकसभा चुनाव से पहले महागठबंधन को झटका देते हुए बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में 26 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है वहीं सपा के खाते में मात्र तीन सीटें गई है। वहीं अगर बिहार की बात करें तो बिहार चुनाव से पहले बसपा से सपा को दूध में पड़ी मक्खी की तरह बहार निकल कर फेंक दिया है और अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है। मध्य प्रदेश और बिहार के लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र मायावती (BSP Chief Mayawati) ने दिल्ली में राज्यों के नेताओं की बैठक बुलाई है। उम्मीदवारों के चयन को ध्यान में रखते हुए पार्टी प्रमुख मायावती (BSP Chief Mayawati) ने 28 फरवरी को दिल्ली में बिहार के नेताओं की बैठक बुलाई है। मध्य प्रदेश के बाद अब बिहार में भी सपा बसपा महागठबंधन सुरक्षित नहीं लगता है। मध्यप्रदेश में जहां बसपा 26 सीटों पर उतरने जा रही हैं तो वही बिहार में सभी 40 सीटों से चुनाव लड़ेगी।

मध्य प्रदेश और बिहार में भले ही बहुजन समाज पार्टी अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है, मगर उत्तर-प्रदेश में समाजवादी पार्टी से गठबंधन कर पार्टी चुनाव लड़ रही है। यूपी की कुल 80 लोकसभा सीटों में से सपा 37 और बसपा 38 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी। अमेठी और रायबरेली की सीट पर गठबंधन ने प्रत्याशी न उतारने का फैसला किया है। 2014 के लोकसभा चुनाव बसपा के लिए एक बुरे स्वप्न की तरह रहा, जब पार्टी को एक भी सीट नसीब नहीं हुई। वहीं समाजवादी पार्टी को भी सिर्फ पांच और कांग्रेस को दो सीटें मिलीं थीं। जबकि बीजेपी और सहयोगी दल को कुल मिलाकर 73 सीट मिली थी। अब इस बार 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी से मुकाबले के लिए यूपी के दोनों प्रमुख दल सपा-बसपा साथ आए हैं।

-- एजेंसी