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गिरगिट पाकिस्तान ने फिर बदला रंग, कल-तक जिसे क्रांतिकारी मानता था, भारत के डर से अब उसी पर लगाया प्रतिबंध

1989 में आतंकवाद शुरू होने के बाद से अब तक के सबसे भयानक हमले में पुलवामा आतंकी हमला है।

AKANKSHA MISHRA

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जम्मू कश्मीर के पुलवामा आतंकी हमके के बाद भारत के ताबड़-तोड़ एक्शन से पाकिस्तान में खौफ का माहौल है। पाकिस्तान हर वो कोशिश कर रहा है जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पड़ रहा दवाब कम हो सके। पुलवामा हमले के बाद बुरी तरह घिरा पाकिस्तान अब करे भी तो क्या। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दबाव के कारण पाकिस्तान ने अब रातों रात एक बड़ा कदम उठाया है। पाकिस्तान ने हाफिद सईद के जमात-उद-दावा (जेयूडी) और खैराती इकाई फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन पर एक बार फिर प्रतिबंध लगा दिया है। हाफिज सईद 2008 में हुए मुंबई हमले के मास्टरमाइंड रहा है।

मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि इन दोनों आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध का यह फैसला प्रधानमंत्री इमरान खान की अगुवाई में राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में लिया गया। इस बैठक में पुलवामा आत्मघाती हमले के बाद की भू-रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के माहौल पर चर्चा की गई। यह पहला मौका नहीं जब दोनों संगठनों प्रतिबंध लगा हो। 2018 फरवरी में भी इन आतंकी कारखानों पर रोक लगाया गया था, लेकिन रोक की अवधि खत्म हो गई थी। इसके बाद एक बार फिर इन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया है।

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पाकिस्तान डर के साये में

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पुलवामा हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेवार माना है। भारत ने जब UN में हाफिज सईद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने की बात कहीं तो पाकिस्तान का सच्चा दोस्त चीन भी भारत के साथ आ गया। भारत के प्रस्ताव पर UNSC के P5 देशों (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) और 10 अस्थाई सदस्यों ने इस हमले की निंदा की, इनमें चीन भी शामिल है। अमेरिका, फ्रांस और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने पाकिस्तान पर जबरदस्त दबाव डाला है। भारत के प्रस्ताव के बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद मिलने में दिक्कत होगी ऐसे में कंगाल पाकिस्तान अपनी जरूरतों को कैसे पूरा करेगा।

इन सभी मजबूरियों को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने गुरुवार 21 फ़रवरी को एक मीटिंग बुलाई जिसमें कई अहम विभागों के मंत्री, सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा, खुफिया एजेंसियों के चीफ और सुरक्षा अधिकारी मौजूद थे। इस मीटिंग में फैसला लिया गया कि 'दुनिया को बताना होगा की पाकिस्तान आतंकियों का मददगार नहीं है। ' पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने गृह मंत्रालय और सुरक्षा अधिकारियों को आतंकी संगठनों पर तुरंत कार्रवाई करने के आदेश दिए। गृह मंत्रालय ने तय कि "जमात-उद-दावा और फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को गैरकानूनी घोषित किया जाए।’’ इससे पहले गृह मंत्रालय ने दोनों संगठनों को निगरानी सूची में रखा था।

कितना बड़ा है जेयूडी का नेटवर्क

जेयूडी के नेटवर्क में 300 मदरसे औरस्कूल, अस्पताल, एक प्रकाशन और एम्बुलेंस सेवा शामिल हैं। दोनों समूहों के पास करीब 50,000 स्वयंसेवक और सैकड़ों की संख्या में वेतनभोगी कर्मचारी हैं।

आतंकी संगठन जैश (Jaish-e-Mohammed)

जैश-ए-मुहम्मद (Jaish-e-Mohammed) एक पाकिस्तानी आतंकी संगठन है जिसका एक ही मकसद है, भारत से कश्मीर को अलग करना है। जैश-ए-मुहम्मद (Jaish-e-Mohammed) की स्थापना मसूद अज़हर (Maulana Masood Azhar) नामक पाकिस्तानी पंजाबी नेता ने २000 में की थी। दिसम्बर 1999 में अपहरित भारतीय विमान IC 814 के यात्रियों को बचाने के लिए भारत में कैद मसूद अज़हर (Maulana Masood Azhar) को कन्दहार ले जाकर छोड़ दिया गया था। जिसके बाद उसने भारत में कई आतंकी हमले कराये। दिसम्बर 2001 में जैश ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर नई दिल्ली में भारतीय संसद पर आत्मघाती हमला किया था। पुलवामा आतंकी हमले में भी जैश का हाथ है।