उदय बुलेटिन
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आज देश को अटल बिहारी वाजपयी और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं की जरुरत
आज देश को अटल बिहारी वाजपयी और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं की जरुरत|Google
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Pulwama Attack: आज देश को अटल बिहारी बाजपेई और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं की जरुरत

पुलवामा आतंकी हमले में CRPF जवानों के हत्याकांड का दुनिया भर के लोग निंदा कर रहे है। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

जम्मू कश्मीर के पुलवामा आतंकी हमले में देश के 49 CRPF जवान शहीद हो गए। कश्मीर की भूमि एक बार फिर वीर जवानों के खून से लाल हो गई। भारत माता के वीर सपूत हंसते हंसते फिर वीरगति को प्राप्त हो गए। देश की जनता गुस्से में है, आक्रोशित है, बदला लेना चाहती है, हर तरफ पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए जा रहे हैं। पुलवामा हमले से पूरा देश स्तब्ध है। लेकिन यह सब नया नहीं हैं ऐसा पिछले 70 सालों से चला आ रहा है। पंडित जवाहर लाल नेहरू से नरेंद्र मोदी तक परिस्थिया जस की तस हैं, कुछ भी नहीं बदला। न पाकिस्तान के खिलाफ नारे और न ही पाकिस्तान की निचता। बल्कि स्थिति बदलने के बजाए बिगड़ती जा रही हैं।

हिंदुस्तान के जवानों पर यह अब तक का सबसे बड़ा हमला है। इस हमले के बाद सुरक्षा एजेंसीयों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। हमेशा की तरह ये हमला भी कायराना है हमले के बाद सिर्फ इस हमले की निंदा करना उससे भी बड़ी कायराना हरकत।

पाकिस्तानी आतंकियों और पाकिस्तानी सरपरस्त कश्मीरी अलगाववादियों का खत्मा एक मात्र विकल्प

हमारे देश की सीमा में घुस कर फ़ौजी और सुरक्षा बलों पर हमला करना, देश को इतना बड़ा नुकशान पहुँचाना, देश के आत्मविश्वास के साथ खेलना, हमें यह महसूस कराना कि हम अपने घर में भी सुरक्षित नहीं हैं, क्या इसकी सिर्फ निंदा करनी चाहिए ?

यह हमला ‘करना’ या इस हमले को ‘होने देना’ किसके लिए कायराना है ?

पुलवामा हत्याकांड के बाद पूरी दुनियां इस हमले की निंदा कर रही है। डोनाल्ड ट्रंप, श्रीलंका, मालदीप जैसे देश इस हमले की निंदा कर रहे हैं। अगर यह हमला अमेरिका में हुआ होता तो क्या डोनाल्ड ट्रंप इस हमले की सिर्फ निंदा कर रहे होते ?

ट्रंप, मोदी के परम मित्र हैं जिस तरह अमेरिका ने पाकिस्तान में घुस कर 'लादेन' को मारा था क्या उसी तरह मोदी के सच्चे दोस्त ट्रंप, मसूद अजहर के खात्मे के लिए अमेरिकी कमांडोज को पाकिस्तान में घुसने की इजाजत क्यों नहीं दे रहे ? ट्रंप आज कश्मीर में हुए इस हमले की सिर्फ निंदा कर रहे हैं। यह कहाँ तक उचित है। आतंकवाद का खत्मा वो भी पाकिस्तान की धरती पर यही आतंकवाद से निपटने का एक मात्र विकल्प है।

आज देश को अटल बिहारी वाजपयी और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं की जरुरत
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देश को अटल और इंदिरा की जरुरत

भारत मजबूत देश है , हमें पाकिस्तान जैसे कमजोर, कायर और ओछी हरकत करने वाले देश से निपटने के लिए भाषणबाजी, आरोप-प्रत्यारोप की जरुरत नहीं है। बस एक मजबूत और आत्मविश्वासी नेता की जरुरत है। जो सत्ता के पत्ते खेलने के बजाए देश के लिए कुछ करना चाहे। जो लोकसभा की कुर्शी के बजाए इतिहास में विराजमान होना चाहे। जो दिल्ली के बजाए दिलों में बैठना चाहे। हमें जरुरत है, अटल, इंदिरा, सरदार पटेल और लाल बहादुर शास्त्री जैसे नेताओं की।

1971 में इंदिरा की दिलेरी

1971 का वह दौर जब बांग्लादेश शरणार्थी (पूर्वी पाकिस्तान), पाकिस्तान से अपनी आजादी के लिए जूझ रहा था तब इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश की मदद की थी, बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी दिलाने के लिए इंदिरा ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया। 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान की मदद के लिए अमेरिका ने अपने सातवें बेड़े को भारत के खिलाफ कश्मीर में उतार दिया था। तब इंदिरा गाँधी ने विदेश निति और राष्ट्रीय सुरक्षा ने नियम को सतर्कता पूर्वक लेते हुए अपने सहयोगी देश रूस से राजनीतिक और सैन्य सहयोग की मांग की परिणाम स्वरूप भारत पाकिस्तान के खिलाफ 1971 का युद्ध जीत गया और बांग्लादेश पूर्ण देश के रूप में सामने आया। इंदिरा गाँधी के खाते में दिलेरी की कई मिशालें है। जिसमें ऑपरेशन ब्लू स्टार भी है।

आज देश को अटल बिहारी वाजपयी और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं की जरुरत
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जर्जर पंजाब को आतंकवाद से मुक्ति

1981 में पंजाब की हालत कश्मीर जैसी हो गई थी, पंजाब आज के कश्मीर की ही तरह समस्याओं से जर्जर हो चुका था। सिख अलगाववादी पंजाब को स्वतंत्र राज्य खालिस्तान बनाने की मांग कर रहे थे।

1980 में चुनाव जीत कर प्रधानमंत्री की कुर्सी में बैठी इंदिरा गांधी ने अलगाववादी आतंकियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 1981 में ऑपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम दिया गया जिसके बाद न तो अलगाववादियों ने दोबारा खालिस्तान की मांग की और न ही पंजाब स्वतंत्र राज्य बना।

हालांकि इंदिरा गांधी ऑपरेशन ब्लू स्टार को अपनी राजनैतिक गलती भी मानती रही, इस युद्ध में हज़ारों निर्दोष लोगों की जानें गई यहां तक कि इंदिरा गांधी की मौत का कारण भी यही रहा। लेकिन इस ऑपरेशन के बाद पंजाब दहशतगर्दी की बीमारी से मुक्त जरूर हो गया।

अटल के अटल इरादे

अटल बिहारी वाजपयी एक मात्र ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्हें पक्ष के साथ साथ विपक्ष भी उतनी ही तबज़्ज़ो देता था जितना एक सच्चे देश भक्त नेता को मिलनी चाहिए।

अटल बिहारी वाजपयी ने पांच पार्टियों के सहयोग से बनी गठबंधन सरकार को विकास की पटरी पर दौड़ाया था। वह न सिर्फ विकास के सपने दिखाया करते थे बल्कि वे वास्तव में विकास पुरुष थे। भारत को परमाणु संपन्न राष्ट्र बनाने का श्रेय भी अटल के खाते में जाता हैं। उन्होंने कैसे अमेरिका की आंखों में धूल झोंक कर भारत को परमाणु शक्ति प्रदान की थी।

अमेरिका जैसे देश से नाराजगी शायद ही कोई देश मोल लेना चाहता हो लेकिन अटल के अटल इरादे जो भारत को परमाणु संपन्न राष्ट्र के रूप में देखना चाहते थे उन इरादों ने यह असंभव सा काम संभव कर दिखाया।

कारगिल में पाकिस्तान को दी पटखनी

1999 में जब पाकिस्तान की सेना और कश्मीरी उग्रवादियों ने भारत और पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेखा पार करके भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी ने लगभग 30,000 भारतीय सैनिकों के साथ मिलकर भारतीय सीमा में घुसे करीब 5,000 पाकिस्तानी घुसपैठियों को युद्ध में मार गिराया। आज भी पाकिस्तान हमारे कश्मीर में घुसपैठिए भेज रहा है। हमें एक बार फिर अटल को दोहराने की जरुरत है।

आज देश को अटल बिहारी वाजपयी और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं की जरुरत
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हालांकि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पाकिस्तान को सबक सिखाने की, की गई कोशिश भी काबिले तारीफ है , जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने सेना को कार्यवाई करने की खुली छूट दी है और सेना पर भरोसा जताया है वह प्रशंसनीय है।

भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान को अलग-थलग करना चाहती है। भारत सरकार अपनी रणनीति के तहत देश के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर सबको अपने विश्वास में लेना चाहती है ताकि इस घटना का सैन्य स्तर पर मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

चीन डोकलाम में घुसा है और पाकिस्तानी आतंकवादी सेना कश्मीर में उत्पात मचा रही है। श्रीलंका की सरकार ने जिस तरह 'लिट्टे' का नामोनिशान मिटा दिया। अमेरिका ने जिस तरह पाकिस्तान में घुस कर 'लादेन' को मार दिया। ठीक उसी तरह पाकिस्तानी आतंकवाद को कश्मीर से और चीन को डोकलाम से मार भगाने का समय आ गया है। मोदी जी हमारा आपसे निवेदन है यह समय राजनीती करने का नहीं है जवानों के समर्थन का समय है। आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में पूरा देश आपके साथ है। जब बदला लेने की बात कही है, तो उसे करके दिखा दें।