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Delhi Govt vs Lieutenant Governor case: दिल्ली का बॉस कौन, सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला 

Delhi Govt vs Lieutenant Governor case: दिल्ली के बॉस होने उपराज्यपाल , सुप्रीम कोर्ट ने दिए पांच में से तीन अधिकार। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली सरकार बनाम दिल्ली उपराज्यपाल के मामले पर अपना फैसला सुनाया हैं। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ कर रही थी। हालांकि दो जजों की पीठ के फैसले के बाद भी मामला अभी तक पूरी तरह से सुलझा नहीं पाया है, इस मामले को लेकर दोनों जजों के विचारों में भी मतभेद है। हालांकि कुछ मुद्दों पर जजों ने अपना फैसला साफ किया है। लेकिन बात अभी बाकी है।

उपराज्यपाल को क्या मिला

  • ऑल इंडिया सर्विसेस,
  • एसीबी
  • जांच आयोगों आदि पर केंद्र को अधिकार है

सबसे पहले जस्टिस एके सीकरी ने अपना फैसला पढ़ा जिसमें जस्टिस सीकरी ने कहा कि आसानी से कामकाज के लिए एक मैकेनिज्म होना चाहिए। वहीं यह भी कहा कि ज्वाइंट सेक्रेटरी से ऊपर के लेवल का ट्रांसफर करने का अधिकार उपराज्यपाल के पास है। जस्टिस सीकरी ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) पर भी केंद्र का ही अधिकार है।

मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को क्या हासिल हुआ

  • बिजली पर राज्य सरकार का अधिकार होगा।
  • राजधानी में सभी एक्जीक्यूटिव अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी मामले में मतभेद होने की स्थिति में उपराज्यपाल की राय ही मानी जाएगी। इस प्रकार देखें तो सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से दिल्ली का बॉस मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नहीं, बल्कि उपराज्यपाल ही मालुम पड़ते हैं।

दिल्ली का बॉस कौन

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए अधिकारों को देखा जाये तो दिल्ली के बॉस उपराज्यपाल होनें। दिल्ली हाई कोर्ट ने 4 अगस्त 2016 को इस मसले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख हैं और दिल्ली सरकार उपराज्यपाल की मर्जी के बिना कानून नहीं बना सकती। दिल्ली हाई कोर्ट ने 4 अगस्त 2016 को इस मसले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख हैं और दिल्ली सरकार उपराज्यपाल की मर्जी के बिना कानून नहीं बना सकती।

जरुरत पड़ी तो राष्ट्रपति से ले सलाह

जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि दानिक्स का अधिकार सरकार के पास रहेगा, लेकिन एलजी की सहमति भी जरूरी है। अगर कोई विवाद रहता है कि दोनों पक्ष राष्ट्रपति के पास जा सकते हैं। अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास ही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि IPS की ट्रांसफर-पोस्टिंग का हक उपराज्यपाल, और DANICS-DANIPS का फैसला मुख्यमंत्री के पास रहेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि DASS और DANICS के अधिकारियों के मुद्दे पर एक कमेटी का गठन किया जा सकता है।

आपको बाता दें कि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस से पहले दिल्ली सरकार बनाम दिल्ली उपराज्यपाल पर अपना फैसला दिया था। जिसमें हाई कोर्ट ने उपराज्यपाल को दिल्ली का बॉस बताया था। इस फैसले के खिलाफ ही राज्य की आम आदमी पार्टी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसमें एक बार फिर उपराज्यपाल की जीत हुई है।