उदय बुलेटिन
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Google|वोट Vs जाति
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मेरा वोट- मेरी जाति और ‘धर्म’ वाले उम्मीदवार को, क्या यह सोच देश के गरीबों का भला करेगी ? 

हिन्दुओं के भी ठेकेदार, मुस्लिमों के भी ठेकेदार, गरीबों का ठेकेदार कोई नहीं 

AKANKSHA MISHRA

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अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने ये वादा किया है अगर वे 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करते हैं तो सत्ता में आते ही अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो जायेगा। यह बयान प्रवीण तोगड़िया में सोमवार को दिया था। उन्होंने कहा बीजेपी कई वर्षो ने राम मंदिर का नाम ले कर चुनाव लड़ती रही है और लोगों को बेवकूफ बनाकर जीत हासिल करती आई है। प्रवीण तोगड़िया के इस बयाना के बाद आज पहली बार मोदी सरकार, राम मंदिर भूमि विवाद मुद्दे पर अपना रुख साफ़ करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि अयोध्या में जो गैर विवादित स्थल है, उसे रामजन्मभूमि न्यास को वापस सौंप दिया जाए। ताकि उस हिस्से पर राम मंदिर निर्माण शुरू हो सके।

यानी राम मंदिर हमारे देश में चुनाव जीतने का हथियार है। चुनाव से पहले पार्टियां राम मंदिर का धार्मिक कार्ड खेलना नहीं भूलती। एक तरफ जहां हमारे देश में गरीबी, कुपोषण, भ्रष्ट्राचार, हिंसा चरम पर हैं, वहीं आज भी इस देश चुनाव जीतने के लिए मुद्दा 'विकास' के बजाए 'मंदिर-मस्जिद' का होता है। क्या किसी देश के लिए विकास के बजाए मंदिर-मस्जिद ज्यादा जरुरी मुद्दा है ? देश पर जब पड़ोसी मुल्क हमला करते हैं तो हम क्यों आधुनिक हथियार के पीछे भागते हैं ? क्यों हम राफेल और बोफोर्स की बात करते हैं ? हमारे पास तो भगवान राम और अल्लाह मियाँ हैं, पाकिस्तान हो या चीन हम हमारी सेना के बजाए भगवान राम और अल्लाह मियाँ को युद्द में क्यों नहीं भेज देते ? अगर विकास के बजाए मंदिर-मस्जिद इतना ही अहम मुद्दा है तो ?

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PM Modi का मंदिर दौरा 

अगर अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना नहीं हुई तो क्या होगा ? क्या बीजेपी, विश्व हिन्दू परिषद, शिवसेना, आरएसएस के पास चुनाव लड़ने के लिए कोई और मुद्दा नहीं बचेगा ? क्या कांग्रेस का सॉफ्ट हिंदुत्व फिर से ख़त्म हो जाएगा ? क्या लोगों के मन में भगवान राम के प्रति आस्था ख़त्म हो जाएगी ? क्या घर घर में भगवान राम की पूजा नहीं होगी ? क्या मुस्लिम समाज के ठेकेदार असदुद्दीन ओवैसी का राजनीतिक करियर खत्म हो जाएगा ? कत्लेकआम का शौक रखने वाला बाबर की मस्जिद के निर्माण से मुस्लिमों को क्या हासिल होगा ?

अगर ऐसा नहीं है तो हमें विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए, हमें देश की सुरक्षा को चुनना चाहिए। हमें विज्ञान को चुनना चाहिए। न कि जात-पात, और धर्म के नाम को मुद्दा बनाना चाहिए। मंदिर-मस्जिद का मुद्दा न बेरोजगारों को नौकरी दिला सकता हैं और न भूखों का पेट भर सकता है और न ही आतंकवाद से हमारी सुरक्षा कर सकता है। ये मुद्दा सिर्फ लोगों को लड़वा सकता है। हिंसा भड़का सकता है।

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अयोध्या के लिए स्पेशल ट्रेन   

अगर हम अब भी सोते रहे तो ये राजनीतिक पार्टियां हमारी धर्म-जाति की सोच को अपनी ताकत बना लेंगी और हम इसमें फंसे रहने को मजबूर हो जाएंगे। आज जिन्हें सरकार गरीब कहती है, और उनके लिए लाखों तरह की योजनाएं चलाती है , उन्हें हर सुविधाएं देने का दावा करती हैं , फिर क्यों आजादी के 72 साल बाद भी वे गरीब है ? ऐसे कौन सी गरीबी है, जो लोन माफी, मुफ्त आनाज, निशुल्क शिक्षा, निशुल्क स्वास्थ्य सेवा, आवास योजना, रोजगार गारंटी योजना के बाद भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही । जब खाना, पढाई, घर, ईलाज सब मुफ्त हैं तो गरीबी क्यों नहीं जा रही है ? या फिर सरकार की तमाम योजनाएं सिर्फ दिखावा है। सरकार को भी पता है देश की जनता जाति और धर्म के नाम पर बिकती है। मंदिर और मस्जिद के नाम पर लड़ती है।

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आलिया में लगा SP-BSP का पोस्टर

आज के नेता खुलकर सांप्रदियाक बयानबाजी करते हैं। जिससे साफ नज़र आता है कि एक संप्रदाय के प्रति नफ़रत फैलाकर चुनाव लड़ना इनकी जरुरत है। अखिलेश यादव और मायावती जब उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ते हैं तो वे विकास को मुद्दा न बना कर खुद को दलित, मुस्लमान और पिछड़ो की पार्टी बताते हैं। खुद को दलित और पिछड़ो का नेता बताने वाले लोग करोड़ो की सम्पति के मालिक है। फिर ये दलित और गरीब कहां से हो गए ? अखिलेश यादव हों या मायावती आय से अधिक सम्पति के मामले में फंस चुकें हैं।

बीजेपी तो हर चुनाव में राम का जाप लगाती है फिर चुनाव जीतने के बाद उसी राम को भूल क्यों जाती है ? सबका साथ सबका विकास नारे देने वाली पार्टी महिला विरोधी क्यों हो गई ? क्यों सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश में बीजेपी ने केरल सरकार का समर्थन नहीं किया ? बीजेपी का नारा अब बदल चुका है, सबका विकास के बजाए खुद के विकास में लगी पार्टी को इस साल 'प्रूडेंट इलैक्टोरल ट्रस्ट' की ओर से 537 करोड़ का चंदा मिला है। यह चंदा अन्य पार्टियों को मिले चंदे के मुकाबले 12 % अधिक है। बीजेपी नेता नितिन गडकरी, प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बयानबाजी कर रहे है। महिला बीजेपी नेता मायावती पर अभद्र टिपण्णी कर रही है। मकसद सिर्फ एक हैं खुद को बड़ा साबित करना और सामने वाले को छोटा । विकास का मुद्दा पीछे छूट गया है। अभद्र टिप्पणी , साम्प्रदायिक बयान आज की राजनीति की मर्यादा को तार-तार कर रहे हैं।

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राहुल गाँधी का मंदिर दौरा 

एक समय में खुद को धर्मनिरपेक्ष बताने वाली पार्टी कांग्रेस पर जब मुसलमानों की पार्टी होने का आरोप लगा तो खुद कांग्रेस अध्यक्ष ने भगवा रंग धारण कर लिया, मंदिर जाने लगे और गोत्र- जनेऊ की बात करने लगे। खुद को सबसे बड़ा हिन्दू साबित करने के चक्कर में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने दादा की कब्र (प्रयागराज के ममफोर्डगंज मोहल्ले के कब्रिस्तान) पर आज तक नहीं गए। क्या ऐसा भी भला कोई पोता होता है जो राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए अपने दादा को भी भूल जाये ? इन नेताओं का मकसद सिर्फ चुनाव जीतना और सत्ता पाना है।

अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम सही नेता का चुनाव करें। उसे चुने जो वास्तव में चुनने लायक हो, न कि जाति और धर्म के आधार पर वोट दें।