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Lok Sabha Election 2019- लोकसभा चुनाव -2019
Lok Sabha Election 2019- लोकसभा चुनाव -2019|Google Image
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लोकसभा चुनाव 2019: ‘चुनावी साल’ या घोषणाओं का ‘मौसम’ 1 फरवरी को पेश होगा बजट

अगर आप मतदाता है और आपको बिना कुछ मांगे सब कुछ मिल रहा है। आपके क्षेत्र में गाड़ियों की लंबी लंबी लाइनें लगी है, तो समझ लीजिए कि चुनाव करीब आ गए हैं। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

चाहे सरकार किसी की भी हो, प्रधानमंत्री कोई भी हो चुनाव आते ही राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो जाती हैं। राजनीतिक दलों द्वारा लोगों को खुश करना, तरह तरह की योजनाओं का प्रचार करना, लोकप्रिय निर्णय लेना चुनाव में पार्टियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है।

चुनाव करीब आते ही मतदाता माईबाप बन जाते है। जिस तरह माँ-बाप को खुश रखना हर बेटी-बेटे का फर्ज है। ठीक उसी तरह चुनाव से पहले अपने मतदाता यानि माईबाप को खुश करना हर नेता यानि बेटी-बेटे के लिए जरुरी होता है। इसलिए हर चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियां इस तरह के निर्णय लेती हैं जिससे समाज के सभी वर्गों को कुछ न कुछ देकर पुचकारा जा सके।

केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें सभी का कामकाज एक जैसा ही है। हालांकि जनहित में ली गई योजनाओं में कोई बुराई नहीं है लेकिन इनके लिए जाने वाले समय में जरूर बुराई है। अगर ये योजनाएं इतनी ही जरुरी हैं तो यही निर्णय सत्ता मिलने के बाद पहले के एक-दो वर्षों में सरकारें क्यों नहीं ले लेती हैं।

केंद्र की मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इसी तरह का रवैया रखा है। सवर्ण आरक्षण, नागरिकता संशोधन विधेयक, राम मंदिर मसला, राफेल सौदा, तीन तलाक , आर्थिक अपराधी कानून, किसान कर्ज माफी ये सभी जनहित योजनाएं कम चुनावी साल में सौगातों की बौछार ज्यादा लगती है। इन सभी योजनाओं से बढ़कर मोदी सरकार ने इस बार 1 फरवरी को बजट पेश करने के संकेत दिए हैं।

दरअसल चुनावी साल में सरकारें अंतरिम बजट पेश करती हैं, क्योंकि यह माना जाता है कि चुनाव के बाद आने वाली सरकार अपने हिसाब से नीतियां बनाएगी और इसलिए पूर्ण बजट पेश करना उसके लिए ही ठीक है। पुरानी सरकार आने वाली सरकार पर अपनी नीतियां नहीं थोप सकती। हो सकता है नई सरकार को पिछली सरकार की नीतियां पसंद न आये। लेकिन इस बार मोदी सरकार यह परंपरा तोड़ कर 1 फरवरी को पूर्ण बजट पेश कर रही है।

लोकसभा चुनाव में अब 3 महीने बच गए है, सरकार इस बजट को 'इलेक्शन धमाका बजट' बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। अगर चुनाव लड़ना और जितना ही है तो अपना कार्य कौशल दिखाकर चुनाव लड़े न की योजनाओं और घोषणाओं के बल पर।