उदय बुलेटिन
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मोदी सरकार ने स्पेक्ट्रम आवंटन में किया 69,381 करोड़ का घोटाला
मोदी सरकार ने स्पेक्ट्रम आवंटन में किया 69,381 करोड़ का घोटाला|Google
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CAG की रिपोर्ट के हवाले से कांग्रेस ने लगाया आरोप, मोदी सरकार ने स्पेक्ट्रम आवंटन में किया 69,381 करोड़ का घोटाला

कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने संवादाताओं से कहा मोदी सरकार ने माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम आवंटन में 69381 करोड़ का घोटाला किया है। 

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2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का कारण उनके राज में हुए घोटाले थे। 2जी स्पेक्ट्रम, कोल इंडिया घोटाला या कॉमन वेल्थ गेम घोटाला इन सभी मामलों ने जम कर सुर्खियां बंटोरी थीं। उस समय कांग्रेस पर लगा 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामला भारत का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला माना गया। 2010 में जारी CAG की रिपोर्ट के मुताबिक यह घोटाला 1,76,000 करोड़ रूपये का बताया गया था लेकिन CBI की छानबीन के बाद यह घोटाला 31,000 करोड़ में पहुंच गया। जिसका परिणाम हुआ कांग्रेस लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हार गई , और भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई।

अब ऐसे ही कुछ दाग मोदी सरकार पर भी लग रहे हैं, CAG की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर आरोप लगाया गया है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कंपनियों को जिस तरह लाभ पहुंचाया गया था मोदी सरकार ने भी वही फार्मूला अपनाया है। सरकार ने स्पेक्ट्रम नीलामी के बजाय ‘पहले आओ और पहले पाओ’ की नीति पर लाइसेंस दिए है। कांग्रेस आरोप लगा रही है कि मोदी सरकार ने 'पहले आओ-पहले पाओ' नियम के तहत माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम अपने दोस्तों (रिलायंस जियो -2015) को बांट दिया। जबकि 2स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि ठेकों के लिए बोली लगाई जाए। अब कांग्रेस मोदी सरकार पर 69,381 करोड़ रूपये घोटाले का आरोप लगा रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मोदी सरकार पर आरोप लगते हुए कहा कि पिछले चार साल आठ महीने में सिर्फ स्पेक्ट्रम क्षेत्र को देखे तो मोदी सरकार ने तीन बड़े बड़े घोटाले किये है। जनवरी 8, 2018 में 125 पेज की एक CAG रिपोर्ट के अनुसार जिसमें साफ साफ कहा गया है कि मोदी सरकार ने 2015 पहले आओं, पहले पाओ नियम के तहत स्पेक्ट्रम बांटे हैं।CAG की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2012 में DoT (दूरसंचार विभाग) ने एक कमेटी बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस कमेटी ने कहा था कि ठेके की पहले बोली लगाई जाएगी लेकिन मोदी सरकार ने पहले से गठित इस कमिटी का फैसला न मानते हुए 'पहले आओ, पहले पाओ' के तहत स्पेक्ट्रम बांटे। जबकि CAG कि रिपोर्ट में लिखा गया है कि उस समय सरकार के पास पहले से माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम के लिए 101 आवेदन पड़े हुए थे।

कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया है कि मोदी सरकार से पुराने नियमों के तहत स्पेक्ट्रम बांटे और 2016 की CAG रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार ने प्राइवेट कंपनी को 45,000 करोड़ का लाभ पहुंचाया।

CAG रिपोर्ट में कहा है "टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने साल 2015 में पहले रिलायंस जियो को और फिर उसके बाद सिस्टेमा श्याम टेलीसर्विसेज कंपनी को बिना किसी नीलामी के माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम का ठेका दे दिया गया। रिपोर्ट कहती है कि दूरसंचार विभाग की कमेटी की सिफारिशों को दरकिनार करते हुए सरकार ने ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति के तहत स्पेक्ट्रम बांट दिया जबकि सरकार के पास 101 आवेदन पेंडिंग पड़े हुए थे।”

अब कांग्रेस मोदी सरकार पर कुछ बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगा रही है और साथ ही सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का। मोदी सरकार ने कुछ ऐसे कदम उठाये हैं जिससे रिलायंस जियो जैसी बड़ी टेलिकॉम कंपनियों को जो सरकारी खजाने में एक्स्ट्रा चार्ज देना था उससे राहत मिल जाए। सरकार ने नीलामी का साल भी बढ़ा दिया है। पहले स्पेक्ट्रम नीलामी का पैसा 10 सालों में देना था जिसे सरकार ने बढ़ाते हुए 16 साल कर दिया है। जिससे राजस्व पर असर पड़ रहा है।

हालांकि कांग्रेस के इस आरोप पर बीजेपी का कोई बयान नहीं आया है। लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा की कांग्रेस का मोदी सरकार के खिलाफ खेला गया यह दांव कितना सटीक बैठता है।