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अयोध्या विवाद : राम मंदिर पर फिर टली सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
अयोध्या विवाद : राम मंदिर पर फिर टली सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई|Google
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अयोध्या विवाद : राम मंदिर पर फिर टली सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 3 जजों की बेंच 10 जनवरी से करेगी सुनवाई

सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या जमीन विवाद मामले पर 2014 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई नई बेंच करेगी।

AKANKSHA MISHRA

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नई दिल्ली: Ayodhya Case Hearing- देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या जमीन विवाद मामले पर 2014 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई नई बेंच करेगी। करीब 60 सेकंड की चली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कि 10 जनवरी से पहले तीन जजों की बेंच तैयार हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि अयोध्या मामला (Ram Janmbhoomi Babri Masjid dispute) अब 10 जनवरी को नई बेंच के सामने सुनवाई होगी और वही बेंच तय करेगी कि इस मामले की आगे कब सुनवाई हो। चीफ जस्टिस ने के आदेश पर 3 जजों की बेंच गठित की जाएगी। जो अयोध्या मामले 10 जनवरी से सुनवाई करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2018 में वकील हरिनाथ राम द्वारा दायर जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें अयोध्या मामले को तत्काल और दिन के आधार पर सुनने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने 60 सेकंड की सुनवाई में अगली तारीख की घोषणा की, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से कोई तर्क नहीं रखा गया था।

आपको बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संवैधानिक पीठ अयोध्या विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) द्वारा 2010 में दिए गए फैसले के खिलाफ दायर 13 जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। ज्ञात हो की 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या (Ram Janmbhoomi Babri Masjid dispute) में 2.77 एकड़ के इस विवादित स्थल को इस विवाद के तीनों पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बांटने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि अदालत की अपनी प्राथमिकताएं हैं। उचित पीठ ही अब इस मामले में सुनवाई जनवरी, फरवरी में हो या उसके बाद। बता दें कि, पिछले साल 27 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच ने 2-1 के बहुमत से फैसला दिया था कि 1994 के संविधान पीठ के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है, जिसमें कहा गया था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है।