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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह |Google
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विधानसभा चुनाव परिणाम 2018: लोकसभा चुनाव में क्या मायने रखती है कांग्रेस की तीन राज्यों में जीत, क्या BJP को बदलनी पड़ेगी रणनीति ?

5 राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव के परिणाम लगभग आ चुके है, परिणामों को अगर देखा जाये तो यह BJP और PM मोदी के लिए अच्छे संकेत नहीं है। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए BJP को नई रणनीति की जरुरत होगी। 

AKANKSHA MISHRA

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नई दिल्ली: अब तक मिली खबर के अनुसार पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी को जनता का जबरदस्त समर्थन मिला है। छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी का सफाया होता नज़र आ रहा है , तो वही मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस बहुमत के साथ सरकार बनाने की कोशिश में है। राजस्थान पांच सालों में सत्ता परिवर्तन का पक्षधर रहा है इसलिए इसबार राजस्थान में कांग्रेस की वापसी हो रही है। कांग्रेस को 3 राज्यों में मिली जीत के अनुसार इसे 2019 के लोकसभा चुनाव का सेमीफइनल माना जा रहा है। अगर पांच राज्यों के इन विधानसभा चुनाव को देखें तो कांग्रेस की ये बड़ी जीत भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए अच्छे संकेत नहीं है।

प्रधानमंत्री के लिए देशहित सर्वोपरि

विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को उम्मीद जताई कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों की चिंताओं से ज्यादा राष्ट्रीय हित को महत्व दिया जाएगा। हालांकि पिछले पांच सालों में प्रधानमंत्री मोदी से जनता के समक्ष कई लोकलुभावन वादे किये थे। कुछ पूरे हुए और कुछ जुमले रह गए। प्रधानमंत्री की देशहित सर्वोपरि योजनाएं जमीनी हकीकत से अभी तक कोसों दूर है। हालांकि आगामी लोकसभा चुनाव 2019 को देखते हुए उम्मीद है की बीजेपी सरकार द्वारा बनाई गई योजनाओं का लाभ जनता को मिले।

राहुल गांधी की छवि

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली बार है जब गांधी के हिस्से में इस तरह की पहली बड़ी सफलता हाथ लगी है। कांग्रेस अगर इन तीनों राज्यों में सरकार बनाने में सफल होती है तो आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा। यह जीत राहुल गांधी और कांग्रेस दोनों के लिए संजीवनी होगी।

साथी छोड़ रहे हैं साथ

एनडीए गठबंधन के सहयोगियों का भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगता रहा है कि बीजेपी अपने सहयोगी पार्टियों को खास तवज्जो नहीं दी है। शिवसेना और RLSP नेता उपेंद्र कुशवाहा बीजेपी पर आरोप लगाते रहे हैं कि बहुमत मिलने पर बीजेपी को अपने सहयोगी दलों की जरुरत नहीं। लेकिन पांच राज्यों के इस विधानसभा चुनाव को देखते हुए लगता है कि बीजेपी को अपने सहयोगी पार्टियों की जरुरत है।