क्या ऑनलाइन रिव्यू देखकर स्मार्टफोन खरीदना चाहिए? क्या ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के नाम पर होता है धोखा

स्मार्टफोन ड्यूरोबिल्टी टेस्ट के बहाने मोबाइल को तोड़कर दिखाना कैसा रिव्यू है? कहीं आपका पसंदीदा Youtuber आपको चूना तो नहीं लगा रहा?
क्या ऑनलाइन रिव्यू देखकर स्मार्टफोन खरीदना चाहिए? क्या ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के नाम पर होता है धोखा
Smartphone Reviews TruthYoutube Videos Screenshots

अगर आप किसी फोन को खरीदने का मन बना रहे है तो आपका सबसे पहला कदम उस फ़ोन के यूजर के रिव्यू (smartphone reviews) देखने की ओर होगा और यह सब संभव हो पाता है यूट्यूब की कृपा से। लेकिन यहाँ अलग ही गंध फैल रही है, यहां तो फोन को भयानक तरीके से तोड़ा मरोड़ा जाता है। ये कैसा रिव्यू?

तकनीकी जानकारी तो ठीक है और अधिकार भी :

दरअसल सूचना प्रौद्योगिकी ने जैसे-जैसे अपना विकास किया समाज जरूरत से ज्यादा की मांग करने लगा, इसके फलस्वरूप तकनीकी सेवा प्रदाताओं ने नए-नए माहौल पैदा करके नई-नई तकनीकी को समाज के सामने रखा। इसी क्रम में मोबाइल फोन जो आगे चलकर स्मार्टफोन बना और तकनीकी के मामले में दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करता चला गया। इस बीच यूट्यूब पर स्वघोषित तकनीकी विशेषज्ञों की बाढ़ सी आयी और आज हालात यह है कि आप किसी कंपनी के स्मार्टफोन का नाम यूट्यूब पर नाम डालिये सैकड़ो वीडियो ऐसे मिल जाएंगे जहां स्मार्टफोन का लाइव पोस्टमार्टम किया जा रहा है। इसमें सबसे मजेदार माहौल तब बनता है जब तकनीकी जानकारी बताने और व्यूज कमाने के चक्कर में लोग मोबाइल तोड़ते फोड़ते नजर आते है यहां तकनीकी की गहराई से किसी को कोई मतलब नहीं होता बस केवल तोड़फोड़ होती है।

एक ब्रांड के साथ और एक के खिलाफ :

दरअसल स्मार्टफोन बाजार में भयानक गलाकाट प्रतियोगिता चल रही है, यहां हर रोज कोई न कोई कंपनी अपना नया फोन लॉन्च करती रहती है और इसी का नतीजा है कि खास प्रकार के युट्यूबर को इस तरह की तबाही करने का मौका मिल जाता है। जो मोबाइल को बनाने से ज्यादा तोड़ने में मगशूल रहते है, आखिर कमाई का जरिया भी वही है, इसका सीधा-सीधा संबंध ब्रांड की छवि खराब करने और किसी ब्रांड विशेष की छवि को उज्ज्वल बनाने का खेल होता है। हालांकि यूट्यूब की दुनिया मे सभी ऐसे नहीं है लेकिन अधिकतर ऐसे ही लोग है जिनको ब्रांड विशेष के द्वारा काफी फंडिंग की जाती है नतीजन उन्हें दूसरे ब्रांड को नीचा दिखाना होता है, इसके लिए युट्यूबर दूसरे ब्रांड के द्वारा दिये गए पैसो से विरोधी ब्रांड का स्मार्टफोन खरीदकर तोड़ने से गुरेज नहीं करते।

यहीं से शुरू होती है ब्लैकमेलिंग :

ऐसा नहीं कि ये काम सिर्फ तोड़ने फोड़ने से ही शुरू होता है बल्कि ये एक लंबे प्रोसेस का नतीजा है सबसे पहले ब्रांड से रिव्यू करने और उसके ब्रांड की अच्छी बातें दर्शकों को बताने के लिए भारी भरकम पैसे लिए जाते है और अगर ब्रांड उन्हें मनमाफिक पैसे मुहैया करा देता है तो ठीक है नहीं तो फिर शुरू होता है तांडव, फिर फोन को हांथो की ताकत से बैंड करने, तोड़ने, चाकू से खुरचने, स्क्रीन पर पत्थर मारने और अपने सर से भी ज्यादा ऊँचाई करीब 7 फिट ऊँचाई से फेंकने पर समाप्त होता है। इसका मुख्य कारण है ब्रांड के मन मे ख़ौफ़ भरना।

"भला कौन व्यक्ति अपने स्मार्टफोन के साथ कुश्ती लड़ता है"

कुलमिलाकर ये सारा खेल दिमाग का है जहाँ अपनी पहुँच होने की वजह से लोगों के दिमाग के साथ खेला जाता है ताकि पैसे मिलने का रास्ता बने क्योंकि मुझे नहीं लगता कि दुनिया मे कोई ऐसा फोन बना हो जो पत्थर से टकरा कर न फूटे, या फिर कई क्विंटल वजनी कार के नीचे आकर कौन सा फोन नहीं टूटेगा? या फिर खाते वक्त सलाद कम हो जाये तो सब्जियां स्मार्टफोन की स्क्रीन ओर काटी जा सकती है.......या फिर इस तरह की टेस्टिंग के चलते स्मार्टफोन निर्माताओं को बुलेटप्रूफ स्मार्टफोन बनाने पड़ेंगे।

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उदय बुलेटिन
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