गुना मामले में मध्यप्रदेश सरकार ने उठाये सख्त कदम, मामले में दोषियों को सरकार ने किया किनारे

गुना कांड में कलेक्टर, एसपी, आईजी को हटाए जाने के बाद 6 पुलिसकर्मी भी निलंबित किये गए।
गुना मामले में मध्यप्रदेश सरकार ने उठाये सख्त कदम, मामले में दोषियों को सरकार ने किया किनारे
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गुना मामले को लेकर सब जगह इसलिए बवाल मच गया क्योंकि मामले में किसी दलित के ऊपर पुलिस ने बर्बरता दिखाई है। लेकिन पुलिस की सबसे बड़ी गलती यह है कि उसने मोहरे को ही अपना निशाना बना लिया और इसके पीछे के मास्टरमाइंड सुरक्षित बचे रहे।

सरकारी जमीन से जुड़ा है मामला:

दरअसल यह विवाद एक ऐसी जमीन से शुरू हुआ जो मध्यप्रदेश के गुना जिले की बाहरी सीमा में एक मॉडल स्कूल के लिए सुरक्षित की गयी थी। लेकिन जब आला अधिकारी इस जमीन की माप जोख के लिए मौके पर पहुंचे तो इस पर एक दंपति राजकुमार अहिरवार उम्र लगभग 38 वर्ष और पत्नी सावित्री उम्र करीब 35 वर्ष ने अपना कब्जा जमाया हुआ था, यहां पर आला अधिकारियों ने उक्त जमीन पर कब्जा हटाने की बात कही और वापस दोबारा आने की जानकारी दी।

फिर पहुंची पुलिस और हुआ वर्दी का नंगानाच:

इसके बाद दोबारा जब गुना पुलिस मौके पर पहुंचीं तो दंपति को मौके पर पाया और जमीन पर फसल को पाया। मामले पर पुलिस ने अपने पुराने ट्रैक रिकार्ड को दोहराते हुए दंपति पर बर्बरता शुरू कर दी, पुलिस ने पति और पत्नी को बच्चों की मौजूदगी में न सिर्फ पीटा बल्कि खड़ी हुई फसल को जेसीबी के माध्यम से नष्ट कर दिया और रहने वाली जगह को भी नेस्तोनाबूद कर दिया। साथ ही दंपति को टांग कर जगह से बाहर फेंक दिया।

राहुल गांधी ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई:

छुब्ध होकर खाया कीटनाशक:

इसी मारपीट और बेइज्जती की वजह से दलित दंपति ने कीटनाशक को पी लिया और लोगों के कहने पर भी दोनो लोग अस्पताल जाने को तैयार नहीं थे। पुलिस ने जबरदस्ती दोनो लोगों को अस्पताल पहुँचाया जहा पर दोनों का इलाज चल रहा है और अब अस्पताल प्रशासन द्वारा दोनों की स्थिति स्थिर बतायी जा रही है।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और दलित नेता मायावती ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की है:

वीडियो वायरल होने पर कसा शिकंजा:

पुलिस द्वारा बर्बरता किये जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिसकी वजह से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गंभीरता दिखाते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश जारी किए। खुद मुख्यमंत्री ने यह कहा है कि बर्बरता करने वाले किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और किसी भी कीमत पर ऐसा कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भूमाफिया का फैला है जाल:

जानकारों की माने तो यह मामला उतना सीधा नहीं है जितना दिख रहा है, बल्कि इसका एक दूसरा कोण भी है जिसको जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। दरअसल राजकुमार अहिरवार को इस जमीन को गब्बू पारदी के द्वारा बटाई पर खेती कराई जा रही थी। कहने का मतलब गब्बू ने उस जमीन पर असल रूप से कब्जा किया था और राजकुमार को जमीन में उगने वाली फसल पर आधा हिस्सा देने की बात कही थी और संज्ञान में ये भी आया है कि दोनों को कीटनाशक पीने के लिए भी गब्बू ने ही प्रेरित किया। लकिन गब्बू के वर्चस्व की वजह से प्रशासन गब्बू पर हाँथ डालने से बच रहा है।

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उदय बुलेटिन
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