Indian Army Full Body Protection
Indian Army Full Body Protection|Uday Bulletin
टेक बुलेटिन

सेना के मेजर को लगी गोली, बना डाली अभेद्य बुलेटप्रूफ जैकेट ! 

अब देश के सैनिक होंगे पहले से ज्यादा सुरक्षित।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

आवश्यकता आविष्कार की जननी है ये तो जग जाहिर है लेकिन जब कोई भुक्तभोगी होता है वह बचाव के नए नए तरीके निकाल लेता है, लेकिन यहाँ सवाल जिंदगी का है। भारतीय सेना के मेजर ने सैनिकों की जान बचाने का नया रास्ता निकाला है।

भारतीय सेना में कार्यरत एक मेजर साहब है अनूप मिश्रा जी, मिश्रा जी अपनी ड्यूटी के दौरान कश्मीर में तैनाथ थे। और जैसा आप कश्मीर के हालातों के बारे में जानते रहे है एक दिन आतंकियों के साथ एनकाउंटर के दौरान मेजर मिश्रा को गोली लगी। एके 47 की वो भी बुलेटप्रूफ जैकेट होने के बावजूद मेजर अनूप को लंबे समय तक चिकित्सा के सहारे बिस्तर पर रहना पड़ा और तकलीफ मिलती रही। आखिरकार अनूप मिश्रा के दिमाग मे एक आइडिया ने जन्म लिया और इस नई बुलेटप्रूफ जैकेट की सोच को जन्म दे दिया।

बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने के बाद लगी थी गोली :

अनूप मिश्रा को ऑपरेशन में उस वक्त गोली लगी थी जब उन्होंने आर्मी द्वारा दी गयी बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी। दरअसल सेना को मुहैया कराये जानी वाली जैकेट किसी हद तक सिंगल फायर और दूर से किये गए फायर को ही रोक पाने में सक्षम है इसके उलट अगर फायर बर्स्ट हो और नजदीक से किया गया हो तो नुकसान होने लाजिमी है। यहाँ स्नाइपर जैसी खतरनाक बंदूक की गोली रोकने का सवाल ही नही है।

ये स्नाइपर तक को निढाल कर देगी :

मेजर अनूप मिश्रा ने सेना की इंजीनियरिंग ट्रेनिंग को अपने जीवन मे इस कदर उतारा और ऐसी जैकेट बनाई जो न सिर्फ एसाल्ट रायफल बल्कि दूर से निशाना साधकर काम तमाम करने वाली स्नाइपर रायफल भी बेअसर हो जाएगी। मेजर अनूप मिश्रा ने बताया कि अगर कुछ अपवादों को छोड़ा जाए तो हाँथ में लेकर फायर करने वाले सभी लाइट गन्स के फायर इसमे लगभग बेअसर ही होंगे।

देगी फुल कवरेज :

एक ओर जहां परंपरागत बुलेटप्रूफ जैकेट सैनिक को केवल सीने और कुछ हद तक पीठ तक को ही कवर करती है। बल्कि मेजर मिश्रा द्वारा डिजाइन की और बनाई गई जैकेट गर्दन से लेकर कमर के निचले हिस्से तक को इस कदर कवर करती है कि किसी भी हालत में कोई गोली सैनिक को छू नही सकती बल्कि इस जैकेट में बाहों की सुरक्षा तक का ख्याल रखा गया है।

सेना प्रमुख ने किया सम्मानित:

सेना प्रमुख ने मेजर मिश्रा की इस खोज के लिए उन्हें पुरुस्कृत किया है तथा इस आविष्कार को सेना के लिए रिसर्च में शामिल डीआरडीओ ने भी स्वीकृति दी है। सेना इस जैकेट के बड़ी मात्रा में सप्लाई के लिए टेंडर जारी कर सकती है।

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