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टेक बुलेटिन

चीन के विरोध के बाद भारतीय स्मार्टफोन कंपनियों में आ सकता है उछाल, तैयारी में है सब

चीन विरोध के बाद अब भारत का अगला कदम चीन की अर्थव्यवस्था को ठिकाने लगाना है, हालांकि इस मामले में कई पेचीदगियाँ का होना समस्याएं खड़ा करता है लेकिन एक कहावत है देर आये लेकिन दुरुस्त आये

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

देशी कंपनियां कर सकती है बड़ा एलान:

चूँकि मुकाबला अब देशी और चायनीज के बीच है जिसमें हर हाल में भारतीय देशी कंपनियों को लाभ मिलना तय है बशर्ते कंपनियां उस खाई को पाट सके जिसकी वजह से ये देशी कंपनियां बाजार की प्रतिस्पर्धा से बिल्कुल अलग-थलग हो गयी थी। इस मामले में भारत की कुछ कंपनियां रेस में काबिज है और जिनसे उम्मीदें भी की जा सकती हैं।

माइक्रोमैक्स:

शुरुआत में फीचर्ड वाले मोबाइल बनाने वाली कंपनी जिसने एक वक्त में सामान्य फोन के बाजार पर राज किया है वह चीन के साथ हुए विरोध और फिर चीनी उत्पादों के बहिष्कार के बाद अपने उखड़े हुए पांव दोबारा जमा सकती है। जानकारों की माने तो सबसे ज्यादा उम्मीदें भी माइक्रोमैक्स से ही हैं क्योंकि पहली बात तो यह है कि माइक्रोमैक्स को विदेशी स्मार्टफोन निर्माताओं के साथ काम करने का अनुभव भी है जिसकी वजह से माइक्रोमैक्स से उम्मीद रखी जा सकती है कि यह उपयोगकर्ताओं की डिमांड पर खरी उतर सके।

सूत्रों के अनुसार माइक्रोमैक्स जल्द ही बाजार में मिड बजट रेंज (8000-12000) के बीच तीन स्मार्टफोन लॉन्च कर सकती है सूत्रों के अनुसार माइक्रोमैक्स अभी यूजर इंटरफेस पर गहन काम कर रहा है। सनद रहे कि माइक्रोमैक्स एक वक्त तक अग्रणी स्मार्टफोन कंपनी हुआ करती थी लेकिन बाजार में कंपटीशन न कर पाने की वजह से यह देशी ब्रांड बाजार से लगभग गायब ही हो गया था।

एक ट्विटर उपयोगकर्ता के सवाल में माइक्रोमैक्स ने ताजा जानकारी मुहैया कराई है।

लावा भी है रेस में:

अगर आप भारत मे सस्ते मोबाइल और स्मार्टफोन की बात करें और लावा को भूल जाये तो ये आपकी सबसे बड़ी भूल होगी। लावा वह कंपनी है जो आज के वक्त में भी दूसरे बड़े नाम वाले ब्रांड के लिए स्मार्टफोन मैन्यूफैक्चरिंग करती है लेकिन शायद लावा भी इस चीन विरोध के बीच अपने आप को दोबारा लांच कर सकती है। याद रहे कि एक वक्त तक लावा का कीपैड मोबाइल युग मे राज रह चुका है। हालाँकि आसार यह नजर आता है कि लावा दोबारा स्मार्टफोन की दुनिया मे कमबैक कर सकती है।

कार्बन मोबाइल:

यह मोबाइल कंपनी इस वक्त बेहद साइलेंट मोड़ में है लेकिन वक्त की नजाकत भांपते हुए बाजार में खुद को प्रतिष्ठित कर सकती है। चूंकि यह स्मार्टफोन कंपनी भी एक वक्त देशी दिग्गज कंपनियों में गिनी जाती थी इसलिए उम्मीद है कि कार्बन मोबाइल दोबारा कमबैक करे।

सेलकॉन मोबाइल:

मुख्यता यह स्मार्टफोन कंपनी स्मार्टफोन और टेबलेट बनाने के लिए जानी जाती है लेकिन बाजार में प्रतिस्पर्धा की मार से टूटी हुई कंपनी आजकल इंटरनेट की दुनिया से भी गायब है लेकिन उम्मीद है इस वक्त में कुछ जलवा दिखा सके।

हालांकि इस मामले में भारतीय कंपनियों के अलावा बड़ा लाभ उन विदेशी कंपनियों को मिल सकता है जो चीन से नहीं है मसलन नोकिया को भारत मे दोबारा जीवनदान मिल सकता है आपको यहां बताते चले कि नोकिया इस समय फिनलैंड की कंपनी एच एम डी ग्लोबल के स्वामित्व में है इसके साथ ही अमेरिकी कंपनी इन्फ़िक्स और स्मार्टफोन की दुनिया मे पहले से काबिज सैमसंग और ताइवान की प्रमुख स्मार्टफोन निर्माता कंपनी आसुस शामिल है।

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com