Fake Mobile Accessories Market in Banda 
Fake Mobile Accessories Market in Banda |Google
टेक बुलेटिन

डुप्लीकेट मोबाइल एसेसरीज से भरा पड़ा बाँदा का बाजार, 20 हज़ार में बिक रहा iPhone X

असली के नाम पर नकली प्रोडक्ट बेंचकर कंपनियों और ग्राहकों लगाया जा रहा जबरदस्त चूना।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

भारत तगड़ा वाला नकलची देश है, यहाँ अगर आपको किसी व्यक्ति का भी डुप्लीकेट चाहिए तो संभावना है कि वह भी मिल सकता है। फिर तो यह मोबाइल एसेसरीज का बाजार है, यहां तो खुल्लेआम बड़ी-बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट की धज्जियां उड़ाई जा रही है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सरकार को राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। इस कारिस्तानी में उड़ान (https://udaan।com) नामक बिजनेस टू बिजनेस एप अहम भूमिका निभा रहा है।

बाँदा में अगर आप किसी मोबाइल एसेसरीज को लेने के इच्छुक है तो आप को बेहद सावधानी बरतनी पड़ेगी। क्योकि यहाँ आप को फिलिप्स, नोकिया, सैमसंग,शाओमी, वीवो, ओप्पो समेत अन्य अग्रणी कंपनियों के पार्ट और साथ मे प्रयोग होने वाले उपकरण जैसे इयरफोन, बैटरी, चार्जर, यहां तक कि फोन भी इस प्रकार उपलब्ध है कि आपकी घिघ्घी बंध जाएगी।

जेबीएल की ब्रांडिंग वाला इयरफोन मात्र 100 रुपये में :

बाँदा के माहेश्वरी देवी मोबाइल मार्केट में बिजनेस करने वाले व्यवसायी ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि हेडफोन और साउंड निर्माता कंपनी जो अपने क्षेत्र में अग्रणी मानी जाती है उसके नकली उत्पाद जिनकी वास्तविक कीमत 50 रुपये से भी कम है लेकिन कंपनी का नाम दिखाकर ग्राहकों को 100 रुपये के मूल्य पर बेचा जा रहा है, यहाँ सनद रहे कि इस बिक्री का कोई रिकार्ड नहीं होता है, जिसकी वजह से सरकार को भी चूना लगाया जा रहा है।

आईफोन एक्स भी मात्र बीस हजार में :

स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि दुकानों पर आईफोन एक्स की कॉपी मात्र बीस हजार में उपलब्ध है जिसका ओरिजनल मूल्य 1 लाख तक जा सकता है, आप ऐसे में अगर कोई फोन खराब होता है तो जाहिर सी बात है कि एप्पल का नाम खराब होगा।

उड़ान एप से होती है खरीददारी :

जनाब यहाँ सब सिस्टम का खेल है और इस खेल में डुप्लीकेट सामानों को विक्रेताओं तक पहुचाने का जिम्मा उड़ान एप ने निभाया है, जो सेलर्स के डुप्लीकेट माल को स्थानीय विक्रेताओं तक पहुचाने का काम कर रही। जिसकी वजह से उपभोक्ताओं को निम्नतर माल से समझौता करना पड़ रहा है और उनकी जेब गलत तरीके से खाली हो रही है।

स्थानीय प्रशासन अंकुश लगाने में अक्षम :

भले ही बाजार पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने तमाम तामझाम फैलाये हो लेकिन कालाबाजारी का यह बाजार लंबे समय से फल फूल रहा है, जिसपर स्थानीय प्रशासन जिसमे गुड्स एंड सर्विस जैसे विभाग भी केवल कागजो को ही आधार मान कर चल रहे है, चूंकि इन सामानों को बिना किसी बिल और वारंटी के बेचा जा रहा है इस प्रकार से सरकार को भी लाभ से वंचित किया जा रहा है !

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उदय बुलेटिन
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