जनरल मोटर्स की तरह हार्ले-डैविडसन ने भी भारतीय बाज़ार को कहा अलविदा।

करीब 10 साल पहले जब Harley-Davidson इंडियन बाजार में आई थी तब हार्ले को लगता था कि भारत में उनका बिज़नेस खूब चलेगा लेकिन साल दर साल घटती बिक्री ने हार्ले डैविडसन के अरमानों पर पानी फेर दिया
जनरल मोटर्स की तरह हार्ले-डैविडसन ने भी भारतीय बाज़ार को कहा अलविदा।
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युवाओं के दिल पर राज करने वाली हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिल ने भारत को अलविदा कहने को मन बना लिया है, हार्ले की बिक्री और मुनाफा भारतीय बाजार मेंकम हो गया है यही कारण कि हार्ले ने भारत से अपना बोरिया बिस्तर समेटने लिया है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दो पहिया वाहन का मार्केट है और ऐसी हमेशा डिमांड में रहने वाली मार्केट तो शायद ही कोई छोड़ कर जाना चाहे लेकिन यह एक अधूरी सच्चाई है, बीते कुछ वर्षों से भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में बेहद ही कड़ा कम्पटीशन रहा है ऐसे में हार्ले डैविडसन (harley davidson) जैसी नामी गिरामी कंपनी का अपना बोरिया बिस्तर बाँध कर निकल जाना इस बात की गवाही देता है।

लक्ज़री मोटरसाइकिल्स में हार्ले डैविडसन एक बेहद ही चर्चित नाम है। लेकिन भारत में इसको कुछ ख़ास कामयाबी नहीं मिली। कंपनी ने वर्ष 2019 में लगभग 2500 बाइक्स बेचीं थी। जोकि 2018 से 22 % कम है। कंपनी का कहना है कि वह अमेरिका और यूरोप जैसे प्रीमियम बाइक्स के बड़े मार्केट पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करना चाहती है और उसकी कमाई का 70% हिस्सा भी यहीं से आता है।

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10 साल पहले की थी शुरुवात:

हार्ले डैविडसन अमेरिका की एक जानी मानी प्रीमियम बाइक निर्माता कंपनी है उसने 2010 में भारतीय बाजार में एंट्री ली थी उसने भारत में अपने इन छह प्लेटफार्मों पर बनी स्पोर्टस्टर, डायना, सॉफ्टेल, वी-रॉड, टूरिंग और स्ट्रीट 11 मॉडल्स भारतीय बाज़ारो में उतारे था। मगर यहाँ के बाज़ारो में लक्ज़री मोटरसाइकिल्स की इतनी डिमांड न होने के कारण हार्ले-डैविडसन की सेल्स दिन प्रतिदिन गिरती गयी आंकड़ों के मुताबिक हार्ले-डैविडसन पिछले 10 साल में सिर्फ 25000 बाइक्स ही बेच पायी थी और उसकी सबसे ज्यादा बिकने वाली बाइक थी स्ट्रीट 750।

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2017 से भारतीय बाज़ार को टाटा करने वाली ये तीसरी अमेरिकी कंपनी है:

इससे पहले जनरल मोटर्स ने अपने गुजरात स्थित प्लांट को बेचकर भारत से अपना कारोबार समेट लिया था।

फोर्ड (FORD) ने भी 2019 में भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) के साथ जॉइंट वेंचर (joint venture) किया था और साथ मिलकर प्रोडक्ट बनाने और उनकी मार्केटिंग करने का करार किया था।

किन कारणों से हार्ले भारत में हुई फेल?

हार्ले-डैविडसन भारतीय बाजार की डिमांड के हिसाब से कोई मोटरसाइकिल नहीं लेकर आ पायी भारत और यही बजह है कि हार्ले को भारत से अलविदा कहना पड़ रहा है।

भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक से एक दिग्गज बाइक निर्माता बैठे हुए है और ये यहाँ की डिमांड को अच्छी तरह से समझ चुके है कि उन्हें क्या प्रोडक्ट्स बनाना है और कौन से फीचर्स कम दामों पर देने है।

रॉयल एनफील्ड, ट्रायम्फ और बेनेली ने यह काम बखूबी किया है और यही वजह है कि आज तक ये कंपनिया भारतीय बाजार में बानी हुई हैं

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हार्ले-डैविडसन के भारत छोड़ने से करीब 70 लोगों की जाएगी नौकरी:

कोरोना काल में बेरोज़गारी चरम पर है इसी बीच लोगों की बाइंग पावर (खरीदारी करने की क्षमता) पर भी गहरा असर बड़ा है।

ज्ञात हो कि ऑटोमोबाइल सेक्टर पिछले कुछ सालो से वैसे ही मंदी से जूझ रहा है और अब उसपर कोरोना की मार ने तो ऑटो इंडस्ट्री के बड़े प्लेयर्स के भी हाँथ पैर फुला दिए है। हार्ले का भारत से अपना बोरिया बिस्तर समेटने का एक कारण यह भी हो सकता है।

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उदय बुलेटिन
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